27 जुलाई 2026
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दिल्ली SIR विवाद: 'आप' का आरोप — गांवों और अनधिकृत कॉलोनियों में 50% लोगों तक नहीं पहुंचे एन्यूमरेशन फॉर्म

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दिल्ली SIR विवाद: 'आप' का आरोप — गांवों और अनधिकृत कॉलोनियों में 50% लोगों तक नहीं पहुंचे एन्यूमरेशन फॉर्म

सारांश

AAP का आरोप है कि दिल्ली के गांवों और अनधिकृत कॉलोनियों में — जहाँ शहर की 70% आबादी रहती है — 50% लोगों तक SIR एन्यूमरेशन फॉर्म नहीं पहुंचे, जबकि चुनाव आयोग 99% वितरण का दावा करता है। पार्टी ने समय-सीमा बढ़ाने और हटाए गए मतदाताओं के लिए विशेष समाधान की मांग की है।

मुख्य बातें

AAP दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि गांवों और अनधिकृत कॉलोनियों में करीब 50% लोगों तक SIR एन्यूमरेशन फॉर्म नहीं पहुंचे।
चुनाव आयोग के 99% से अधिक फॉर्म वितरण के दावे को AAP ने ज़मीनी हकीकत से परे बताया।
बुराड़ी विधायक संजीव झा के अनुसार उनके क्षेत्र के कई बूथों पर केवल 30–35% फॉर्म ही जमा हुए; बूथ 64, 158, 160 के आंकड़े साझा किए।
पूर्व विधायक दुर्गेश पाठक ने BJP पर SIR प्रक्रिया को प्रभावित करने और BLO पर दबाव बनाने का आरोप लगाया।
AAP ने चुनाव आयोग से SIR की समय-सीमा बढ़ाने और पहले हटाए गए मतदाताओं के लिए विशेष समाधान की मांग की।
किराए पर रहने वाले और बार-बार निवास बदलने वाले मतदाताओं के नाम कटने का खतरा सबसे अधिक बताया गया।

आम आदमी पार्टी (AAP) ने 27 जुलाई 2026 को चुनाव आयोग (ECI) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि दिल्ली के गांवों और अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले करीब 50 प्रतिशत लोगों तक अभी तक विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत एन्यूमरेशन फॉर्म नहीं पहुंचे हैं। पार्टी का कहना है कि चुनाव आयोग का 99 प्रतिशत से अधिक फॉर्म वितरण का दावा ज़मीनी हकीकत से बिल्कुल मेल नहीं खाता, और इस चूक से बड़ी संख्या में मतदाता अपने मताधिकार से वंचित हो सकते हैं।

मुख्य आरोप और दावे

AAP के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि जहाँ पॉश कॉलोनियों और डीडीए फ्लैट्स में फॉर्म घर-घर पहुंचाए गए, वहीं दिल्ली की लगभग 70 प्रतिशत आबादी वाले गांवों और अनधिकृत कॉलोनियों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि लोगों को फॉर्म ही नहीं मिलेगा, तो वे उसे भरकर जमा कैसे करेंगे और उनका SIR कैसे पूरा होगा। भारद्वाज ने मीडिया से अपील की कि वह गांवों और अनधिकृत कॉलोनियों में जाकर वास्तविक स्थिति की स्वतंत्र जांच करे।

उनका यह भी आरोप है कि कई बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के पास बड़ी संख्या में फॉर्म मौजूद हैं, लेकिन उन्हें जानबूझकर लोगों तक नहीं पहुंचाया जा रहा है।

बुराड़ी विधायक के आंकड़े

बुराड़ी से विधायक संजीव झा ने SIR प्रक्रिया में अनियमितताओं के ठोस आंकड़े पेश किए। उन्होंने कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र के कई बूथों पर केवल 30 से 35 प्रतिशत एन्यूमरेशन फॉर्म ही जमा हुए हैं। बूथ नंबर 64, 158 और 160 का हवाला देते हुए उन्होंने दावा किया कि हजारों मतदाताओं में से केवल कुछ सौ लोगों ने ही फॉर्म जमा किए हैं।

झा का आरोप है कि शेष मतदाताओं को 'शिफ्टेड' दिखाकर उनके नाम मतदाता सूची से हटाने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि एक व्यक्ति को BLO ने यह कहकर लौटा दिया कि उसका SIR उत्तराखंड में हो चुका है, जबकि जांच में यह दावा गलत निकला। उनके अनुसार प्री-SIR अभियान के दौरान पहले ही लाखों मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा चुके हैं।

