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किम यो-जोंग का ऐलान: उत्तर कोरिया का परमाणु दर्जा अपरिवर्तनीय, शी जिनपिंग की प्योंगयांग यात्रा से पहले कड़ा संदेश

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किम यो-जोंग का ऐलान: उत्तर कोरिया का परमाणु दर्जा अपरिवर्तनीय, शी जिनपिंग की प्योंगयांग यात्रा से पहले कड़ा संदेश

सारांश

शी जिनपिंग की प्योंगयांग यात्रा से ठीक पहले किम यो-जोंग ने परमाणु निरस्त्रीकरण की किसी भी संभावना को सिरे से खारिज कर दिया। ट्रंप-शी के साझा लक्ष्य को 'झूठ' बताते हुए उत्तर कोरिया ने संकेत दिया कि कूटनीतिक दबाव उसकी परमाणु नीति नहीं बदल सकता।

मुख्य बातें

किम यो-जोंग ने 7 जून को घोषणा की कि उत्तर कोरिया का परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र का दर्जा पूरी तरह अपरिवर्तनीय है।
बयान KCNA के माध्यम से उस दिन जारी हुआ जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग सोमवार को प्योंगयांग दौरे पर आने वाले थे।
बीजिंग में ट्रंप-शी की बैठक में उत्तर कोरिया के परमाणु निरस्त्रीकरण को साझा लक्ष्य बताए जाने के दावे को किम यो-जोंग ने 'झूठी जानकारी का प्रसार' करार दिया।
उत्तर कोरिया ने 2023 में परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र की स्थिति को अपने संविधान में शामिल किया था।
किम जोंग उन ने सप्ताहांत में एक हथियार कारखाने का निरीक्षण कर मिसाइल उत्पादन क्षमता बढ़ाने का निर्देश दिया।

उत्तर कोरिया की सत्ताधारी किम परिवार की प्रमुख सदस्य और सर्वोच्च नेता किम जोंग उन की बहन किम यो-जोंग ने रविवार, 7 जून को एक कड़े बयान में घोषणा की कि प्योंगयांग का परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र का दर्जा पूरी तरह अपरिवर्तनीय है और इसके विरुद्ध किसी भी प्रकार की धमकी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह बयान कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (KCNA) के माध्यम से प्रकाशित हुआ। यह घोषणा ऐसे नाज़ुक कूटनीतिक क्षण में आई है जब चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग सोमवार को दो दिवसीय यात्रा पर प्योंगयांग पहुँचने वाले थे।

बयान की पृष्ठभूमि और कूटनीतिक संदर्भ

किम यो-जोंग का यह बयान उस दावे के सीधे खंडन के रूप में आया जो पिछले महीने बीजिंग में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग की बैठक के बाद सामने आया था। उस बैठक में दोनों नेताओं ने उत्तर कोरिया के परमाणु निरस्त्रीकरण को साझा लक्ष्य बताया था। किम यो-जोंग ने इसे "झूठी जानकारी का प्रसार" करार देते हुए कहा कि अमेरिका अभी भी पुराने और अव्यावहारिक सपनों में जी रहा है।

गौरतलब है कि चीन उत्तर कोरिया का सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक और आर्थिक सहयोगी है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और कूटनीतिक अलगाव के बीच बीजिंग दशकों से प्योंगयांग को समर्थन देता रहा है। ऐसे में शी की यात्रा से ठीक पहले यह बयान अंतरराष्ट्रीय समुदाय को उत्तर कोरिया की अटल नीति का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है।

परमाणु कार्यक्रम: संविधान से मिसाइल कारखाने तक

उत्तर कोरिया लंबे समय से अपने परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य बताता रहा है। वर्ष 2023 में उसने अपनी परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र की स्थिति को संविधान में भी शामिल कर लिया — यह एक ऐसा कदम था जिसने किसी भी भावी वार्ता में निरस्त्रीकरण की संभावना को संवैधानिक रूप से जटिल बना दिया।

उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया के अनुसार, किम जोंग उन ने उसी सप्ताहांत एक प्रमुख हथियार कारखाने का निरीक्षण किया और मिसाइल उत्पादन क्षमता बढ़ाने का निर्देश दिया। उन्होंने पर्याप्त संख्या में मिसाइलों की आपूर्ति सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया।

