शी जिनपिंग की उत्तर कोरिया यात्रा: 6 साल बाद किम जोंग उन से शिखर वार्ता, परमाणु मुद्दे पर दुनिया की नज़र
सारांश
मुख्य बातें
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 8-9 जून को दो दिवसीय राजकीय यात्रा पर प्योंगयांग पहुँचेंगे — 2019 के बाद उनकी यह पहली उत्तर कोरिया यात्रा है। इस दौरान उनकी उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन के साथ शिखर वार्ता होगी, जिसमें द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय सुरक्षा और कोरियाई प्रायद्वीप के परमाणु मुद्दे पर चर्चा अपेक्षित है।
यात्रा की पृष्ठभूमि
विश्लेषकों के अनुसार इस यात्रा का केंद्रीय उद्देश्य चीन और उत्तर कोरिया के बीच पारंपरिक रणनीतिक साझेदारी को नई ऊर्जा देना है। हाल के वर्षों में प्योंगयांग के मॉस्को के साथ बढ़ते सैन्य-आर्थिक जुड़ाव ने दोनों देशों के रिश्तों में कुछ दूरी की अटकलें जन्म दी थीं। गौरतलब है कि पिछले वर्ष सितंबर में किम जोंग उन की बीजिंग यात्रा और शी जिनपिंग के साथ उनकी मुलाकात को उन अटकलों को शांत करने वाले संकेत के रूप में देखा गया था।
चीन की सरकारी समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने इस यात्रा को 'ऐतिहासिक' बताते हुए कहा है कि इससे दोनों देशों के संबंधों के विकास के लिए एक नई रूपरेखा तैयार होगी।
वैश्विक कूटनीतिक संदर्भ
यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब शी जिनपिंग हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ अलग-अलग शिखर बैठकें कर चुके हैं। माना जा रहा है कि बीजिंग वैश्विक मंच पर अपने कूटनीतिक प्रभाव को और सुदृढ़ करने के साथ-साथ उत्तर कोरिया के साथ रणनीतिक संबंधों को नई दिशा देना चाहता है।
यह ऐसे समय में आया है जब वाशिंगटन ने प्योंगयांग के साथ वार्ता की इच्छा जताई है — जिससे उत्तर कोरिया के लिए बीजिंग के समर्थन को और मज़बूत करने की कोशिश और भी प्रासंगिक हो जाती है।
परमाणु निरस्त्रीकरण पर उत्तर कोरिया का रुख
यात्रा से ठीक पहले किम जोंग उन की बहन किम यो जोंग ने उत्तर कोरिया की परमाणु-संपन्न राष्ट्र की स्थिति को दोहराते हुए परमाणु निरस्त्रीकरण की किसी भी संभावना को सिरे से खारिज कर दिया। यह बयान स्पष्ट संकेत है कि प्योंगयांग किसी भी संभावित वार्ता में अपनी परमाणु क्षमता को सौदेबाज़ी की मेज़ पर नहीं रखेगा।
उत्तर कोरिया के लिए आर्थिक दाँव
आर्थिक दृष्टि से उत्तर कोरिया अपनी चीन पर निर्भरता बनाए रखना चाहता है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बीच बीजिंग उसका सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बना हुआ है। विश्लेषकों का कहना है कि इस यात्रा से आर्थिक सहयोग के नए समझौतों की संभावना भी है।
आगे क्या
दुनिया की नज़र इस बात पर टिकी है कि 8-9 जून की शिखर वार्ता के बाद कोरियाई प्रायद्वीप की सुरक्षा और परमाणु मुद्दे पर शी जिनपिंग और किम जोंग उन संयुक्त रूप से क्या संदेश देते हैं। यह बैठक आने वाले महीनों में क्षेत्रीय कूटनीति की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।