BJP पर प्रभाव का आरोप

AAP नेता और पूर्व विधायक दुर्गेश पाठक ने आरोप लगाया कि दिल्ली में चल रही SIR प्रक्रिया पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का प्रभाव है और बड़े स्तर पर अनियमितताएं हो रही हैं। उन्होंने कहा कि BLO पर दबाव बनाकर मतदाता सूची में बदलाव कराया जा रहा है।

पाठक ने विशेष रूप से किराए पर रहने वाले लोगों की समस्या उठाई। उनका कहना है कि दिल्ली में बड़ी संख्या में लोग रोजगार के कारण अक्सर अपना निवास बदलते रहते हैं, जिससे उनके नाम मतदाता सूची से कटने का खतरा अधिक रहता है। उन्होंने चुनाव आयोग से अपील की कि दिल्ली की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए SIR प्रक्रिया में अधिक संवेदनशीलता बरती जाए।

AAP की मांगें

आम आदमी पार्टी ने चुनाव आयोग से मांग की है कि SIR प्रक्रिया की समय-सीमा बढ़ाई जाए और जिन मतदाताओं के नाम पहले हटाए गए हैं, उनके लिए विशेष समाधान निकाला जाए। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि वर्तमान प्रक्रिया इसी तरह जारी रही, तो गांवों और अनधिकृत कॉलोनियों में बड़ी संख्या में मतदाता अपने मतदान अधिकार से वंचित हो सकते हैं। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब दिल्ली में अगले विधानसभा चुनावों की तैयारियाँ पृष्ठभूमि में जारी हैं और मतदाता सूची की शुद्धता एक संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन बूथ-स्तरीय आंकड़ों का हवाला — जैसे बुराड़ी के बूथ 64, 158 और 160 — उन्हें महज बयानबाजी से अलग करता है और स्वतंत्र सत्यापन की माँग करता है। गौरतलब है कि दिल्ली जैसे महानगर में जहाँ किरायेदार आबादी बड़ी है और निवास परिवर्तन आम है, SIR जैसी प्रक्रियाएं स्वाभाविक रूप से हाशिए के मतदाताओं को अधिक प्रभावित करती हैं। मुख्यधारा की कवरेज इस तथ्य को अक्सर नज़रअंदाज़ करती है कि 'शिफ्टेड' श्रेणी का दुरुपयोग मतदाता सूची सफाई का एक पुराना और विवादित तरीका रहा है। चुनाव आयोग को इन विशिष्ट बूथ-स्तरीय आरोपों का सार्वजनिक और तथ्यात्मक जवाब देना चाहिए — मौन या प्रतिशत के दावे पर्याप्त नहीं हैं।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली में SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) प्रक्रिया क्या है?
SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची को अद्यतन करने की एक प्रक्रिया है, जिसमें BLO घर-घर जाकर एन्यूमरेशन फॉर्म वितरित करते हैं और मतदाताओं की जानकारी सत्यापित करते हैं। इस प्रक्रिया के आधार पर अपात्र या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाते हैं।
AAP ने चुनाव आयोग पर क्या आरोप लगाए हैं?
AAP ने आरोप लगाया है कि दिल्ली के गांवों और अनधिकृत कॉलोनियों में करीब 50% लोगों तक एन्यूमरेशन फॉर्म नहीं पहुंचे हैं, जबकि चुनाव आयोग 99% से अधिक वितरण का दावा कर रहा है। पार्टी का यह भी आरोप है कि BLO पर दबाव बनाकर मतदाता सूची में बदलाव कराया जा रहा है।
बुराड़ी विधायक संजीव झा ने कौन से आंकड़े पेश किए?
संजीव झा ने बताया कि बुराड़ी विधानसभा क्षेत्र के कई बूथों पर केवल 30 से 35 प्रतिशत एन्यूमरेशन फॉर्म जमा हुए हैं। उन्होंने बूथ नंबर 64, 158 और 160 का हवाला देते हुए कहा कि हजारों मतदाताओं में से केवल कुछ सौ ने ही फॉर्म जमा किए।
AAP ने चुनाव आयोग से क्या मांगें की हैं?
AAP ने चुनाव आयोग से SIR प्रक्रिया की समय-सीमा बढ़ाने और पहले हटाए गए मतदाताओं के लिए विशेष समाधान निकालने की मांग की है। पार्टी ने किराएदारों सहित सभी पात्र मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की भी अपील की है।
क्या पॉश कॉलोनियों और गांवों में फॉर्म वितरण में अंतर है?
AAP के अनुसार पॉश कॉलोनियों और DDA फ्लैट्स में एन्यूमरेशन फॉर्म घर-घर पहुंचाए गए, जबकि दिल्ली की लगभग 70% आबादी वाले गांवों और अनधिकृत कॉलोनियों में वितरण बेहद कम रहा है। हालांकि, चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक खंडन सामने नहीं आया है।
राष्ट्र प्रेस
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