बलतेज पन्नू का कांग्रेस पर हमला: '2027 में भी बारी नहीं', जाखड़ और बिट्टू के आरोपों को नकारा
सारांश
मुख्य बातें
आम आदमी पार्टी (AAP) के महासचिव और वरिष्ठ नेता बलतेज सिंह पन्नू ने 27 अक्टूबर 2026 को चंडीगढ़ में पत्रकारों से बात करते हुए कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन को 'हताशा की राजनीति' करार दिया और दावा किया कि 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस सत्ता में वापसी नहीं कर पाएगी। साथ ही उन्होंने भाजपा नेताओं सुनील जाखड़ और रवनीत सिंह बिट्टू के बयानों पर भी तीखा पलटवार किया।
जाखड़ के आरोपों पर पन्नू का जवाब
पन्नू ने सुनील जाखड़ के उस आरोप को सिरे से खारिज किया जिसमें पुलिस की मिलीभगत से हरप्रीत सिंह उर्फ हैरी को भागने देने का दावा किया गया था। पन्नू ने स्पष्ट किया, 'यह मामला 2023 का है। वह जेल में था और उसे पैरोल पर रिहा किया गया था, लेकिन पैरोल खत्म होने के बाद वह नहीं लौटा।'
उन्होंने कहा कि उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार हैरी को 23 जनवरी 2024 को तीन महीने की अंतरिम ज़मानत पर रिहा किया गया था और वापसी की निर्धारित तिथि 13 फरवरी 2024 थी, किंतु वह लौटा नहीं। पन्नू ने कहा कि जब व्यक्ति कोर्ट के आदेश पर ज़मानत पर बाहर हो, तो उसमें पुलिस मिलीभगत का आरोप लगाना 'गलत और निराधार' है।
कांग्रेस के विरोध पर तीखी टिप्पणी
कांग्रेस के विधानसभा परिसर में प्रदर्शन और विधानसभा सत्र में उठाए गए पानी के मुद्दे पर पन्नू ने कहा, 'कांग्रेस घबरा गई है। उसे समझ आ गया है कि 2027 में भी उसकी बारी नहीं आने वाली। आम आदमी पार्टी द्वारा किए गए कामों का उनके पास कोई जवाब नहीं है। जब लोगों के पास कोई जवाब नहीं होता तो वे ऐसा बर्ताव करने लगते हैं।'
उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को भी निशाने पर लेते हुए सवाल उठाया कि उन्होंने किस तरह के विधायकों को पंजाब भेजा है, जो तीन-चार बार चुने जाने के बावजूद सदन के नियमों और सदस्यों के परस्पर सम्मान से अनजान हैं।
रवनीत बिट्टू पर सीधा हमला
भाजपा नेता रवनीत सिंह बिट्टू पर निशाना साधते हुए पन्नू ने कहा कि बिट्टू की राज्यसभा सदस्यता समाप्त हो चुकी है और वे फिलहाल 'खाली' हैं। पन्नू ने बिट्टू को हाल ही में रिलीज़ हुई फिल्म 'सतलुज' देखने की सलाह दी, जिसमें कथित तौर पर 'कटिया' घटना का चित्रण है, और उनके पूर्वजों की भूमिका पर सवाल उठाए।
गौरतलब है कि पन्नू ने बिट्टू को सुझाव दिया कि अगर वे व्यक्तिगत टिप्पणियाँ करना चाहते हैं, तो पहले उस घटना के संदर्भ में खुद को स्पष्ट करें। यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब में सत्तारूढ़ AAP और विपक्षी दलों के बीच विधानसभा सत्र के दौरान बयानबाज़ी तेज़ हो गई है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
पंजाब में 2022 के विधानसभा चुनाव में AAP ने भारी बहुमत से जीत हासिल की थी। अब जैसे-जैसे 2027 के चुनाव नज़दीक आ रहे हैं, विपक्षी दल — विशेषकर कांग्रेस और भाजपा — सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति अपना रहे हैं। यह पहली बार नहीं है जब AAP नेताओं ने कांग्रेस के प्रदर्शन को 'हताशा' बताया हो; पिछले कई महीनों में दोनों पक्षों के बीच इसी तरह की तीखी नोकझोंक सामने आती रही है।
आने वाले दिनों में पंजाब की राजनीति और गर्म होने के संकेत हैं, क्योंकि सभी प्रमुख दल 2027 के लिए अपनी-अपनी ज़मीन मज़बूत करने में जुटे हैं।