27 जुलाई 2026
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उत्तर कोरिया परमाणु निरस्त्रीकरण: NCG की छठी बैठक में दक्षिण कोरिया-अमेरिका ने दोहराया साझा संकल्प

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उत्तर कोरिया परमाणु निरस्त्रीकरण: NCG की छठी बैठक में दक्षिण कोरिया-अमेरिका ने दोहराया साझा संकल्प

सारांश

सोल में NCG की छठी बैठक महज एक औपचारिकता नहीं थी — यह उस सप्ताह का सीधा जवाब था जब चीन-उत्तर कोरिया शिखर वार्ता में परमाणु निरस्त्रीकरण का ज़िक्र तक नहीं हुआ। दक्षिण कोरिया और अमेरिका का यह संयुक्त संकल्प बीजिंग की चुप्पी को एक स्पष्ट कूटनीतिक संदेश है।

मुख्य बातें

दक्षिण कोरिया और अमेरिका ने सोल में NCG की छठी बैठक में उत्तर कोरिया के परमाणु निरस्त्रीकरण के साझा लक्ष्य की पुनः पुष्टि की।
बैठक की अध्यक्षता उप रक्षा मंत्री किम होंग-चोल और उप सहायक सचिव रॉबर्ट सूफर ने की।
इसी सप्ताह शी जिनपिंग और किम जोंग-उन की शिखर वार्ता में परमाणु निरस्त्रीकरण का कोई उल्लेख नहीं हुआ, जिसे बीजिंग का अप्रत्यक्ष समर्थन माना जा रहा है।
अमेरिका ने दक्षिण कोरिया के प्रति विस्तारित प्रतिरोध — परमाणु हथियारों सहित सभी सैन्य क्षमताओं के उपयोग — की प्रतिबद्धता दोहराई।
दोनों देशों ने NCG की संवेदनशील सूचनाओं की सुरक्षा के लिए एक सुरक्षा दिशानिर्देश दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर किए।
दक्षिण कोरिया-EU ने भी संयुक्त बयान में कहा कि उत्तर कोरिया को NPT के तहत कभी परमाणु राष्ट्र नहीं माना जाएगा।

दक्षिण कोरिया और अमेरिका ने 12 जून 2025 को सोल में आयोजित न्यूक्लियर कंसल्टेटिव ग्रुप (NCG) की छठी बैठक में उत्तर कोरिया के परमाणु निरस्त्रीकरण के अपने साझा लक्ष्य की पुनः पुष्टि की। यह बैठक ऐसे नाज़ुक भू-राजनीतिक क्षण में हुई जब प्योंगयांग खुद को एक स्थायी परमाणु शक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ा रहा है।

बैठक में क्या तय हुआ

बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान के अनुसार, दोनों पक्ष उत्तर कोरिया की लगातार विकसित हो रही परमाणु और मिसाइल क्षमताओं तथा बदलते सुरक्षा माहौल के बीच गठबंधन और विस्तारित प्रतिरोध को मजबूत करने के लिए NCG की गतिविधियों को आगे बढ़ाने पर सहमत हुए। बयान में स्पष्ट कहा गया, 'दक्षिण कोरिया और अमेरिका ने उत्तर कोरिया के परमाणु निरस्त्रीकरण के अपने साझा लक्ष्य की पुनः पुष्टि की है।'

बैठक की अगुवाई दक्षिण कोरिया के नीति मामलों के उप रक्षा मंत्री किम होंग-चोल और अमेरिकी रक्षा विभाग में परमाणु प्रतिरोध एवं सामूहिक विनाश के हथियारों से निपटने के लिए उप सहायक सचिव रॉबर्ट सूफर ने की।

चीन-उत्तर कोरिया शिखर वार्ता की पृष्ठभूमि

यह बैठक इसलिए भी विशेष महत्व रखती है क्योंकि इसी सप्ताह प्योंगयांग में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन के बीच हुई शिखर वार्ता में परमाणु निरस्त्रीकरण का कोई उल्लेख नहीं किया गया था। विश्लेषकों के अनुसार, इस विषय पर बीजिंग की चुप्पी को प्योंगयांग के परमाणु विस्तार को अप्रत्यक्ष समर्थन के रूप में देखा जा रहा है — एक संकेत जो वाशिंगटन और सोल दोनों के लिए चिंताजनक है।

विस्तारित प्रतिरोध की प्रतिबद्धता

बैठक में अमेरिका ने दक्षिण कोरिया के प्रति अपनी विस्तारित प्रतिरोध प्रतिबद्धता को दोहराया। इसका अर्थ है कि अमेरिका अपने सहयोगी की रक्षा के लिए परमाणु हथियारों सहित अपनी समस्त सैन्य क्षमताओं का उपयोग करने के लिए तत्पर रहेगा। दोनों देशों ने कोरियाई प्रायद्वीप में संभावित परमाणु संकट की स्थिति से निपटने की तैयारियों को मजबूत करने, संयुक्त योजनाओं की समीक्षा करने तथा अमेरिकी परमाणु अभियानों में दक्षिण कोरिया की पारंपरिक सैन्य क्षमताओं के समन्वय पर भी विस्तार से चर्चा की।

