6 अगस्त 2026
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दिल्ली SIR प्रक्रिया पर AAP का चुनाव आयोग से सवाल, 'शिफ्टेड' मतदाताओं का डेटा साझा करने की माँग

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दिल्ली SIR प्रक्रिया पर AAP का चुनाव आयोग से सवाल, 'शिफ्टेड' मतदाताओं का डेटा साझा करने की माँग

सारांश

AAP ने दिल्ली SIR प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाया — करीब 60% लोगों को बिना सत्यापन 'शिफ्टेड' बताने और 10 लाख मतदाताओं के अधिकार खतरे में पड़ने की चिंता। पार्टी ने चुनाव आयोग से शिफ्टेड मतदाताओं का डेटा BLA के साथ साझा करने की माँग की।

मुख्य बातें

AAP के प्रतिनिधिमंडल ने 6 अगस्त 2026 को दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) से मुलाकात कर SIR प्रक्रिया पर गंभीर आपत्तियाँ दर्ज कराईं।
सौरभ भारद्वाज का आरोप — करीब 60 प्रतिशत लोगों को बिना उचित सत्यापन 'शिफ्टेड' श्रेणी में डाला गया।
SIR से पहले लगभग 10 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा चुके हैं; एन्यूमरेशन फॉर्म न मिलने पर उनके अधिकार पर सवाल।
अनधिकृत कॉलोनियों, झुग्गी बस्तियों, घुमंतू समुदायों और अनुसूचित जाति के लोगों तक फॉर्म नहीं पहुँचने का दावा।
AAP की माँग — शिफ्टेड मतदाताओं के नाम, पते और मोबाइल नंबर सभी दलों के BLA से साझा किए जाएँ।
चुनाव आयोग ने गलत तरीके से शिफ्टेड दर्ज मतदाताओं को पुनः शामिल करने पर सकारात्मक रुख दिखाया।

आम आदमी पार्टी (AAP) ने 6 अगस्त 2026 को दिल्ली में जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग के समक्ष गंभीर आपत्तियाँ दर्ज कराई हैं। पार्टी का आरोप है कि इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाताओं को बिना उचित सत्यापन के 'शिफ्टेड' की श्रेणी में डालकर मतदाता सूची से बाहर किए जाने का खतरा है।

प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात और मुख्य आरोप

दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज के नेतृत्व में AAP के एक प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल में बुराड़ी विधायक संजीव झा और कोंडली विधायक कुलदीप कुमार सहित अन्य नेता भी शामिल रहे।

मुलाकात के बाद सौरभ भारद्वाज ने बताया कि पार्टी के बूथ लेवल एजेंट (BLA) और स्थानीय निवासियों से मिले फीडबैक के आधार पर यह सामने आया है कि अनधिकृत कॉलोनियों, गाँवों और झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों में बड़ी संख्या में लोगों तक एन्यूमरेशन फॉर्म पहुँचे ही नहीं। उनका दावा है कि कई स्थानों पर 100 प्रतिशत फॉर्म वितरण का रिकॉर्ड दर्ज है, जबकि ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।

भारद्वाज ने आरोप लगाया कि करीब 60 प्रतिशत लोगों को बिना उचित सत्यापन के 'शिफ्टेड' की श्रेणी में डाल दिया गया है।

10 लाख मतदाताओं के अधिकार पर सवाल

भारद्वाज ने यह भी रेखांकित किया कि SIR से पहले की प्रक्रिया में लगभग 10 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा चुके हैं। उनका सवाल था कि यदि इन लोगों तक एन्यूमरेशन फॉर्म भी नहीं पहुँचा, तो उनके मतदान के अधिकार की रक्षा कैसे होगी।

उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली में उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और हरियाणा से आए बड़ी संख्या में लोग किराए पर रहते हैं और एक ही क्षेत्र के भीतर मकान बदलते रहते हैं। ऐसे लोगों को केवल मकान बदलने के आधार पर मतदाता सूची से बाहर नहीं किया जाना चाहिए।

AAP की माँगें

AAP ने चुनाव आयोग से माँग की कि जिन मतदाताओं को 'शिफ्टेड' बताया गया है, उनके नाम, पते और मोबाइल नंबर सभी राजनीतिक दलों के BLA के साथ साझा किए जाएँ, ताकि पार्टियाँ स्वयं संपर्क कर सत्यापित कर सकें। भारद्वाज ने सुझाव दिया कि चुनाव आयोग ऐसे मतदाताओं को कम से कम SMS भेजकर सूचित करे, हालाँकि आयोग ने इसे व्यावहारिक रूप से कठिन बताया।

