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कोरियाई प्रायद्वीप का परमाणु निरस्त्रीकरण अंतरराष्ट्रीय लक्ष्य: किम-शी शिखर के बाद दक्षिण कोरिया का स्पष्ट संदेश

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कोरियाई प्रायद्वीप का परमाणु निरस्त्रीकरण अंतरराष्ट्रीय लक्ष्य: किम-शी शिखर के बाद दक्षिण कोरिया का स्पष्ट संदेश

सारांश

प्योंगयांग में किम-शी शिखर वार्ता में परमाणु मुद्दे का कोई सार्वजनिक उल्लेख नहीं हुआ — और इसी के जवाब में दक्षिण कोरिया ने अपना रुख साफ किया। चीनी रक्षा मंत्री की पहली बार उपस्थिति सोल के विशेषज्ञों को बीजिंग-प्योंगयांग सैन्य सहयोग के बढ़ते संकेत के रूप में दिख रही है।

मुख्य बातें

दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रालय ने 9 जून 2026 को दोहराया कि कोरियाई प्रायद्वीप का परमाणु निरस्त्रीकरण अंतरराष्ट्रीय समुदाय का स्थायी लक्ष्य है।
प्योंगयांग में किम जोंग उन और शी जिनपिंग की शिखर वार्ता में परमाणु मुद्दे का कोई सार्वजनिक उल्लेख नहीं हुआ।
प्रवक्ता पार्क इल ने कहा कि अमेरिका और चीन भी परमाणु निरस्त्रीकरण को साझा लक्ष्य मानते हैं।
पहली बार चीनी रक्षा मंत्री डोंग जून इस यात्रा में शामिल रहे, जिसे सोल के विशेषज्ञ बीजिंग-प्योंगयांग रक्षा सहयोग का संकेत मान रहे हैं।
अधिकारियों ने माना कि परमाणु मुद्दे पर गोपनीय स्तर पर बातचीत हुई हो सकती है, इसलिए किसी निष्कर्ष पर पहुँचना जल्दबाजी होगी।

दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रालय ने 9 जून 2026 को एक बार फिर स्पष्ट किया कि कोरियाई प्रायद्वीप का परमाणु निरस्त्रीकरण न केवल सोल का, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय का एक स्थायी और साझा लक्ष्य बना हुआ है। यह बयान ऐसे समय में आया जब प्योंगयांग में संपन्न किम जोंग उन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच शिखर वार्ता में परमाणु मुद्दे का कोई सार्वजनिक उल्लेख नहीं किया गया।

शिखर वार्ता में क्या हुआ

उत्तर कोरिया की स्थानीय मीडिया के अनुसार, प्योंगयांग में हुई इस बैठक में किम जोंग उन और शी जिनपिंग ने विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। उल्लेखनीय यह रहा कि इस पूरी बातचीत में कोरियाई प्रायद्वीप की सुरक्षा स्थिति या उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम का कोई सार्वजनिक जिक्र नहीं हुआ।

हालांकि, अधिकारियों ने यह भी स्वीकार किया कि परमाणु मुद्दे पर चर्चा हुई या नहीं, यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है और संभव है कि कुछ बातचीत गोपनीय स्तर पर भी हुई हो।

दक्षिण कोरिया की प्रतिक्रिया

नियमित प्रेस ब्रीफिंग के दौरान दक्षिण कोरियाई विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता पार्क इल ने कहा कि उत्तर कोरिया का परमाणु निरस्त्रीकरण अंतरराष्ट्रीय समुदाय का एक स्थायी और साझा लक्ष्य है। उन्होंने दोहराया, 'दक्षिण कोरिया इस लक्ष्य से पीछे नहीं हटेगा।'

पार्क इल ने अमेरिका और चीन के बीच पिछले महीने हुई बैठक का हवाला देते हुए कहा कि दोनों देश भी उत्तर कोरिया के परमाणु निरस्त्रीकरण को साझा लक्ष्य मानते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि चीन ने कई मौकों पर स्पष्ट किया है कि कोरियाई प्रायद्वीप को लेकर उसकी नीति में कोई बदलाव नहीं आया है।