गौरतलब है कि दोनों सहयोगी देशों ने NCG गतिविधियों और परामर्श से जुड़ी संवेदनशील सूचनाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक सुरक्षा दिशानिर्देश दस्तावेज़ पर भी हस्ताक्षर किए।

यूरोपीय संघ की भी कड़ी चेतावनी

इससे एक दिन पहले, बुधवार को दक्षिण कोरिया और यूरोपीय संघ (EU) के नेताओं ने संयुक्त बयान जारी कर स्पष्ट किया कि उत्तर कोरिया को अंतरराष्ट्रीय परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के तहत कभी भी परमाणु हथियार संपन्न राष्ट्र के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह बयान प्योंगयांग की उस नीति के सीधे विरोध में है जिसके तहत उसने अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम को कभी न छोड़ने की कसम खाई है।

NCG की स्थापना और आगे की राह

NCG की स्थापना जुलाई 2023 में दोनों देशों के नेताओं द्वारा अपनाई गई वाशिंगटन घोषणापत्र के तहत की गई थी। इसका मूल उद्देश्य उत्तर कोरिया के बढ़ते परमाणु खतरों के बीच दक्षिण कोरिया के लिए अमेरिकी सुरक्षा आश्वासन और विस्तारित प्रतिरोध की विश्वसनीयता को सुदृढ़ करना है। यह छठी बैठक इस बात का संकेत है कि दोनों देश प्योंगयांग के परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर निगरानी और कूटनीतिक दबाव दोनों मोर्चों पर सक्रिय रहेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका असली संदर्भ बीजिंग को देखकर समझना होगा — जहाँ शी-किम शिखर वार्ता में परमाणु निरस्त्रीकरण का एक शब्द भी नहीं था। चीन की यह रणनीतिक चुप्पी प्योंगयांग को वह कूटनीतिक आवरण देती है जिसके सहारे वह अपने परमाणु कार्यक्रम को अपरिवर्तनीय बताता रहता है। वाशिंगटन और सोल का 'विस्तारित प्रतिरोध' का दोहराव महत्वपूर्ण है, पर असली प्रश्न यह है कि क्या यह प्रतिबद्धता प्योंगयांग की गणना को बदलने में सक्षम है — जबकि उत्तर कोरिया ने परमाणु कार्यक्रम को संविधान में दर्ज कर लिया है। NCG एक ज़रूरी मंच है, लेकिन जब तक चीन इस समीकरण से बाहर है, निरस्त्रीकरण का लक्ष्य एक घोषणा से आगे बढ़ना मुश्किल है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

न्यूक्लियर कंसल्टेटिव ग्रुप (NCG) क्या है और इसकी स्थापना कब हुई?
NCG की स्थापना जुलाई 2023 में दक्षिण कोरिया और अमेरिका के नेताओं द्वारा अपनाए गए वाशिंगटन घोषणापत्र के तहत हुई थी। इसका उद्देश्य उत्तर कोरिया के परमाणु खतरों के बीच दक्षिण कोरिया के लिए अमेरिकी सुरक्षा आश्वासन और विस्तारित प्रतिरोध की विश्वसनीयता को मजबूत करना है।
NCG की छठी बैठक में क्या निर्णय लिए गए?
सोल में हुई इस बैठक में दोनों देशों ने उत्तर कोरिया के परमाणु निरस्त्रीकरण के साझा लक्ष्य की पुनः पुष्टि की और NCG गतिविधियों को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। साथ ही, संवेदनशील सूचनाओं की सुरक्षा के लिए एक सुरक्षा दिशानिर्देश दस्तावेज़ पर भी हस्ताक्षर किए गए।
चीन-उत्तर कोरिया शिखर वार्ता का इस बैठक से क्या संबंध है?
इसी सप्ताह प्योंगयांग में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन के बीच हुई शिखर वार्ता में परमाणु निरस्त्रीकरण का कोई उल्लेख नहीं था। इसे बीजिंग की ओर से प्योंगयांग के परमाणु विस्तार को अप्रत्यक्ष समर्थन के रूप में देखा जा रहा है, जिसके जवाब में NCG की यह बैठक और भी प्रासंगिक हो गई।
विस्तारित प्रतिरोध का क्या अर्थ है और यह दक्षिण कोरिया के लिए क्यों ज़रूरी है?
विस्तारित प्रतिरोध का अर्थ है कि अमेरिका अपने सहयोगी दक्षिण कोरिया की रक्षा के लिए परमाणु हथियारों सहित अपनी सभी सैन्य क्षमताओं का उपयोग करने के लिए तत्पर रहेगा। यह प्रतिबद्धता उत्तर कोरिया के बढ़ते परमाणु खतरों को देखते हुए दक्षिण कोरिया की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
क्या उत्तर कोरिया को कभी परमाणु राष्ट्र के रूप में मान्यता मिल सकती है?
दक्षिण कोरिया, अमेरिका और यूरोपीय संघ तीनों ने स्पष्ट किया है कि उत्तर कोरिया को अंतरराष्ट्रीय परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के तहत कभी भी परमाणु हथियार संपन्न राष्ट्र के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा। हालाँकि, उत्तर कोरिया ने अपने परमाणु कार्यक्रम को कभी न छोड़ने की कसम खाई है और उसे अपने संविधान में दर्ज कर लिया है।
राष्ट्र प्रेस
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