17 सितंबर 2026 पंचांग: अनुराधा नक्षत्र में षष्ठी तिथि, अभिजीत मुहूर्त और राहुकाल का पूरा विवरण
सारांश
मुख्य बातें
17 सितंबर 2026, गुरुवार को हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि रहेगी। इस दिन का प्रमुख नक्षत्र अनुराधा है, और शुभ कार्यों के लिए अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:29 बजे से दोपहर 12:17 बजे तक उपलब्ध रहेगा। हिंदू परंपरा में पंचांग को दैनिक जीवन के महत्वपूर्ण निर्णयों — पूजा, यात्रा, व्यापार और अन्य मांगलिक कार्यों — का आधार माना जाता है।
तिथि, वार और नक्षत्र का विवरण
षष्ठी तिथि इस दिन सुबह 10:49 बजे तक रहेगी, जिसके पश्चात सप्तमी तिथि आरंभ होगी। दिन का नक्षत्र अनुराधा शाम 7:55 बजे तक प्रभावी रहेगा, इसके बाद ज्येष्ठा नक्षत्र का आगमन होगा। विष्कुम्भ योग दोपहर 12:49 बजे तक रहेगा। तैतिल करण सुबह 10:49 बजे तक रहेगा, उसके पश्चात अगले करण की गणना लागू होगी।
सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रमा की स्थिति
इस दिन सूर्योदय सुबह 5:45 बजे और सूर्यास्त शाम 6:01 बजे होगा। चंद्रोदय सुबह 11:24 बजे और चंद्रास्त रात 9:54 बजे होगा। ग्रह-स्थिति की दृष्टि से सूर्य इस दिन सुबह 7:58 बजे सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में प्रवेश करेंगे। चंद्रमा पूरे दिन वृश्चिक राशि में स्थित रहेगा।
शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त — जिसे दिन के सर्वाधिक शुभ कालखंडों में गिना जाता है — सुबह 11:29 बजे से दोपहर 12:17 बजे तक रहेगा। इस अवधि में आरंभ किए गए कार्यों को परंपरागत रूप से फलदायक माना जाता है।
राहुकाल, गुलिक काल और यमघण्ट काल
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राहुकाल में शुभ कार्यों की शुरुआत से बचने की परंपरा है। 17 सितंबर को राहुकाल दोपहर 1:25 बजे से 2:57 बजे तक रहेगा। इसके अतिरिक्त गुलिक काल सुबह 8:49 बजे से 10:21 बजे तक और यमघण्ट काल सुबह 5:45 बजे से 7:17 बजे तक रहेगा। इन तीनों कालखंडों को अशुभ माना जाता है।
दिशाशूल और यात्रा संबंधी सावधानी
17 सितंबर को दिशाशूल दक्षिण दिशा में रहेगा। पारंपरिक मान्यता के अनुसार इस दिन दक्षिण दिशा में यात्रा से पहले दिशाशूल का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। यदि यात्रा अनिवार्य हो तो विद्वानों से परामर्श लेने की सलाह दी जाती है। आगे के दिनों में दिशाशूल की स्थिति और नक्षत्र बदलते रहेंगे, इसलिए प्रतिदिन पंचांग का अनुसरण उचित माना जाता है।