विधायकों की चिंताएँ

विधायक संजीव झा ने कहा कि यदि कोई मतदाता गलती से 'शिफ्टेड' दर्ज हो गया है और वह स्वयं उपस्थित होकर पहचान व निवास का प्रमाण देता है, तो उसे दोबारा SIR प्रक्रिया में शामिल करने की व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि इस पर चुनाव आयोग ने सकारात्मक रुख दिखाते हुए ऐसे मामलों पर विचार करने का आश्वासन दिया है।

विधायक कुलदीप कुमार ने आरोप लगाया कि कई बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) द्वारा फॉर्म वितरण के आँकड़ों में वास्तविक स्थिति से भिन्न जानकारी दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि घुमंतू समुदायों, अनुसूचित जाति के लोगों और लगातार स्थान बदलने वाले परिवारों तक भी एन्यूमरेशन फॉर्म नहीं पहुँचे। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि चुनाव आयोग की ज़िम्मेदारी है कि प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में शामिल हो।

आगे क्या होगा

चुनाव आयोग के आश्वासन के बाद AAP ने संकेत दिया है कि वह SIR प्रक्रिया की निगरानी जारी रखेगी और यदि ज़मीनी स्तर पर सुधार नहीं हुए तो आगे की कार्रवाई की जाएगी। यह मामला दिल्ली में मतदाता सूची की विश्वसनीयता और वंचित तबकों के मतदान अधिकारों को लेकर व्यापक बहस का केंद्र बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

प्रवासी और अनौपचारिक बस्तियों में रहने वाले हैं। गौरतलब है कि SIR से पहले ही 10 लाख नाम हट चुके हैं; यदि उन्हीं लोगों तक एन्यूमरेशन फॉर्म भी नहीं पहुँचा, तो यह प्रक्रियागत विफलता दोहरी मार है। चुनाव आयोग का BLA डेटा साझा न करना और SMS सूचना को 'अव्यावहारिक' बताना उन सवालों का जवाब नहीं देता जो पारदर्शिता की दृष्टि से ज़रूरी हैं। मुख्यधारा की कवरेज राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सिमटी है, जबकि असली मुद्दा यह है कि क्या SIR की निगरानी तंत्र इतना मज़बूत है कि वह स्वयं अपनी खामियाँ पकड़ सके।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली में SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) प्रक्रिया क्या है?
SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची को अद्यतन करने की एक प्रक्रिया है, जिसमें BLO घर-घर जाकर एन्यूमरेशन फॉर्म वितरित करते हैं और मतदाताओं की उपस्थिति व पते की पुष्टि करते हैं। जो मतदाता अपने पंजीकृत पते पर नहीं मिलते, उन्हें 'शिफ्टेड' श्रेणी में दर्ज किया जाता है।
AAP ने SIR प्रक्रिया पर क्या आपत्तियाँ जताई हैं?
AAP का आरोप है कि करीब 60 प्रतिशत लोगों को बिना उचित सत्यापन के 'शिफ्टेड' बताया गया है और अनधिकृत कॉलोनियों, झुग्गी बस्तियों व घुमंतू समुदायों तक एन्यूमरेशन फॉर्म पहुँचे ही नहीं। पार्टी ने यह भी कहा कि कई BLO ने फॉर्म वितरण के आँकड़े वास्तविकता से अलग दर्ज किए हैं।
AAP ने चुनाव आयोग से क्या माँग की है?
AAP ने माँग की है कि 'शिफ्टेड' बताए गए मतदाताओं के नाम, पते और मोबाइल नंबर सभी राजनीतिक दलों के BLA के साथ साझा किए जाएँ, ताकि पार्टियाँ स्वयं संपर्क कर सत्यापन कर सकें। इसके अलावा ऐसे मतदाताओं को SMS के ज़रिए सूचित करने का सुझाव भी दिया गया।
जो मतदाता गलती से 'शिफ्टेड' दर्ज हो गए हैं, उनके लिए क्या राहत है?
विधायक संजीव झा के अनुसार, चुनाव आयोग ने सकारात्मक रुख दिखाते हुए आश्वासन दिया है कि यदि कोई मतदाता स्वयं उपस्थित होकर पहचान व निवास का प्रमाण देता है, तो उसे दोबारा SIR प्रक्रिया में शामिल किया जा सकता है।
किराएदार और प्रवासी मतदाताओं पर SIR का क्या असर पड़ सकता है?
AAP का कहना है कि दिल्ली में उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और हरियाणा से आए बड़ी संख्या में लोग किराए पर रहते हैं और एक ही क्षेत्र के भीतर मकान बदलते रहते हैं। ऐसे लोगों को केवल मकान बदलने के आधार पर मतदाता सूची से बाहर करना उनके मतदान अधिकार का हनन होगा।
राष्ट्र प्रेस
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