रक्षा मंत्री की उपस्थिति: एक महत्वपूर्ण संकेत

इस शिखर यात्रा में पहली बार चीनी रक्षा मंत्री डोंग जून भी शामिल थे। सोल के विशेषज्ञ इसे एक महत्वपूर्ण संकेत मान रहे हैं — उनके अनुसार यह बीजिंग और प्योंगयांग के बीच रक्षा सहयोग के बढ़ते संकेत हो सकते हैं।

दक्षिण कोरियाई मंत्रालय ने उम्मीद जताई कि उत्तर कोरिया और चीन के बीच बढ़ते संपर्क 'क्षेत्र में शांति और स्थिरता लाने में मदद करेंगे।' साथ ही, उन्होंने दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग बढ़ाने के संकेतों को लेकर सावधानी बरतने की बात भी कही।

आगे क्या होगा

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब कोरियाई प्रायद्वीप पर कूटनीतिक गतिविधियाँ तेज हो रही हैं। गौरतलब है कि परमाणु मुद्दे पर बहुपक्षीय सहमति बनाना पहले से ही एक जटिल प्रक्रिया रही है, और किम-शी बैठक में परमाणु विषय की सार्वजनिक अनुपस्थिति इस जटिलता को और उजागर करती है। अब यह देखना होगा कि सोल, वाशिंगटन और बीजिंग मिलकर इस मुद्दे पर किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुविचारित संदेश लग रही है — बीजिंग फिलहाल प्योंगयांग पर दबाव बनाने के बजाय उसे साथ लेकर चलने की नीति पर है। दक्षिण कोरिया का 'लक्ष्य से पीछे नहीं हटेंगे' वाला बयान सुनने में दृढ़ लगता है, लेकिन जब तक चीन सक्रिय रूप से परमाणु मुद्दे को वार्ता में नहीं उठाता, यह केवल कूटनीतिक औपचारिकता बनी रहेगी। चीनी रक्षा मंत्री की इस यात्रा में पहली बार उपस्थिति इस बात का संकेत है कि बीजिंग-प्योंगयांग संबंध अब केवल राजनीतिक नहीं, सैन्य आयाम भी ले रहे हैं — जो सोल और वाशिंगटन दोनों के लिए चिंता का विषय होना चाहिए।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दक्षिण कोरिया ने परमाणु निरस्त्रीकरण पर यह बयान क्यों दिया?
यह बयान प्योंगयांग में हुई किम जोंग उन और शी जिनपिंग की शिखर वार्ता के बाद आया, जिसमें परमाणु मुद्दे का कोई सार्वजनिक उल्लेख नहीं हुआ। दक्षिण कोरिया ने स्पष्ट किया कि इस चुप्पी के बावजूद परमाणु निरस्त्रीकरण का लक्ष्य अपरिवर्तित है।
किम-शी शिखर वार्ता में क्या तय हुआ?
उत्तर कोरियाई मीडिया के अनुसार, दोनों नेताओं ने विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। हालांकि, परमाणु कार्यक्रम या कोरियाई प्रायद्वीप की सुरक्षा पर कोई सार्वजनिक बयान नहीं आया।
चीनी रक्षा मंत्री डोंग जून की उपस्थिति क्यों महत्वपूर्ण मानी जा रही है?
यह पहली बार था जब चीनी रक्षा मंत्री इस तरह की द्विपक्षीय यात्रा में शामिल हुए। सोल के विशेषज्ञों के अनुसार, यह बीजिंग और प्योंगयांग के बीच रक्षा सहयोग के गहराने का संकेत हो सकता है।
क्या चीन उत्तर कोरिया के परमाणु निरस्त्रीकरण का समर्थन करता है?
दक्षिण कोरियाई प्रवक्ता पार्क इल के अनुसार, चीन ने कई मौकों पर कहा है कि कोरियाई प्रायद्वीप पर उसकी नीति में कोई बदलाव नहीं आया है। अमेरिका-चीन बैठक में भी दोनों देशों ने परमाणु निरस्त्रीकरण को साझा लक्ष्य बताया था।
क्या शिखर वार्ता में परमाणु मुद्दे पर गोपनीय बातचीत हुई?
अधिकारियों ने माना है कि यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। उनके अनुसार, संभव है कि कुछ बातचीत गोपनीय स्तर पर हुई हो, इसलिए अभी किसी निष्कर्ष पर पहुँचना जल्दबाजी होगी।
राष्ट्र प्रेस
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