उत्तर कोरिया परमाणु निरस्त्रीकरण: NCG की छठी बैठक में दक्षिण कोरिया-अमेरिका ने दोहराया साझा संकल्प
सारांश
मुख्य बातें
दक्षिण कोरिया और अमेरिका ने 12 जून 2025 को सोल में आयोजित न्यूक्लियर कंसल्टेटिव ग्रुप (NCG) की छठी बैठक में उत्तर कोरिया के परमाणु निरस्त्रीकरण के अपने साझा लक्ष्य की पुनः पुष्टि की। यह बैठक ऐसे नाज़ुक भू-राजनीतिक क्षण में हुई जब प्योंगयांग खुद को एक स्थायी परमाणु शक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ा रहा है।
बैठक में क्या तय हुआ
बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान के अनुसार, दोनों पक्ष उत्तर कोरिया की लगातार विकसित हो रही परमाणु और मिसाइल क्षमताओं तथा बदलते सुरक्षा माहौल के बीच गठबंधन और विस्तारित प्रतिरोध को मजबूत करने के लिए NCG की गतिविधियों को आगे बढ़ाने पर सहमत हुए। बयान में स्पष्ट कहा गया, 'दक्षिण कोरिया और अमेरिका ने उत्तर कोरिया के परमाणु निरस्त्रीकरण के अपने साझा लक्ष्य की पुनः पुष्टि की है।'
बैठक की अगुवाई दक्षिण कोरिया के नीति मामलों के उप रक्षा मंत्री किम होंग-चोल और अमेरिकी रक्षा विभाग में परमाणु प्रतिरोध एवं सामूहिक विनाश के हथियारों से निपटने के लिए उप सहायक सचिव रॉबर्ट सूफर ने की।
चीन-उत्तर कोरिया शिखर वार्ता की पृष्ठभूमि
यह बैठक इसलिए भी विशेष महत्व रखती है क्योंकि इसी सप्ताह प्योंगयांग में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन के बीच हुई शिखर वार्ता में परमाणु निरस्त्रीकरण का कोई उल्लेख नहीं किया गया था। विश्लेषकों के अनुसार, इस विषय पर बीजिंग की चुप्पी को प्योंगयांग के परमाणु विस्तार को अप्रत्यक्ष समर्थन के रूप में देखा जा रहा है — एक संकेत जो वाशिंगटन और सोल दोनों के लिए चिंताजनक है।
विस्तारित प्रतिरोध की प्रतिबद्धता
बैठक में अमेरिका ने दक्षिण कोरिया के प्रति अपनी विस्तारित प्रतिरोध प्रतिबद्धता को दोहराया। इसका अर्थ है कि अमेरिका अपने सहयोगी की रक्षा के लिए परमाणु हथियारों सहित अपनी समस्त सैन्य क्षमताओं का उपयोग करने के लिए तत्पर रहेगा। दोनों देशों ने कोरियाई प्रायद्वीप में संभावित परमाणु संकट की स्थिति से निपटने की तैयारियों को मजबूत करने, संयुक्त योजनाओं की समीक्षा करने तथा अमेरिकी परमाणु अभियानों में दक्षिण कोरिया की पारंपरिक सैन्य क्षमताओं के समन्वय पर भी विस्तार से चर्चा की।
गौरतलब है कि दोनों सहयोगी देशों ने NCG गतिविधियों और परामर्श से जुड़ी संवेदनशील सूचनाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक सुरक्षा दिशानिर्देश दस्तावेज़ पर भी हस्ताक्षर किए।
यूरोपीय संघ की भी कड़ी चेतावनी
इससे एक दिन पहले, बुधवार को दक्षिण कोरिया और यूरोपीय संघ (EU) के नेताओं ने संयुक्त बयान जारी कर स्पष्ट किया कि उत्तर कोरिया को अंतरराष्ट्रीय परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के तहत कभी भी परमाणु हथियार संपन्न राष्ट्र के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह बयान प्योंगयांग की उस नीति के सीधे विरोध में है जिसके तहत उसने अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम को कभी न छोड़ने की कसम खाई है।
NCG की स्थापना और आगे की राह
NCG की स्थापना जुलाई 2023 में दोनों देशों के नेताओं द्वारा अपनाई गई वाशिंगटन घोषणापत्र के तहत की गई थी। इसका मूल उद्देश्य उत्तर कोरिया के बढ़ते परमाणु खतरों के बीच दक्षिण कोरिया के लिए अमेरिकी सुरक्षा आश्वासन और विस्तारित प्रतिरोध की विश्वसनीयता को सुदृढ़ करना है। यह छठी बैठक इस बात का संकेत है कि दोनों देश प्योंगयांग के परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर निगरानी और कूटनीतिक दबाव दोनों मोर्चों पर सक्रिय रहेंगे।