उत्तर कोरिया का आरोप: अमेरिका दक्षिण कोरिया-जापान को परमाणु पनडुब्बी के लिए उकसा रहा है
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर कोरिया ने बुधवार, 16 सितंबर को अमेरिका पर यह आरोप लगाया कि वह दक्षिण कोरिया और जापान को परमाणु ऊर्जा से चालित पनडुब्बियाँ हासिल करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। उत्तर कोरिया ने इस मुद्दे को अपनी परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को और सुदृढ़ करने के औचित्य के रूप में भी प्रस्तुत किया।
मुख्य घटनाक्रम
उत्तर कोरिया की यह प्रतिक्रिया उस बयान के बाद सामने आई, जो एक अमेरिकी नौसेना अधिकारी ने पिछले गुरुवार को हवाई में पत्रकारों से बातचीत के दौरान दिया था। उस अधिकारी ने दक्षिण कोरिया और जापान की परमाणु पनडुब्बी हासिल करने की योजनाओं पर टिप्पणी की थी।
रिपोर्टों के अनुसार, अधिकारी ने कहा था कि दक्षिण कोरिया को ऐसी पनडुब्बियों की ज़रूरत के लिए 'स्पष्ट सैन्य और रणनीतिक कारण' बताने चाहिए, न कि उन्हें महज एक 'प्रतिष्ठा के प्रतीक' के रूप में देखना चाहिए। वहीं, जापान की इस दिशा में की जा रही कोशिशों को उन्होंने अपेक्षाकृत अधिक सकारात्मक दृष्टि से देखा।
उत्तर कोरिया की प्रतिक्रिया
उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी केसीएनए (KCNA) में प्रकाशित एक टिप्पणी में अंतरराष्ट्रीय मामलों के एक विश्लेषक ने कथित तौर पर दावा किया कि यह चर्चा दक्षिण कोरिया और जापान को परमाणु पनडुब्बियाँ हासिल करने के लिए 'उकसाने' की सुनियोजित कोशिश थी। विश्लेषक ने अमेरिका को 'दुनिया में परमाणु प्रसार का सबसे बड़ा सूत्रधार' बताया।
विश्लेषक ने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका 'ऑकस' सुरक्षा साझेदारी के माध्यम से अपने सहयोगी देशों — दक्षिण कोरिया और जापान — तक परमाणु पनडुब्बी तकनीक पहुँचाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने लिखा, 'हकीकत यह दिखाती है कि अमेरिका की 'ऑकस 2.0' योजना, जिसके तहत गैर-परमाणु सहयोगी देशों को सैन्य उपयोग की परमाणु तकनीक देने की बात है, अब बड़े पैमाने पर विस्तार के चरण में पहुँच चुकी है।'
ऑकस साझेदारी की पृष्ठभूमि
'ऑकस' एक त्रिपक्षीय सुरक्षा साझेदारी है, जिसमें अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। इसकी घोषणा 2021 में हुई थी और 2024 में इस पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते ने ऑस्ट्रेलिया के लिए अमेरिकी तकनीक की सहायता से परमाणु ऊर्जा से चालित पनडुब्बियाँ हासिल करने का मार्ग प्रशस्त किया। कई विशेषज्ञ इसे दक्षिण कोरिया और अमेरिका के बीच भविष्य में होने वाले किसी संभावित समझौते के लिए एक मॉडल के रूप में देखते हैं।
गौरतलब है कि दक्षिण कोरिया लंबे समय से परमाणु ऊर्जा चालित पनडुब्बी हासिल करने की आकांक्षा रखता है, जबकि अमेरिका परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के तहत इस तकनीक के हस्तांतरण को लेकर सतर्क रहा है।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर
उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया और जापान की ओर से परमाणु पनडुब्बियाँ हासिल करने की कोशिशों को 'लापरवाह कदम' करार दिया। उसका कहना है कि इससे यह स्पष्ट होता है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका अपने सहयोगियों को प्रतिद्वंद्वी देशों के विरुद्ध एक 'अग्रिम सैन्य शक्ति' के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।
उत्तर कोरिया का परमाणु तर्क
केसीएनए के विश्लेषक ने इन घटनाक्रमों को वैश्विक परमाणु अप्रसार व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बताते हुए तर्क दिया कि उत्तर कोरिया को अपनी परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को संख्या और गुणवत्ता — दोनों स्तरों पर — निरंतर मजबूत करते रहना चाहिए। यह बयान उत्तर कोरिया की उस दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है, जिसमें वह क्षेत्रीय तनाव को अपने परमाणु कार्यक्रम की वैधता के रूप में प्रस्तुत करता रहा है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान की संयुक्त प्रतिक्रिया पर सबकी नज़रें टिकी रहेंगी।