21 सितंबर 2026
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तिजारा चेयरमैन चुनाव से पहले कांग्रेस का आरोप: हरियाणा पुलिस ने 18 पार्षदों को हिरासत में लिया

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तिजारा चेयरमैन चुनाव से पहले कांग्रेस का आरोप: हरियाणा पुलिस ने 18 पार्षदों को हिरासत में लिया

सारांश

तिजारा चेयरमैन चुनाव से घंटों पहले कांग्रेस ने बड़ा आरोप लगाया — हरियाणा पुलिस ने 18 समर्थित पार्षदों को सूरजपुर टोल प्लाजा पर रोका। 35 सीटों वाली परिषद में बहुमत का जादुई आंकड़ा 18 है, और कांग्रेस का दावा है कि उसके पास ठीक इतने ही वोट थे।

मुख्य बातें

तिजारा नगर परिषद के चेयरमैन चुनाव से पहले कांग्रेस ने आरोप लगाया कि हरियाणा पुलिस ने उनके 18 समर्थित पार्षदों को सूरजपुर टोल प्लाजा (चंडीमंदिर) के पास रोका।
पार्षदों को कथित तौर पर पिंजौर पुलिस स्टेशन ले जाया गया; पूर्व विधायक संदीप यादव को बाद में रिहा कर दिया गया।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने दावा किया कि पुलिस के पास पार्षदों की तस्वीरें पहले से थीं और यह 'टारगेटेड कार्रवाई' थी।
तिजारा परिषद में 35 वार्ड हैं; बहुमत के लिए 18 वोट जरूरी; कांग्रेस का दावा — उसके पास ठीक 18 समर्थित पार्षद थे।
डीएसपी शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पुलिस आरोपों की जांच कर रही है; हरियाणा पुलिस की किस यूनिट ने रोका, यह पता लगाया जा रहा है।
इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।

तिजारा नगर परिषद के चेयरमैन पद के चुनाव से महज कुछ घंटे पहले 21 सितंबर 2026 को एक बड़ा राजनीतिक विवाद सामने आया, जब कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि हरियाणा पुलिस ने उनके समर्थन वाले करीब 18 पार्षदों को सूरजपुर टोल प्लाजा (चंडीमंदिर) के पास उस समय रोक लिया, जब वे हिमाचल प्रदेश से राजस्थान लौट रहे थे। इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, और पुलिस ने कहा है कि मामले की जांच जारी है।

कैसे शुरू हुआ विवाद

तिजारा के कांग्रेस नेता इमरान खान ने दावा किया कि रविवार देर रात पार्षदों को ले जा रही एक बस और उसके साथ चल रही कई गाड़ियों को हरियाणा पुलिस ने सूरजपुर टोल प्लाजा के पास रोका। उनके अनुसार, कुछ पुलिस वाहनों पर नंबर प्लेट या तो नहीं थी या ढकी हुई थी। पार्षदों को उनकी गाड़ियों समेत पिंजौर पुलिस स्टेशन ले जाया गया, जहाँ कांग्रेस नेता और समर्थक रिहाई की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए।

तिजारा के पूर्व विधायक संदीप यादव, जो कथित तौर पर पार्षदों के साथ यात्रा कर रहे थे, ने भी पुलिस दखल का आरोप लगाते हुए एक वीडियो जारी किया। बाद में कांग्रेस नेताओं के अनुसार, संदीप यादव को रिहा कर दिया गया जबकि पार्षद विवाद के केंद्र में बने रहे।

राजनीतिक आरोप और पलटवार

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भाजपा ने 'लोकतंत्र की हत्या' में अब न केवल राजस्थान पुलिस बल्कि हरियाणा पुलिस को भी शामिल कर लिया है। उन्होंने दावा किया कि हरियाणा पुलिस के पास पार्षदों की तस्वीरें पहले से मौजूद थीं और उन्हें चेहरे की पहचान करके अन्य कार्यकर्ताओं से अलग किया गया।

गहलोत ने आगे आरोप लगाया कि यह सब कुछ राजस्थान के मुख्यमंत्री के निर्देश पर हरियाणा के मुख्यमंत्री द्वारा कराया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि हनुमानगढ़ में एक निर्दलीय विधायक की गिरफ्तारी और राज्यभर में कांग्रेस पार्षदों को पुलिस व एसीबी के नोटिस पहले से दिए जा रहे हैं।

पुलिस का रुख

तिजारा के डीएसपी शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पुलिस इन आरोपों की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश में है कि हरियाणा पुलिस की किस यूनिट ने समूह को रोका था। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिकायत की पुष्टि के बाद ही उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हरियाणा पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी तक सामने नहीं आई है।

