एसआईआर प्रक्रिया: केजरीवाल और परिवार के 5 सदस्यों को मतदाता रिकॉर्ड पर नोटिस, आप ने लगाया BJP पर आरोप
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के तहत आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सहित उनके परिवार के पाँच सदस्यों को नोटिस जारी किया है। सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2002 के मतदाता रिकॉर्ड से संबंधित मैपिंग उपलब्ध न होने के आधार पर यह नोटिस भेजा गया है।
किन-किन को जारी हुआ नोटिस
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने जो नोटिस जारी किए हैं, वे अरविंद केजरीवाल, उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल, बेटे पुलकित केजरीवाल, पिता गोविंद राम केजरीवाल और माता गीता देवी के नाम पर हैं। यह नोटिस एसआईआर के तहत चल रही मतदाता सूची की समीक्षा का हिस्सा बताए जा रहे हैं, जिसका उद्देश्य अवैध या असत्यापित प्रविष्टियों को सूची से हटाना है।
आप का पलटवार — 'यह भाजपा का खेल है'
इस घटनाक्रम पर आम आदमी पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी नेता अनुराग ढांडा ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई निर्वाचन प्रक्रिया नहीं, बल्कि राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है।
ढांडा ने कहा, 'आप पहले दिन से कह रही है कि यह एसआईआर नहीं, बल्कि बीजेपी का खेल है। इनका बस चले तो ये सिर्फ नरेंद्र मोदी और अमित शाह का ही वोट का अधिकार रखें और सभी विरोधियों के वोट काट दें। तीन बार दिल्ली के मुख्यमंत्री रहे अरविंद केजरीवाल और उनके परिवार के वोट दिल्ली की वोटर लिस्ट से गायब करना कौन-सी प्रक्रिया है?'
चुनाव आयोग की भूमिका और एसआईआर की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) के अंतर्गत दिल्ली की मतदाता सूची की व्यापक समीक्षा की गई थी, जिसमें अवैध मतदाताओं को सूची से हटाने की कार्रवाई शामिल थी। सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली चुनाव आयोग इस विशेष मामले में जल्द ही आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी कर सकता है। फिलहाल विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।
यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली की राजनीति में AAP और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। विपक्षी दलों ने पहले भी एसआईआर प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं और इसे चुनावी हेरफेर से जोड़ा है, जबकि निर्वाचन अधिकारियों का कहना है कि यह एक नियमित तकनीकी प्रक्रिया है।
आगे क्या होगा
नोटिस मिलने के बाद केजरीवाल परिवार को निर्धारित समयसीमा में अपने मतदाता रिकॉर्ड का सत्यापन या स्पष्टीकरण प्रस्तुत करना होगा। AAP की ओर से यह भी संकेत मिले हैं कि पार्टी इस मामले को कानूनी एवं राजनीतिक — दोनों मोर्चों पर आगे ले जा सकती है। दिल्ली चुनाव आयोग के आधिकारिक बयान से स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।