क्या मध्य प्रदेश के राजगढ़ में नकली खाद की बिक्री की जा रही है?
सारांश
Key Takeaways
- राजगढ़ में नकली खाद की बिक्री की गंभीरता।
- दिग्विजय सिंह की मांग उच्च स्तरीय जांच की।
- किसानों के हितों की रक्षा की आवश्यकता।
- नकली खाद का व्यापार और इसके प्रभाव।
- सरकार द्वारा कार्रवाई की कमी।
भोपाल, 3 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने राजगढ़ जिले में नकली खाद की बिक्री के गंभीर मामले पर राज्य सरकार और कृषि विभाग को कठघरे में खड़ा किया है। उन्होंने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखते हुए कहा कि यह मामला न केवल किसानों के आर्थिक शोषण का है, बल्कि प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी भारतीय जन उर्वरक परियोजना की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाता है।
उन्होंने बताया कि पिछले महीने राजगढ़ जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में दौरे के दौरान वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व विधायक हेमराज कल्पोनी को ग्राम नाईपुरिया के किसानों ने शिकायत की थी कि उनके द्वारा खरीदी गई सिंगल सुपर फास्फेट खाद में भारी मात्रा में रेत मिली हुई है, जिससे फसलों को गंभीर नुकसान होने की आशंका है। शिकायत पर अधिकारियों ने जांच की और शिकायत सही पाई गई। जांच में यह पाया गया कि संबंधित फर्म का पंजीकरण निलंबित कर दिया गया और उर्वरक विक्रय का लाइसेंस भी निरस्त किया गया।
दिग्विजय सिंह ने अपने पत्र में लिखा कि जांच में यह भी सामने आया कि दुकानदार नीरज गुप्ता किसानों को खाद की बोरी चार सौ से पांच सौ रुपए अधिक कीमत पर बेच रहा था और विक्रय की रसीद भी नहीं दी जा रही थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर, राजगढ़ के निर्देश पर 7 नवंबर 2025 को संबंधित विक्रेता के खिलाफ उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई। कृषि विभाग द्वारा जब्त खाद के नमूने जबलपुर स्थित फर्टिलाइजर क्वालिटी कंट्रोल लेबोरेटरी भेजे गए।
लेबोरेटरी के असिस्टेंट केमिकल स्पेशलिस्ट ने 15 दिसंबर 2025 को अपनी जांच रिपोर्ट में खाद को अमानक घोषित किया। यह रिपोर्ट विभाग को प्राप्त होने के बावजूद अब तक खाद की गुणवत्ता को लेकर कोई नई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि यह अत्यंत गंभीर तथ्य है कि जिस खाद की बोरियों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर और किसानों के लिए संदेश अंकित है, वही खाद किसानों को ठगने का माध्यम बन रही है। इससे यह स्पष्ट होता है कि प्रदेश में बड़े पैमाने पर नकली खाद का अवैध व्यापार चल रहा है।
उन्होंने यह भी बताया कि संबंधित दुकानदार के पास सुपर फास्फेट बेचने का लाइसेंस तक नहीं था, बावजूद इसके वह खाद बेच रहा था। दुकानदार के बयान के अनुसार, खाद भोपाल स्थित निर्माता कंपनी कोरामंडल इंटरनेशनल लिमिटेड के स्टॉक से खरीदी गई थी। सिंह ने कहा कि किसानों के हितों की रक्षा करना सरकार की सर्वोच्च जिम्मेदारी है और इस मामले में किसी भी स्तर पर दोषियों को संरक्षण नहीं मिलना चाहिए।