कर्नाटक कैबिनेट विस्तार: बी. नागेंद्र की वापसी सबसे बड़ा चौंकाने वाला फैसला, लक्ष्मी हेब्बलकर बाहर
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस पार्टी ने सोमवार, 3 अगस्त को बेंगलुरु में कर्नाटक कैबिनेट विस्तार को अंजाम दिया, जिसमें अनुभवी नेताओं और नए चेहरों के बीच सावधानीपूर्वक संतुलन बनाने की कोशिश की गई। इस विस्तार का सबसे चर्चित और विवादास्पद पहलू रहा — वरिष्ठ कांग्रेस विधायक बी. नागेंद्र की मंत्रिमंडल में वापसी, जो कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में कथित घोटाले के आरोपों के चलते पहले इस्तीफा दे चुके थे।
नागेंद्र की वापसी: कानूनी राय के बाद लिया फैसला
पार्टी सूत्रों के अनुसार, नागेंद्र को दोबारा मंत्री बनाने से पहले कांग्रेस नेतृत्व ने वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी से कानूनी राय ली थी। सूत्रों ने बताया कि राज्य सीआईडी ने नागेंद्र को क्लीनचिट दे दी है, हालांकि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की वित्तीय अनियमितताओं की जांच अभी भी जारी है। कांग्रेस नेतृत्व ने कानूनी और राजनीतिक दोनों पहलुओं पर विचार करने के बाद उनकी वापसी को मंजूरी दी। उम्मीद है कि विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरेगा।
बड़े नाम जो बाहर रहे
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की करीबी राजनीतिक सहयोगी मानी जाने वाली पूर्व मंत्री लक्ष्मी हेब्बलकर को विस्तारित मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली — राजनीतिक विश्लेषक इसे उनके लिए बड़ा झटका मान रहे हैं। इसके अलावा वरिष्ठ नेता एचसी महादेवप्पा, तनवीर सैत, दिनेश गुंडू राव, एसएस मल्लिकार्जुन और एचके पाटिल भी मंत्रिमंडल से बाहर रहे।
हालांकि, पूर्व मंत्री दिनेश गुंडू राव ने कहा, 'मेरी कोई अपेक्षा नहीं थी। मैं पहले ही मंत्री के रूप में कार्य कर चुका हूं। दूसरों को भी अवसर मिलना चाहिए और प्रशासनिक अनुभव प्राप्त करना चाहिए। यह अच्छी बात है कि राज्य में अब पूर्ण रूप से गठित मंत्रिमंडल है।'
नए चेहरे और उनकी प्रतिक्रिया
मंत्रिमंडल में शामिल किए गए नए नेताओं में पूर्व मंत्री मधु बंगारप्पा ने पार्टी नेतृत्व का आभार जताते हुए कहा, 'मुझे मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व में काम करने का अवसर मिला है। हम उन लोगों के लिए काम करेंगे जिन्होंने हमें वोट दिया है और जिन्होंने नहीं दिया है।'
पूर्व मुख्यमंत्री एन. धर्म सिंह के पुत्र अजय सिंह, जो कलबुर्गी जिले के जेवरगी निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं, ने कहा, 'मैं 2018 और 2023 में चुनाव नहीं लड़ पाया। मेरे पिता हमेशा कहते थे कि राजनीति में धैर्य रखना पड़ता है — उनकी सलाह आखिरकार सच साबित हुई है।'
चल्लाकेरे के तीसरी बार विधायक टी. रघु मूर्ति ने कहा कि उन्होंने 2008 में पहली बार पार्टी टिकट की इच्छा जताई थी, लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिला था। चित्रदुर्ग जिले में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की शानदार जीत के बावजूद उन्होंने अपनी सीट बरकरार रखी। हावेरी के विधायक रुद्रप्पा लमानी ने कहा कि उन्होंने मंत्री पद के लिए कोई पैरवी नहीं की और मुख्यमंत्री का फोन तब आया जब वे अपने पैतृक स्थान पर थे।
पाँच बार के विधायक एचसी बालकृष्ण — जो मुख्यमंत्री पद के लिए शिवकुमार की उम्मीदवारी के प्रबल समर्थक रहे हैं — ने भी मंत्रिमंडल में शपथ ली। पूर्व मंत्री शिवराज तंगदागी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, मुख्यमंत्री शिवकुमार, केसी वेणुगोपाल, रणदीप सिंह सुरजेवाला और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का आभार जताया।
जमीर अहमद खान और रिजवान अरशद की वापसी
पूर्व मंत्री जमीर अहमद खान की वापसी भी राजनीतिक विश्लेषकों के लिए आश्चर्य की बात रही, खासकर दावनगेरे उपचुनाव के बाद हुए विवादों के मद्देनजर। पार्टी सूत्रों के अनुसार, उनकी संगठनात्मक क्षमता और केरल में कांग्रेस के चुनाव प्रचार में योगदान को नेतृत्व ने सकारात्मक रूप से देखा।
बेंगलुरु के विधायक रिजवान अरशद — जिन्हें कांग्रेस के युवा चेहरों में गिना जाता है — को भी मंत्रिमंडल में स्थान मिला। पार्टी नेताओं ने दावणगेरे उपचुनाव के दौरान उनके संगठनात्मक प्रयासों को उनकी दावेदारी को मजबूत करने वाला कारक बताया।
आगे क्या होगा
पूर्व मंत्री संतोष लाड ने विस्तार का स्वागत करते हुए एक बार फिर श्रम विभाग का पोर्टफोलियो संभालने की इच्छा जताई। उन्होंने कहा, 'जब भी ऐसा कोई कदम उठाया जाता है, तो स्वाभाविक रूप से कुछ असंतोष होता है — कुल मिलाकर, मैं मंत्रिमंडल विस्तार का स्वागत करता हूं।' नागेंद्र पर ईडी की जांच जारी रहने के कारण विपक्ष के विधानसभा में इस मुद्दे को उठाने की पूरी संभावना है, जो आने वाले हफ्तों में कर्नाटक सरकार के लिए राजनीतिक चुनौती बन सकती है।