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नकली डीएपी खाद से किसान ठगे जा रहे हैं: जदयू विधायक प्रमोद कुमार सिंह की चेतावनी

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नकली डीएपी खाद से किसान ठगे जा रहे हैं: जदयू विधायक प्रमोद कुमार सिंह की चेतावनी

सारांश

औरंगाबाद में जदयू विधायक प्रमोद कुमार सिंह ने खुलासा किया कि डीएपी के नाम पर नकली खाद बेचकर किसानों को ठगा जा रहा है। खाद की कीमत ₹2,000 पार, नहरों में पानी नहीं — बिहार के किसान इस खरीफ सीजन में दोहरी मार झेल रहे हैं।

मुख्य बातें

जदयू विधायक प्रमोद कुमार सिंह ने 22 अगस्त को औरंगाबाद में कहा कि डीएपी के नाम पर नकली खाद बेचकर किसानों को ठगा जा रहा है।
डीएपी की माँग चरम पर है जबकि आपूर्ति कम है, जिससे सिंडिकेट बनाकर कालाबाजारी करने वालों को बढ़ावा मिल रहा है।
किसान उदय कुमार टेंगरा सहित अन्य किसानों ने बताया कि खाद की कीमत ₹2,000 प्रति बैग के पार जा चुकी है।
रोपाई के बाद भी सिंचाई नहीं हो पाई है — नहरों में पानी नहीं है, जिससे फसल संकट में है।
विधायक ने किसानों से कृषि अधिकारियों की सलाह मानकर डीएपी के विकल्प अपनाने की अपील की।

जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के विधायक प्रमोद कुमार सिंह ने 22 अगस्त को औरंगाबाद में कहा कि डीएपी (DAP) खाद के नाम पर नकली उत्पाद बेचकर किसानों को व्यापक रूप से ठगा जा रहा है, और किसानों को इस एकल खाद पर अपनी निर्भरता तत्काल कम करनी होगी। उन्होंने आगाह किया कि डीएपी की बढ़ती माँग और घटती आपूर्ति के बीच सिंडिकेट बनाकर कालाबाजारी करने वालों का मनोबल बढ़ रहा है।

मुख्य घटनाक्रम

विधायक प्रमोद कुमार सिंह ने कहा कि डीएपी की माँग इस समय अपने चरम पर है, जबकि इसकी आपूर्ति काफी कम है। इस असंतुलन का फायदा उठाकर कुछ लोग सिंडिकेट बनाकर नकली खाद किसानों को थमा रहे हैं। उन्होंने कहा, 'डीएपी के नाम पर डुप्लीकेट खाद देकर किसानों को ठगा जा रहा है — किसान खुद ठगी का शिकार हो रहे हैं।'

उन्होंने यह भी बताया कि इस विषय पर वे कृषि अधिकारियों से पहले ही बातचीत कर चुके हैं। बावजूद इसके, बड़ी संख्या में किसान न तो जागरूकता कार्यक्रमों में शामिल हो रहे हैं, न ही कृषि विशेषज्ञों की सलाह को गंभीरता से ले रहे हैं।

विधायक की किसानों से अपील

प्रमोद कुमार सिंह ने किसानों से स्पष्ट अपील की कि वे डीएपी के अतिरिक्त अन्य उपलब्ध खादों को भी अपनाएँ, जो खेतीबाड़ी में उतनी ही कारगर साबित हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि कृषि अधिकारियों ने इस क्षेत्र में विधिवत प्रशिक्षण लिया होता है, इसलिए उनके सुझाव पूरी तरह विश्वसनीय हैं।

विधायक ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसान भाई जागरूक नहीं हुए और कालाबाजारी करने वालों के जाल में फँसते रहे, तो इसके परिणामों की जिम्मेदारी भी उन्हें स्वयं उठानी पड़ेगी।

किसानों की ज़मीनी समस्याएँ

औरंगाबाद में डीएपी खाद लेने पहुँचे किसान उदय कुमार टेंगरा ने बताया कि वे खाद लेकर आए हैं। एक अन्य किसान ने खेतीबाड़ी की दयनीय स्थिति का विवरण देते हुए कहा कि खाद की कीमत ₹2,000 प्रति बैग के पार जा चुकी है। उन्होंने बताया कि रोपाई तो हो चुकी है, लेकिन सिंचाई अभी तक नहीं हो पाई है — नहरों में भी पानी नहीं है, जिससे फसल पर संकट गहराता जा रहा है।

