माहरंग बलूच समेत 4 कार्यकर्ताओं को उम्रकैद: बलूचिस्तान में व्यापक बंद, मानवाधिकार संगठनों की कड़ी आलोचना
सारांश
मुख्य बातें
बलूच यकजेहती कमेटी (BYC) की नेता माहरंग बलूच सहित चार कार्यकर्ताओं को पाकिस्तान की आतंकवाद रोधी अदालत द्वारा उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के विरोध में बुधवार, 24 जून को बलूचिस्तान के अनेक इलाकों में पूर्ण बंद रहा। प्रदर्शनकारियों ने इस फैसले को 'अन्यायपूर्ण' करार दिया और सड़कों पर उतरकर अपना विरोध दर्ज कराया।
मुख्य घटनाक्रम
यह बंद उस फैसले की प्रतिक्रिया में आया जो सोमवार को पाकिस्तान की एक आतंकवाद रोधी अदालत ने सुनाया था। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह मामला फ्रंटियर कॉर्प्स के एक अधिकारी की हत्या से जुड़ा बताया गया है।
अदालत ने माहरंग बलूच के अलावा बलूच स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (BSO) के अध्यक्ष बलाच कादिर, केंद्रीय नेता अबू बकर कलांची और BYC नेता सिबगतुल्लाह शाह को भी उम्रकैद की सजा सुनाई। उल्लेखनीय है कि यह सुनवाई क्वेटा जेल परिसर के भीतर बंद कमरे में हुई, जिसे 'बिना चेहरे वाली सुनवाई' कहा जा रहा है।
BYC की प्रतिक्रिया
BYC ने अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर बलूचिस्तान के विभिन्न हिस्सों में बंद की तस्वीरें साझा करते हुए कहा, 'यह हड़ताल दमन, राजनीतिक बदले की कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया के गलत इस्तेमाल के खिलाफ लोगों की सामूहिक नाराजगी को दिखाती है। अलग-अलग वर्गों के लोगों ने अपनी एकजुटता दिखाई और साफ संदेश दिया कि बलूचिस्तान अन्याय और लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने के खिलाफ खड़ा रहेगा।'
संगठन ने आरोप लगाया कि राज्य पक्ष ने नेताओं पर 'झूठे और बेबुनियाद' आरोप लगाए और पूरी सुनवाई में आवश्यक 'न्यायिक पारदर्शिता' का अभाव रहा। BYC ने कहा, 'संविधान और कानून का इस्तेमाल निष्पक्ष न्याय देने के बजाय राजनीतिक विरोध को दबाने के लिए किया जा रहा है।'
मानवाधिकार संगठनों की आलोचना
एमनेस्टी इंटरनेशनल की दक्षिण एशिया की कार्यवाहक क्षेत्रीय निदेशक इसाबेल लासी ने कहा, 'यह फैसला निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार के खिलाफ है। यह दिखाता है कि पाकिस्तान के आतंकवाद विरोधी कानूनों का इस्तेमाल शांतिपूर्ण विरोध की आवाजों को दबाने के लिए किया जा रहा है।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि माहरंग और शाह को कथित हिंसा से जोड़ने वाला कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य अदालत में पेश नहीं किया गया।
इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन (IHRF) ने भी इस फैसले की कड़ी निंदा की। संगठन ने कहा, 'यह न्याय नहीं है, बल्कि राजनीतिक विरोध को दबाने और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को डराने के लिए न्याय व्यवस्था का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह फैसला पाकिस्तान में कानून के शासन के लिए बड़ा झटका है।' IHRF ने कहा कि डॉ. माहरंग बलूच का एकमात्र 'अपराध' जबरन गायब किए जाने, बिना कानूनी प्रक्रिया के हत्याओं और राज्य के दमन के खिलाफ आवाज उठाना रहा है।
आगे क्या
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब बलूचिस्तान में नागरिक स्वतंत्रता और राजनीतिक असहमति को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव पहले से बढ़ा हुआ है। गौरतलब है कि 'बिना चेहरे वाली अदालत' प्रणाली पर अंतरराष्ट्रीय कानूनी विशेषज्ञ पहले भी सवाल उठा चुके हैं। अब देखना होगा कि क्या दोषी ठहराए गए कार्यकर्ता उच्च न्यायालय में अपील करते हैं और अंतरराष्ट्रीय दबाव पाकिस्तान सरकार के रुख को प्रभावित कर पाता है।