दिल्ली SIR प्रक्रिया पर AAP का चुनाव आयोग से सवाल, 'शिफ्टेड' मतदाताओं का डेटा साझा करने की माँग
सारांश
मुख्य बातें
आम आदमी पार्टी (AAP) ने 6 अगस्त 2026 को दिल्ली में जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग के समक्ष गंभीर आपत्तियाँ दर्ज कराई हैं। पार्टी का आरोप है कि इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाताओं को बिना उचित सत्यापन के 'शिफ्टेड' की श्रेणी में डालकर मतदाता सूची से बाहर किए जाने का खतरा है।
प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात और मुख्य आरोप
दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज के नेतृत्व में AAP के एक प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल में बुराड़ी विधायक संजीव झा और कोंडली विधायक कुलदीप कुमार सहित अन्य नेता भी शामिल रहे।
मुलाकात के बाद सौरभ भारद्वाज ने बताया कि पार्टी के बूथ लेवल एजेंट (BLA) और स्थानीय निवासियों से मिले फीडबैक के आधार पर यह सामने आया है कि अनधिकृत कॉलोनियों, गाँवों और झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों में बड़ी संख्या में लोगों तक एन्यूमरेशन फॉर्म पहुँचे ही नहीं। उनका दावा है कि कई स्थानों पर 100 प्रतिशत फॉर्म वितरण का रिकॉर्ड दर्ज है, जबकि ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।
भारद्वाज ने आरोप लगाया कि करीब 60 प्रतिशत लोगों को बिना उचित सत्यापन के 'शिफ्टेड' की श्रेणी में डाल दिया गया है।
10 लाख मतदाताओं के अधिकार पर सवाल
भारद्वाज ने यह भी रेखांकित किया कि SIR से पहले की प्रक्रिया में लगभग 10 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा चुके हैं। उनका सवाल था कि यदि इन लोगों तक एन्यूमरेशन फॉर्म भी नहीं पहुँचा, तो उनके मतदान के अधिकार की रक्षा कैसे होगी।
उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली में उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और हरियाणा से आए बड़ी संख्या में लोग किराए पर रहते हैं और एक ही क्षेत्र के भीतर मकान बदलते रहते हैं। ऐसे लोगों को केवल मकान बदलने के आधार पर मतदाता सूची से बाहर नहीं किया जाना चाहिए।
AAP की माँगें
AAP ने चुनाव आयोग से माँग की कि जिन मतदाताओं को 'शिफ्टेड' बताया गया है, उनके नाम, पते और मोबाइल नंबर सभी राजनीतिक दलों के BLA के साथ साझा किए जाएँ, ताकि पार्टियाँ स्वयं संपर्क कर सत्यापित कर सकें। भारद्वाज ने सुझाव दिया कि चुनाव आयोग ऐसे मतदाताओं को कम से कम SMS भेजकर सूचित करे, हालाँकि आयोग ने इसे व्यावहारिक रूप से कठिन बताया।
विधायकों की चिंताएँ
विधायक संजीव झा ने कहा कि यदि कोई मतदाता गलती से 'शिफ्टेड' दर्ज हो गया है और वह स्वयं उपस्थित होकर पहचान व निवास का प्रमाण देता है, तो उसे दोबारा SIR प्रक्रिया में शामिल करने की व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि इस पर चुनाव आयोग ने सकारात्मक रुख दिखाते हुए ऐसे मामलों पर विचार करने का आश्वासन दिया है।
विधायक कुलदीप कुमार ने आरोप लगाया कि कई बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) द्वारा फॉर्म वितरण के आँकड़ों में वास्तविक स्थिति से भिन्न जानकारी दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि घुमंतू समुदायों, अनुसूचित जाति के लोगों और लगातार स्थान बदलने वाले परिवारों तक भी एन्यूमरेशन फॉर्म नहीं पहुँचे। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि चुनाव आयोग की ज़िम्मेदारी है कि प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में शामिल हो।
आगे क्या होगा
चुनाव आयोग के आश्वासन के बाद AAP ने संकेत दिया है कि वह SIR प्रक्रिया की निगरानी जारी रखेगी और यदि ज़मीनी स्तर पर सुधार नहीं हुए तो आगे की कार्रवाई की जाएगी। यह मामला दिल्ली में मतदाता सूची की विश्वसनीयता और वंचित तबकों के मतदान अधिकारों को लेकर व्यापक बहस का केंद्र बन सकता है।