आम जनता पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब बिहार के कृषि क्षेत्र में खरीफ सीजन अपने निर्णायक दौर में है। डीएपी की कमी और नकली खाद की बिक्री दोनों मिलकर किसानों की उत्पादन लागत बढ़ा रहे हैं। ऊपर से सिंचाई संकट ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। गौरतलब है कि डीएपी पर अत्यधिक निर्भरता की समस्या केवल औरंगाबाद तक सीमित नहीं है — यह बिहार के कई जिलों में एक साझा चुनौती बनती जा रही है।

क्या होगा आगे

विधायक प्रमोद कुमार सिंह ने संकेत दिया कि किसानों को जागरूक करने के लिए और अधिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएँगे तथा कृषि अधिकारियों के साथ समन्वय जारी रहेगा। नकली खाद की बिक्री पर अंकुश लगाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की माँग भी उठ रही है। किसानों को उम्मीद है कि नहरों में जल्द पानी छोड़ा जाएगा ताकि खड़ी फसल को बचाया जा सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें एक बड़ा विरोधाभास भी है — जब सरकारी आपूर्ति तंत्र ही डीएपी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने में विफल रहा हो, तो किसानों को उनकी 'जिम्मेदारी' याद दिलाना अधूरा जवाब है। नकली खाद की बिक्री कोई अचानक उभरी समस्या नहीं है — यह प्रशासनिक निगरानी की पुरानी खामियों का नतीजा है। असली सवाल यह है कि कृषि विभाग ने अब तक कितने नकली खाद विक्रेताओं पर कार्रवाई की है, और वह डेटा सार्वजनिक क्यों नहीं है। सिंचाई संकट का उल्लेख इशारा करता है कि समस्या सिर्फ खाद तक सीमित नहीं — बिहार के कृषि बुनियादी ढाँचे की व्यापक विफलता इस मौसम में एक साथ सामने आ रही है।
RashtraPress
23 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

औरंगाबाद में किसानों के साथ डीएपी खाद को लेकर क्या हो रहा है?
जदयू विधायक प्रमोद कुमार सिंह के अनुसार, औरंगाबाद में डीएपी खाद के नाम पर नकली उत्पाद बेचकर किसानों को ठगा जा रहा है। डीएपी की माँग अधिक और आपूर्ति कम होने के कारण सिंडिकेट बनाकर कालाबाजारी की जा रही है।
डीएपी खाद की जगह किसान कौन-सी अन्य खाद इस्तेमाल कर सकते हैं?
विधायक प्रमोद कुमार सिंह ने कहा है कि कृषि अधिकारियों के पास डीएपी के विकल्प खादों की पूरी जानकारी है जो खेतीबाड़ी में उतनी ही कारगर हो सकती हैं। किसानों को कृषि अधिकारियों से संपर्क कर उनके सुझाव लेने चाहिए।
बिहार में इस समय डीएपी खाद की कीमत कितनी है?
औरंगाबाद के किसानों के अनुसार डीएपी खाद की कीमत ₹2,000 प्रति बैग के पार जा चुकी है। माँग और आपूर्ति के असंतुलन के कारण कीमतें बढ़ रही हैं और कालाबाजारी की शिकायतें सामने आ रही हैं।
किसान नकली खाद की पहचान कैसे करें और ठगी से कैसे बचें?
विधायक ने किसानों को सलाह दी है कि वे कृषि अधिकारियों के सुझावों को गंभीरता से लें और संदिग्ध विक्रेताओं से खाद न खरीदें। इसके अलावा, किसानों को जागरूकता कार्यक्रमों में भाग लेना चाहिए जो सरकार की ओर से आयोजित किए जाते हैं।
औरंगाबाद में सिंचाई की क्या स्थिति है?
किसानों ने बताया कि रोपाई हो जाने के बाद भी अभी तक सिंचाई नहीं हो पाई है क्योंकि नहरों में पानी नहीं है। यह स्थिति खड़ी फसल के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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