उत्तर कोरिया परमाणु निरस्त्रीकरण पर दक्षिण कोरिया-अमेरिका-जापान की त्रिपक्षीय प्रतिबद्धता, प्योंगयांग से वार्ता की अपील
सारांश
मुख्य बातें
दक्षिण कोरिया, अमेरिका और जापान के विदेश मंत्रियों ने 22 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्चस्तरीय सप्ताह के दौरान त्रिपक्षीय बैठक कर उत्तर कोरिया के पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण के प्रति अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता दोहराई और प्योंगयांग से वार्ता की मेज पर लौटने की अपील की। यह बैठक ऐसे समय हुई जब उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन की उपस्थिति में रविवार को एक नए हथियार तंत्र का परीक्षण किए जाने की खबर सामने आई।
त्रिपक्षीय बैठक का घटनाक्रम
दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून, अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो और जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी ने सोमवार को न्यूयॉर्क में यह बैठक की। यह तीनों देशों के विदेश मंत्रियों की इस वर्ष की तीसरी त्रिपक्षीय बैठक थी — इससे पहले 7 जुलाई को तुर्की में नाटो शिखर सम्मेलन और 22 जुलाई को फिलीपींस में आसियान क्षेत्रीय मंच के दौरान बैठकें हो चुकी हैं।
बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में तीनों देशों ने कहा, 'डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया के पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए हमारी दृढ़ प्रतिबद्धता अटल है। बातचीत का रास्ता खुला है और उत्तर कोरिया को वार्ता की मेज पर लौटना चाहिए।'
उत्तर कोरिया का हथियार परीक्षण और बढ़ता तनाव
यह अपील ऐसे समय में आई है जब उत्तर कोरिया अपने हथियार कार्यक्रमों को लगातार आगे बढ़ा रहा है। उत्तर कोरिया ने मंगलवार को बताया कि किम जोंग-उन की मौजूदगी में रविवार को एक नए हथियार तंत्र का परीक्षण किया गया, हालाँकि उसने इस हथियार की विस्तृत जानकारी नहीं दी और इसे अपनी हथियार तकनीक को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। तीनों देशों ने संयुक्त बयान में उत्तर कोरिया के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों से होने वाली आय को रोकने और संबंधित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के प्रस्तावों को लागू करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।
गौरतलब है कि तीनों देशों ने बहुपक्षीय प्रतिबंध निगरानी दल (एमएसएमटी) के कार्य का स्वागत किया, जो यूएनएससी प्रतिबंधों के उल्लंघन और उनसे बचने के उत्तर कोरियाई प्रयासों पर नज़र रखता है। इसके साथ ही उत्तर कोरिया के आईटी कर्मचारियों से जुड़े साइबर खतरों को लेकर जारी चेतावनियों का भी उल्लेख किया गया।
ट्रंप की व्यक्तिगत कूटनीति और अमेरिकी रक्षा प्रतिबद्धता
वार्ता की यह अपील अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस इच्छा के संदर्भ में भी देखी जा रही है कि वे इस वर्ष किम जोंग-उन के साथ पुनः बैठक कर अपनी व्यक्तिगत कूटनीति को आगे बढ़ाना चाहते हैं। हालाँकि इसके साथ ही अमेरिका ने दक्षिण कोरिया और जापान की रक्षा के प्रति अपनी 'आयरनक्लैड' यानी अटल प्रतिबद्धता भी दोहराई। संयुक्त बयान के अनुसार, 'दक्षिण कोरिया और जापान की सुरक्षा को लेकर अमेरिका की प्रतिबद्धता उसकी सैन्य और परमाणु क्षमताओं से स्वीकृत है।'
ताइवान और इंडो-पैसिफिक पर साझा रुख
बैठक में ताइवान स्ट्रेट में शांति और स्थिरता बनाए रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। तीनों देशों ने ताइवान से जुड़े मुद्दों के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन किया और यथास्थिति को एकतरफा तरीके से बदलने के किसी भी प्रयास का विरोध किया। यह विषय ऐसे समय में उठा जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच गुरुवार को व्हाइट हाउस में शिखर बैठक प्रस्तावित है।
तीनों देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नौवहन और हवाई उड़ान की स्वतंत्रता, निर्बाध वैध व्यापार और अंतरराष्ट्रीय कानून तथा संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि के अनुरूप समुद्री गतिविधियों के समर्थन की भी पुष्टि की।
आर्थिक सुरक्षा, ऊर्जा और तकनीक पर सहयोग
बैठक में आर्थिक सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर भी सहमति बनी। तीनों देशों ने आर्थिक दबाव तथा गैर-बाजार नीतियों और बाजार असंतुलन पैदा करने वाली गतिविधियों का विरोध करने का संकल्प लिया। त्रिपक्षीय आपूर्ति श्रृंखला प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को मजबूत करने और आर्थिक सुरक्षा पर नई त्रिपक्षीय बातचीत शुरू करने का स्वागत किया गया।
ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर तीनों देशों ने 7 जुलाई को हुए त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन के तहत छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMR) की तैनाती में तेजी लाने की प्रतिबद्धता जताई। इसके अलावा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), क्वांटम तकनीक, डिजिटल बुनियादी ढाँचे और जैव प्रौद्योगिकी जैसी उभरती तकनीकों के विकास और सुरक्षा के लिए सहयोग मजबूत करने पर सहमति जताई गई।
आगे की राह
यह त्रिपक्षीय बैठक यह संकेत देती है कि अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान के बीच रणनीतिक समन्वय उत्तर कोरिया की बढ़ती गतिविधियों और इंडो-पैसिफिक में बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच और गहरा हो रहा है। अब सभी की निगाहें इस पर होंगी कि ट्रंप-शी शिखर बैठक और संभावित ट्रंप-किम संपर्क के बाद कूटनीतिक परिदृश्य किस दिशा में जाता है।