22 सितंबर 2026
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तिजारा नगर परिषद चुनाव: राजस्थान हाईकोर्ट के दखल के बाद वोटिंग रात 10 बजे तक बढ़ी, कांग्रेस के रामावतार सैनी जीते

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तिजारा नगर परिषद चुनाव: राजस्थान हाईकोर्ट के दखल के बाद वोटिंग रात 10 बजे तक बढ़ी, कांग्रेस के रामावतार सैनी जीते

सारांश

तिजारा नगर परिषद अध्यक्ष पद का चुनाव महज़ वोटिंग नहीं, बल्कि एक रात भर चली सियासी जंग बन गया — हिरासत के आरोप, हाईकोर्ट का दखल और समय-सीमा में दोहरा विस्तार। अंततः कांग्रेस के रामावतार सैनी ने 18 वोटों से जीत दर्ज की।

मुख्य बातें

तिजारा नगर परिषद अध्यक्ष पद के चुनाव में 22 सितंबर 2026 को राजनीतिक विवाद के बाद मतदान की समय-सीमा रात 10 बजे तक बढ़ाई गई।
राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश अनूप कुमार ढांड ने मामले की सुनवाई की और भिवाड़ी के एडीएम को रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए।
कांग्रेस उम्मीदवार रामावतार सैनी ने 18 वोट पाकर तिजारा नगर परिषद अध्यक्ष पद पर जीत हासिल की।
कांग्रेस का आरोप — पार्षदों को पंचकूला के निकट रोका गया; पूर्व विधायक संदीप यादव को कथित तौर पर फर्रुखनगर में घंटों हिरासत में रखा गया।
35 सदस्यीय परिषद में बहुमत के लिए 18 मत आवश्यक थे; सैनी ने ठीक इतने वोट प्राप्त किए।

राजस्थान के तिजारा नगर परिषद के अध्यक्ष पद के चुनाव में 22 सितंबर 2026 को राजनीतिक उठापटक देर रात तक जारी रही। पार्षदों के मतदान केंद्र तक समय पर न पहुँच पाने के कारण राजस्थान हाईकोर्ट को दखल देना पड़ा, जिसके बाद मतदान की समय-सीमा पहले रात 8 बजे और फिर रात 10 बजे तक बढ़ाई गई। रात 10 बजे के बाद घोषित हुए परिणाम में कांग्रेस उम्मीदवार रामावतार सैनी ने 18 मत हासिल कर अध्यक्ष पद पर विजय दर्ज की।

मुख्य घटनाक्रम

तिजारा म्युनिसिपल काउंसिल में कुल 35 पार्षद हैं और चेयरपर्सन पद के लिए बहुमत के लिए 18 मतों की आवश्यकता थी। रामावतार सैनी ने ठीक इतने ही वोट प्राप्त कर जीत सुनिश्चित की। रिटर्निंग ऑफिसर व एसडीएम दिव्या ने उन्हें चुनाव प्रमाण-पत्र सौंपा।

विवाद की शुरुआत तब हुई जब कांग्रेस समर्थित पार्षदों पर कथित तौर पर हरियाणा में रोक लगाई गई। आरोपों के अनुसार, ये पार्षद हिमाचल प्रदेश स्थित एक कैंप से लौट रहे थे और पंचकूला के निकट उन्हें रोका गया, जिससे वे निर्धारित समय पर तिजारा नहीं पहुँच सके।

हाईकोर्ट का दखल और निर्देश

मामला राजस्थान हाईकोर्ट की सिंगल बेंच तक पहुँचा, जहाँ न्यायाधीश अनूप कुमार ढांड ने सुनवाई की। अदालत ने भिवाड़ी के एडीएम को घटना की रिपोर्ट राज्य चुनाव आयोग को सौंपने का निर्देश दिया। इसके बाद राज्य चुनाव आयोग के निर्देशानुसार मतदान का समय रात 10 बजे तक बढ़ाया गया।

आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, यदि सभी पार्षद रात 10 बजे से पहले मतदान पूरा कर लेते, तो मतगणना तत्काल प्रारंभ की जाती।