किम का तर्क: 'ताकत की पूजा' और संप्रभुता

किम जोंग उन ने संविधान के तहत अपनी परमाणु क्षमता को उचित ठहराते हुए कहा कि न्यूक्लियर ताकत 'ताकत को पूजने वालों' के साथ संघर्ष में सबसे मजबूत तर्क है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तर कोरिया अपनी सुरक्षा और संप्रभुता के मामले में कभी भी कोई समझौता स्वीकार नहीं करेगा।

यह ऐसे समय में आया है जब 2019 में किम जोंग उन और डोनाल्ड ट्रंप के बीच परमाणु निरस्त्रीकरण वार्ता विफल होने के बाद से प्योंगयांग ने अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को तेज़ गति से आगे बढ़ाया है। आलोचकों का कहना है कि हर नई कूटनीतिक पहल के साथ उत्तर कोरिया की परमाणु क्षमता और मज़बूत होती जाती है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और आगे की राह

किम यो-जोंग के बयान ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि शी जिनपिंग की प्योंगयांग यात्रा परमाणु निरस्त्रीकरण की किसी भी उम्मीद को आगे नहीं बढ़ाएगी। विश्लेषकों के अनुसार, चीन की यात्रा का उद्देश्य संभवतः द्विपक्षीय आर्थिक और राजनीतिक संबंधों को मज़बूत करना है, न कि परमाणु मुद्दे पर कोई돌breakthrough हासिल करना।

कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अमेरिका और उसके सहयोगी उत्तर कोरिया की सुरक्षा चिंताओं को सीधे संबोधित नहीं करते, तब तक प्योंगयांग अपनी परमाणु नीति से पीछे हटने का कोई संकेत नहीं देगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

और यह दर्शाता है कि उत्तर कोरिया अंतरराष्ट्रीय दबाव को अपनी ताकत की पुष्टि के अवसर के रूप में इस्तेमाल करता है। 2019 की विफल वार्ता के बाद से प्योंगयांग की परमाणु क्षमता में जो विस्तार हुआ है, वह यह भी बताता है कि कूटनीतिक ठहराव उसके लिए लाभदायक रहा है। असली सवाल यह है कि क्या बीजिंग इस यात्रा में कोई ऐसा ढाँचा तैयार कर पाएगा जो प्योंगयांग को वार्ता की मेज़ पर वापस लाए — या यह यात्रा भी केवल प्रतीकात्मक एकजुटता तक सीमित रहेगी।
RashtraPress
6 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

किम यो-जोंग ने उत्तर कोरिया के परमाणु दर्जे पर क्या कहा?
किम यो-जोंग ने 7 जून को KCNA के माध्यम से जारी बयान में कहा कि उत्तर कोरिया का परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र का दर्जा पूरी तरह अपरिवर्तनीय है और इसके विरुद्ध किसी भी धमकी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने ट्रंप-शी की बैठक में सामने आए निरस्त्रीकरण के दावे को 'झूठी जानकारी का प्रसार' बताया।
शी जिनपिंग की प्योंगयांग यात्रा का उद्देश्य क्या है?
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग सोमवार को दो दिवसीय दौरे पर प्योंगयांग पहुँचने वाले थे। चीन उत्तर कोरिया का सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक और आर्थिक सहयोगी है, और यह यात्रा द्विपक्षीय संबंधों को मज़बूत करने के उद्देश्य से मानी जा रही है।
उत्तर कोरिया ने परमाणु दर्जे को संविधान में कब शामिल किया?
उत्तर कोरिया ने वर्ष 2023 में अपनी परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र की स्थिति को संविधान में शामिल किया। इस कदम ने किसी भी भावी परमाणु निरस्त्रीकरण वार्ता को संवैधानिक रूप से और अधिक जटिल बना दिया।
किम जोंग उन और ट्रंप के बीच परमाणु वार्ता क्यों विफल हुई थी?
2019 में किम जोंग उन और डोनाल्ड ट्रंप के बीच परमाणु निरस्त्रीकरण वार्ता विफल हो गई थी, जिसके बाद प्योंगयांग ने अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को तेज़ गति से आगे बढ़ाया। उस विफलता के बाद से दोनों देशों के बीच कोई ठोस वार्ता नहीं हो सकी है।
उत्तर कोरिया की मिसाइल उत्पादन क्षमता के बारे में ताज़ा जानकारी क्या है?
उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया के अनुसार, किम जोंग उन ने सप्ताहांत में एक प्रमुख हथियार कारखाने का निरीक्षण किया और मिसाइल उत्पादन क्षमता बढ़ाने का निर्देश दिया। उन्होंने पर्याप्त संख्या में मिसाइलों की आपूर्ति सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया।
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