तिजारा चेयरमैन चुनाव से पहले कांग्रेस का आरोप: हरियाणा पुलिस ने 18 पार्षदों को हिरासत में लिया
सारांश
मुख्य बातें
तिजारा नगर परिषद के चेयरमैन पद के चुनाव से महज कुछ घंटे पहले 21 सितंबर 2026 को एक बड़ा राजनीतिक विवाद सामने आया, जब कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि हरियाणा पुलिस ने उनके समर्थन वाले करीब 18 पार्षदों को सूरजपुर टोल प्लाजा (चंडीमंदिर) के पास उस समय रोक लिया, जब वे हिमाचल प्रदेश से राजस्थान लौट रहे थे। इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, और पुलिस ने कहा है कि मामले की जांच जारी है।
कैसे शुरू हुआ विवाद
तिजारा के कांग्रेस नेता इमरान खान ने दावा किया कि रविवार देर रात पार्षदों को ले जा रही एक बस और उसके साथ चल रही कई गाड़ियों को हरियाणा पुलिस ने सूरजपुर टोल प्लाजा के पास रोका। उनके अनुसार, कुछ पुलिस वाहनों पर नंबर प्लेट या तो नहीं थी या ढकी हुई थी। पार्षदों को उनकी गाड़ियों समेत पिंजौर पुलिस स्टेशन ले जाया गया, जहाँ कांग्रेस नेता और समर्थक रिहाई की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए।
तिजारा के पूर्व विधायक संदीप यादव, जो कथित तौर पर पार्षदों के साथ यात्रा कर रहे थे, ने भी पुलिस दखल का आरोप लगाते हुए एक वीडियो जारी किया। बाद में कांग्रेस नेताओं के अनुसार, संदीप यादव को रिहा कर दिया गया जबकि पार्षद विवाद के केंद्र में बने रहे।
राजनीतिक आरोप और पलटवार
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भाजपा ने 'लोकतंत्र की हत्या' में अब न केवल राजस्थान पुलिस बल्कि हरियाणा पुलिस को भी शामिल कर लिया है। उन्होंने दावा किया कि हरियाणा पुलिस के पास पार्षदों की तस्वीरें पहले से मौजूद थीं और उन्हें चेहरे की पहचान करके अन्य कार्यकर्ताओं से अलग किया गया।
गहलोत ने आगे आरोप लगाया कि यह सब कुछ राजस्थान के मुख्यमंत्री के निर्देश पर हरियाणा के मुख्यमंत्री द्वारा कराया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि हनुमानगढ़ में एक निर्दलीय विधायक की गिरफ्तारी और राज्यभर में कांग्रेस पार्षदों को पुलिस व एसीबी के नोटिस पहले से दिए जा रहे हैं।
पुलिस का रुख
तिजारा के डीएसपी शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पुलिस इन आरोपों की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश में है कि हरियाणा पुलिस की किस यूनिट ने समूह को रोका था। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिकायत की पुष्टि के बाद ही उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हरियाणा पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी तक सामने नहीं आई है।
तिजारा परिषद का गणित
तिजारा नगर परिषद में कुल 35 वार्ड हैं और चेयरमैन पद के लिए 18 वोट का बहुमत जरूरी है। उपलब्ध चुनावी आंकड़ों के अनुसार, 31 सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीती हैं, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) को 3 और कांग्रेस को 1 सीट मिली है। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि 17 निर्दलीय पार्षदों ने उन्हें समर्थन दे दिया है, जिससे उनकी कुल संख्या 18 हो जाती है — ठीक बहुमत के बराबर।
यह ऐसे समय में आया है जब निर्दलीय पार्षदों के भारी बहुमत के कारण दोनों पक्षों के लिए उनका समर्थन जुटाना निर्णायक बन गया है। गौरतलब है कि इसी रणनीति के तहत कांग्रेस ने वोटिंग से पहले अपने सभी समर्थित पार्षदों को हिमाचल प्रदेश में एकजुट किया था।
आगे क्या होगा
सोमवार को होने वाले चेयरमैन चुनाव पर इस पूरे घटनाक्रम का सीधा असर पड़ सकता है, क्योंकि कांग्रेस नेताओं को आशंका है कि पार्षद समय पर तिजारा नहीं पहुँच पाएंगे। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या विवादित पार्षद वोटिंग में शामिल हो पाते हैं और चेयरमैन पद का फैसला किसके पक्ष में जाता है।