11 जुलाई 2026
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क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक: यथास्थिति बदलने की कोशिशों का कड़ा विरोध, उत्तर कोरिया निरस्त्रीकरण पर प्रतिबद्धता

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क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक: यथास्थिति बदलने की कोशिशों का कड़ा विरोध, उत्तर कोरिया निरस्त्रीकरण पर प्रतिबद्धता

सारांश

नई दिल्ली में क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक महज़ कूटनीतिक औपचारिकता नहीं थी — चारों देशों ने बल-प्रयोग से यथास्थिति बदलने की कोशिशों के खिलाफ एकजुट रुख अपनाया, उत्तर कोरिया के परमाणु निरस्त्रीकरण की प्रतिबद्धता दोहराई और ऊर्जा सुरक्षा के लिए नई पहलों को मंज़ूरी दी।

मुख्य बातें

क्वाड देशों ने 26 मई 2026 को नई दिल्ली में विदेश मंत्रियों की बैठक की।
जापानी विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोटेगी ने कहा कि चारों देश ताकत या दबाव से यथास्थिति बदलने की किसी भी कोशिश का कड़ा विरोध करेंगे।
क्वाड ने उत्तर कोरिया के पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई; परमाणु, मिसाइल और साइबर गतिविधियों पर चर्चा हुई।
महत्वपूर्ण खनिजों के निर्यात प्रतिबंधों पर गहरी चिंता जताई गई; क्रिटिकल मिनरल्स इनिशिएटिव फ्रेमवर्क को आपूर्ति श्रृंखला के लिए अहम बताया गया।
होर्मुज़ स्ट्रेट में सुरक्षित नौवहन और मध्य पूर्व में स्थिरता के लिए कूटनीतिक प्रयासों पर सहमति बनी।
एनर्जी सिक्योरिटी इनिशिएटिव को जापान के 'पावर एशिया' कार्यक्रम से जोड़ने की योजना पर सहमति।

नई दिल्ली में 26 मई 2026 को आयोजित क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोटेगी ने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि चारों देशों ने ताकत या दबाव के ज़रिए एकतरफा तरीके से मौजूदा स्थिति बदलने की किसी भी कोशिश का कड़ा विरोध करने पर सहमति जताई है। बैठक में उत्तर कोरिया के परमाणु निरस्त्रीकरण, महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला और होर्मुज़ स्ट्रेट में नौवहन सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

बैठक में क्या तय हुआ

मोटेगी ने बताया कि बैठक के दौरान क्षेत्रीय हालात को लेकर रणनीतिक सोच को एकसमान करने में सफलता मिली। उन्होंने कहा, 'आज की बैठक हमें यह साफ और मज़बूत संदेश देने का अच्छा मौका थी कि क्वाड इस दिशा में ज़रूरी और ठोस सहयोग को आगे बढ़ाएगा।' चारों देशों ने इस बात पर स्पष्ट सहमति जताई कि बल प्रयोग या दबाव से यथास्थिति में बदलाव की कोई भी कोशिश अस्वीकार्य है।

उत्तर कोरिया और साइबर खतरों पर चर्चा

उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों के साथ-साथ उसकी साइबर गतिविधियों पर भी बैठक में विस्तृत चर्चा हुई। मोटेगी ने कहा कि क्वाड देशों ने उत्तर कोरिया के पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर कोरिया की परमाणु क्षमताओं को लेकर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चिंताएँ गहरी हो रही हैं।

महत्वपूर्ण खनिजों और ऊर्जा सुरक्षा पर जोर

जापानी विदेश मंत्री ने बताया कि क्वाड देशों ने महत्वपूर्ण खनिजों के निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर 'गहरी चिंता' जताई है। क्रिटिकल मिनरल्स इनिशिएटिव फ्रेमवर्क को आपूर्ति श्रृंखला मज़बूत करने के लिहाज़ से बेहद महत्वपूर्ण बताया गया। इसके अलावा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में ऊर्जा की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए शुरू की गई एनर्जी सिक्योरिटी इनिशिएटिव को जापान के 'पावर एशिया' कार्यक्रम से जोड़ने की योजना पर भी सहमति बनी।