कांग्रेस के आरोप

पूर्व विधायक संदीप यादव, जिला कांग्रेस अध्यक्ष बलराम यादव और कांग्रेस उम्मीदवार रामावतार सैनी सोमवार तड़के करीब सुबह 3:30 बजे कार्यकर्ताओं के साथ रिटर्निंग ऑफिसर के आवास पर पहुँचे और मांग की कि कथित तौर पर हिरासत में लिए गए पार्षदों के सुरक्षित पहुँचने तक चुनाव स्थगित किया जाए।

कांग्रेस नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व विधायक संदीप यादव को गुरुग्राम के निकट फर्रुखनगर में कई घंटों तक कथित तौर पर हिरासत में रखा गया। पार्टी का दावा था कि कुछ पार्षदों ने वीडियो संदेश के ज़रिये यह जताया कि उन्हें किसी अज्ञात स्थान पर ले जाया गया है और उन्हें अपनी सुरक्षा की चिंता है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने तिजारा पुलिस स्टेशन के एसएचओ जयप्रकाश के पास शिकायत दर्ज कराई और पुलिस थाने के समीप विरोध प्रदर्शन भी किया।

आम जनता पर असर

यह विवाद राजस्थान की स्थानीय निकाय राजनीति की उस प्रवृत्ति को रेखांकित करता है जिसमें अध्यक्ष पद के चुनाव के दौरान पार्षदों को 'मैनेज' करने की कोशिशें अक्सर सामने आती हैं। गौरतलब है कि राजस्थान में इससे पहले भी कई नगर निकाय चुनावों में पार्षदों को होटलों या अन्य स्थानों पर एकजुट रखने की रणनीति देखी गई है।

तिजारा की जनता के लिए यह परिणाम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि नगर परिषद अध्यक्ष स्थानीय विकास, बजट और नागरिक सुविधाओं के निर्णयों में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं।

क्या होगा आगे

भिवाड़ी के एडीएम की रिपोर्ट आने के बाद राज्य चुनाव आयोग इस मामले में आगे की कार्रवाई तय कर सकता है। हाईकोर्ट के निर्देश और पुलिस में दर्ज शिकायत के मद्देनज़र जाँच प्रक्रिया जारी रहने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि अगर ये सच निकले तो यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बाधा का गंभीर मामला है।
RashtraPress
22 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तिजारा नगर परिषद अध्यक्ष पद का चुनाव किसने जीता?
कांग्रेस उम्मीदवार रामावतार सैनी ने 18 वोट पाकर तिजारा नगर परिषद अध्यक्ष पद का चुनाव जीता। 35 सदस्यीय परिषद में बहुमत के लिए 18 मतों की आवश्यकता थी।
राजस्थान हाईकोर्ट ने तिजारा चुनाव में दखल क्यों दिया?
कांग्रेस समर्थित पार्षदों के कथित तौर पर हरियाणा में रोके जाने और समय पर मतदान केंद्र न पहुँच पाने की शिकायत के बाद हाईकोर्ट को दखल देना पड़ा। न्यायाधीश अनूप कुमार ढांड की सिंगल बेंच ने भिवाड़ी के एडीएम को राज्य चुनाव आयोग को रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया।
तिजारा में मतदान का समय कितनी बार और क्यों बढ़ाया गया?
मतदान का समय दो बार बढ़ाया गया — पहले रात 8 बजे तक, फिर रात 10 बजे तक। यह विस्तार पार्षदों के देर से पहुँचने और हाईकोर्ट के निर्देश के बाद राज्य चुनाव आयोग ने दिया।
कांग्रेस ने तिजारा चुनाव में क्या आरोप लगाए?
कांग्रेस का आरोप था कि पार्षदों को हिमाचल प्रदेश से लौटते समय पंचकूला के निकट हरियाणा में रोका गया। पूर्व विधायक संदीप यादव को गुरुग्राम के पास फर्रुखनगर में कथित तौर पर घंटों हिरासत में रखा गया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
तिजारा नगर परिषद में कुल कितने पार्षद हैं और बहुमत के लिए कितने वोट चाहिए?
तिजारा नगर परिषद में कुल 35 पार्षद हैं। अध्यक्ष पद के लिए बहुमत हेतु 18 वोट आवश्यक हैं। कांग्रेस उम्मीदवार रामावतार सैनी को ठीक 18 वोट मिले।
राष्ट्र प्रेस
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