शी चिनफिंग ने प्योंगयांग में किम जोंग उन के स्वागत भोज में भाग लिया, चीन-DPRK संबंधों को नई ऊंचाई देने का संकल्प
सारांश
मुख्य बातें
चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग और उनकी पत्नी फंग लीयुएं ने 8 जून की रात प्योंगयांग में उत्तर कोरिया (DPRK) के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन द्वारा आयोजित राजकीय स्वागत भोज में शिरकत की। यह यात्रा शी चिनफिंग की इस वर्ष की पहली विदेश यात्रा है, जो चीन-DPRK संबंधों की रणनीतिक अहमियत को रेखांकित करती है।
भोज में शी चिनफिंग का संबोधन
स्वागत भोज में दिए गए भाषण में शी चिनफिंग ने कहा कि वर्तमान वर्ष चीन-DPRK मित्रता, सहयोग और पारस्परिक सहायता संधि की 65वीं वर्षगांठ है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंध एक नए ऐतिहासिक प्रस्थान बिंदु पर खड़े हैं।
शी ने इस यात्रा के दौरान किम जोंग उन के साथ हुई बातचीत में महत्वपूर्ण सहमति बनने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को समाजवाद के भविष्य की रणनीतिक ऊंचाई से वर्तमान वैश्विक रुझानों को समझते हुए उच्च स्तरीय आवाजाही मजबूत करनी चाहिए, रणनीतिक संपर्क को गहराना चाहिए, व्यावहारिक सहयोग का विस्तार करना चाहिए और जन-से-जन संपर्क बढ़ाना चाहिए।
किम जोंग उन की प्रतिक्रिया
किम जोंग उन ने अपने संबोधन में शी चिनफिंग की यात्रा का हार्दिक स्वागत करते हुए कहा कि यह इस वर्ष की उनकी पहली विदेश यात्रा के रूप में DPRK का चुनाव, दोनों पार्टियों और दोनों देशों के संबंधों के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता और DPRK के समाजवादी निर्माण कार्य के लिए उनके अमूल्य समर्थन का प्रमाण है।
किम ने कहा कि इस भेंटवार्ता में दोनों नेताओं ने नई परिस्थितियों के अनुरूप नए युग की विशेषताओं से युक्त चीन-DPRK संबंधों को आगे बढ़ाने पर महत्वपूर्ण सहमति हासिल की और साझा चिंता के अंतरराष्ट्रीय व क्षेत्रीय मुद्दों पर व्यापक विचार-विमर्श किया।
द्विपक्षीय संबंधों का संदर्भ
गौरतलब है कि यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब पूर्वी एशिया में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा हुआ है और अमेरिका तथा उसके सहयोगी देश उत्तर कोरिया पर प्रतिबंधों की नीति को और कड़ा करने पर विचार कर रहे हैं। चीन-DPRK मित्रता संधि की 65वीं वर्षगांठ के अवसर पर यह राजकीय भोज दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और वैचारिक निकटता को एक बार फिर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करता है।
किम ने यह भी कहा कि यह बैठक DPRK-चीन मित्रता के तेज विकास को गति देगी और क्षेत्र तथा विश्व की शांति व स्थिरता में योगदान करेगी।
आगे की राह
दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत में रणनीतिक सहयोग, व्यावहारिक आर्थिक साझेदारी और जन-संपर्क बढ़ाने पर जोर दिया गया। विश्लेषकों के अनुसार, इस यात्रा के परिणाम आने वाले महीनों में दोनों देशों के बीच नीतिगत समन्वय के रूप में सामने आ सकते हैं।