होर्मुज़ स्ट्रेट और मध्य पूर्व में स्थिरता

मोटेगी ने कहा, 'ईरान की स्थिति का इंडो-पैसिफिक क्षेत्र पर, खासकर ऊर्जा आपूर्ति के मामले में, बड़ा असर पड़ता है।' क्वाड देशों ने होर्मुज़ स्ट्रेट में सुरक्षित और स्वतंत्र समुद्री आवाजाही सुनिश्चित करने तथा मध्य पूर्व में स्थिरता बनाए रखने के लिए कूटनीतिक प्रयासों की अहमियत पर सहमति जताई। गौरतलब है कि होर्मुज़ स्ट्रेट से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुज़रता है, जिससे इसकी सुरक्षा एशियाई अर्थव्यवस्थाओं के लिए सीधे तौर पर जुड़ी है।

क्वाड की भविष्य की दिशा

मोटेगी ने 2019 में हुई क्वाड विदेश मंत्रियों की पहली बैठक को याद करते हुए कहा कि क्वाड सहयोग में हुई प्रगति देखकर उन्हें संतोष हो रहा है। उन्होंने क्वाड को 'फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक' की परिकल्पना को साकार करने की ताकत बताया और कहा कि चारों देश मिलकर क्षेत्र में मज़बूती और आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर काम करेंगे, ताकि हर देश अपने फैसले स्वतंत्र रूप से ले सके। आने वाले समय में क्वाड की सहयोगी परियोजनाओं को और गति मिलने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की होगी — 2019 से अब तक हर बैठक के बाद ऐसे ही संकल्प दोहराए जाते रहे हैं, फिर भी इंडो-पैसिफिक में एकतरफा सैन्य दबाव की घटनाएँ कम नहीं हुई हैं। महत्वपूर्ण खनिजों पर 'गहरी चिंता' जताना ज़रूरी है, पर बिना ठोस वैकल्पिक आपूर्ति ढाँचे के यह चिंता नीतिगत बदलाव नहीं बनती। होर्मुज़ स्ट्रेट पर ऊर्जा सुरक्षा की चर्चा दर्शाती है कि क्वाड का दायरा अब सिर्फ चीन-केंद्रित नहीं रहा — यह विस्तार एक परिपक्वता का संकेत है, लेकिन साथ ही रणनीतिक फोकस के बिखरने का जोखिम भी।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में मुख्य सहमति किस पर बनी?
क्वाड देशों ने ताकत या दबाव के ज़रिए एकतरफा तरीके से यथास्थिति बदलने की किसी भी कोशिश का कड़ा विरोध करने पर सहमति जताई। इसके साथ ही उत्तर कोरिया के परमाणु निरस्त्रीकरण, ऊर्जा सुरक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला पर भी संयुक्त रुख अपनाया गया।
क्वाड ने उत्तर कोरिया के बारे में क्या कहा?
क्वाड देशों ने उत्तर कोरिया के पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। बैठक में उत्तर कोरिया के परमाणु व मिसाइल कार्यक्रमों के साथ-साथ उसकी साइबर गतिविधियों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
होर्मुज़ स्ट्रेट का क्वाड बैठक में ज़िक्र क्यों हुआ?
जापान के विदेश मंत्री मोटेगी ने कहा कि ईरान की स्थिति का इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में ऊर्जा आपूर्ति पर सीधा असर पड़ता है। इसलिए क्वाड देशों ने होर्मुज़ स्ट्रेट में सुरक्षित और स्वतंत्र नौवहन सुनिश्चित करने और मध्य पूर्व में स्थिरता के लिए कूटनीतिक प्रयासों की अहमियत पर सहमति जताई।
क्रिटिकल मिनरल्स इनिशिएटिव फ्रेमवर्क क्या है और इसका क्या महत्व है?
यह क्वाड देशों द्वारा महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को मज़बूत करने के लिए बनाया गया सहयोग ढाँचा है। मोटेगी ने इसे आपूर्ति श्रृंखला की मज़बूती के लिए बेहद ज़रूरी बताया, खासकर तब जब कुछ देशों द्वारा महत्वपूर्ण खनिजों के निर्यात पर प्रतिबंध लगाए जाने पर क्वाड ने गहरी चिंता जताई है।
क्वाड की पहली विदेश मंत्री बैठक कब हुई थी और तब से क्या बदला है?
क्वाड विदेश मंत्रियों की पहली बैठक 2019 में हुई थी। मोटेगी ने कहा कि तब से क्वाड सहयोग में उल्लेखनीय प्रगति हुई है और अब यह 'फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक' की परिकल्पना को साकार करने की एक सशक्त ताकत बन चुका है।
राष्ट्र प्रेस
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