तिजारा परिषद का गणित

तिजारा नगर परिषद में कुल 35 वार्ड हैं और चेयरमैन पद के लिए 18 वोट का बहुमत जरूरी है। उपलब्ध चुनावी आंकड़ों के अनुसार, 31 सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीती हैं, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) को 3 और कांग्रेस को 1 सीट मिली है। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि 17 निर्दलीय पार्षदों ने उन्हें समर्थन दे दिया है, जिससे उनकी कुल संख्या 18 हो जाती है — ठीक बहुमत के बराबर।

यह ऐसे समय में आया है जब निर्दलीय पार्षदों के भारी बहुमत के कारण दोनों पक्षों के लिए उनका समर्थन जुटाना निर्णायक बन गया है। गौरतलब है कि इसी रणनीति के तहत कांग्रेस ने वोटिंग से पहले अपने सभी समर्थित पार्षदों को हिमाचल प्रदेश में एकजुट किया था।

आगे क्या होगा

सोमवार को होने वाले चेयरमैन चुनाव पर इस पूरे घटनाक्रम का सीधा असर पड़ सकता है, क्योंकि कांग्रेस नेताओं को आशंका है कि पार्षद समय पर तिजारा नहीं पहुँच पाएंगे। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या विवादित पार्षद वोटिंग में शामिल हो पाते हैं और चेयरमैन पद का फैसला किसके पक्ष में जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो संवैधानिक सीमाओं के लिहाज से गंभीर सवाल खड़े करता है। कांग्रेस के 'तस्वीरें पहले से थीं' वाले दावे की पुष्टि या खंडन अभी बाकी है, लेकिन डीएसपी की जांच की बात और हरियाणा पुलिस की चुप्पी खुद अपना संदेश दे रही है। मुख्यधारा की कवरेज आरोप-प्रत्यारोप पर केंद्रित है, जबकि असली सवाल यह है: क्या चुनाव आयोग ऐसे मामलों में हस्तक्षेप की स्थिति में है, या निकाय चुनाव नियमित रूप से इस तरह के दबाव से बाहर रहते हैं?
RashtraPress
21 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तिजारा नगर परिषद में कांग्रेस पार्षदों को हिरासत में लेने का क्या मामला है?
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि 21 सितंबर 2026 को तिजारा चेयरमैन चुनाव से पहले हरियाणा पुलिस ने सूरजपुर टोल प्लाजा के पास कांग्रेस समर्थित करीब 18 पार्षदों को उस समय रोका, जब वे हिमाचल प्रदेश से लौट रहे थे। इन्हें पिंजौर पुलिस स्टेशन ले जाया गया; हालांकि पुलिस ने इन आरोपों की पुष्टि नहीं की है और जांच जारी है।
तिजारा नगर परिषद चेयरमैन चुनाव में बहुमत का आंकड़ा क्या है?
तिजारा नगर परिषद में कुल 35 वार्ड हैं और चेयरमैन चुनाव जीतने के लिए 18 वोट का बहुमत जरूरी है। परिषद में 31 निर्दलीय, 3 BJP और 1 कांग्रेस पार्षद हैं। कांग्रेस का दावा है कि 17 निर्दलीय पार्षदों के समर्थन से उनके पास कुल 18 वोट हैं — ठीक बहुमत के बराबर।
पूर्व CM अशोक गहलोत ने इस मामले में क्या कहा?
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आरोप लगाया कि भाजपा ने 'लोकतंत्र की हत्या' में हरियाणा पुलिस को भी शामिल कर लिया है। उन्होंने दावा किया कि पुलिस के पास पार्षदों की तस्वीरें पहले से थीं और यह पूरी तरह 'टारगेटेड कार्रवाई' थी, जो राजस्थान के मुख्यमंत्री के निर्देश पर हरियाणा के मुख्यमंत्री द्वारा कराई जा रही है।
पुलिस ने इस विवाद पर क्या कहा?
तिजारा के डीएसपी शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पुलिस आरोपों की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश में है कि हरियाणा पुलिस की किस यूनिट ने समूह को रोका। उन्होंने कहा कि शिकायत की पुष्टि के बाद उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हरियाणा पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
इस घटना का तिजारा चेयरमैन चुनाव पर क्या असर पड़ सकता है?
यदि कांग्रेस समर्थित पार्षद समय पर तिजारा नहीं पहुँच पाए, तो सोमवार को होने वाले चेयरमैन चुनाव में उनकी अनुपस्थिति सीधे परिणाम बदल सकती है। कांग्रेस का दावा है कि उसके पास ठीक बहुमत (18) के बराबर वोट थे, इसलिए एक भी पार्षद की गैर-मौजूदगी नतीजे पर असर डाल सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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