11 अगस्त 2026
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महरंग बलोच समेत 4 बलोच कार्यकर्ताओं को आजीवन कारावास, सिंध बार काउंसिल ने न्यायिक प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल

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महरंग बलोच समेत 4 बलोच कार्यकर्ताओं को आजीवन कारावास, सिंध बार काउंसिल ने न्यायिक प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल

सारांश

पाकिस्तान की एंटी-टेररिज्म कोर्ट ने बलोच अधिकार आंदोलन की प्रमुख नेता महरंग बलोच समेत चार कार्यकर्ताओं को आजीवन कारावास सुनाया। सिंध बार काउंसिल ने इस फैसले को न्यायिक प्रक्रिया और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए खतरा बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई है।

मुख्य बातें

पाकिस्तान की एंटी-टेररिज्म कोर्ट ने सोमवार को महरंग बलोच , बलाच कादिर , अबू बकर कलांची और सिबघतुल्लाह शाजी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
यह सजा फ्रंटियर कॉर्प्स के एक अधिकारी की हत्या से जुड़े मामले में दी गई है।
सिंध बार काउंसिल ने फैसले की कड़ी निंदा करते हुए न्यायिक निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों पर सवाल उठाए।
वकीलों ने कहा कि शांतिपूर्ण असहमति को अपराध बनाना संविधान की आत्मा के विरुद्ध है।
महरंग बलोच बलोच यकजेहती कमेटी (BYC) की नेता और बलोच अधिकारों की प्रमुख आवाज़ मानी जाती हैं।

पाकिस्तान की सिंध बार काउंसिल ने बलोच यकजेहती कमेटी (BYC) की नेता महरंग बलोच सहित चार बलोच कार्यकर्ताओं को सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा की कड़ी निंदा की है। पाकिस्तान की एंटी-टेररिज्म कोर्ट ने सोमवार को यह फैसला फ्रंटियर कॉर्प्स के एक अधिकारी की हत्या से जुड़े मामले में सुनाया। वकीलों ने चेतावनी दी है कि यदि यह निर्णय निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों की अनदेखी करके दिया गया है, तो यह न्यायपालिका की विश्वसनीयता के लिए गंभीर खतरा है।

किसे मिली सजा और क्या है मामला

एंटी-टेररिज्म कोर्ट ने महरंग बलोच के अलावा बलोच स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (BSO) के अध्यक्ष बलाच कादिर, BYC के केंद्रीय नेता अबू बकर कलांची और BYC नेता सिबघतुल्लाह शाजी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। यह सजा फ्रंटियर कॉर्प्स के एक अधिकारी की हत्या से जुड़े मामले में दी गई है।

गौरतलब है कि महरंग बलोच पाकिस्तान में बलोच अधिकारों की सबसे मुखर आवाज़ों में से एक मानी जाती हैं और उन्होंने अनेक शांतिपूर्ण प्रदर्शनों का नेतृत्व किया है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब बलोचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान पर दबाव बढ़ रहा है।

सिंध बार काउंसिल की आपत्तियाँ

सिंध बार काउंसिल के सदस्यों ने अपने बयान में कहा कि कानून की गरिमा उसकी कठोरता में नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता में निहित होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 'अदालतों का उद्देश्य किसी भी तरह की सहमति थोपना नहीं, बल्कि स्वतंत्रता की रक्षा करना, मनमानी को रोकना और मानव गरिमा को बनाए रखना है।'

काउंसिल ने यह भी कहा कि यदि न्यायिक संस्थानों को असहमति दबाने का माध्यम माना जाने लगे, तो इससे संविधान की आत्मा को ठेस पहुँचती है और न्याय व्यवस्था में जनता का भरोसा कमज़ोर होता है।

असहमति को अपराध बनाने पर चिंता

वकीलों ने अपने बयान में रेखांकित किया कि 'असहमति कोई अपराध नहीं है और शांतिपूर्ण ढंग से नागरिक अधिकारों की माँग करना देशद्रोह नहीं माना जा सकता।' उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी लोकतंत्र में हाशिए पर मौजूद लोगों की आवाज़ उठाने का अधिकार मौलिक है।

काउंसिल के अनुसार, कोई भी समाज तब तक कानून के शासन का दावा नहीं कर सकता जब तक वह विचार व्यक्त करने वालों को अपराधी घोषित करता रहे। उन्होंने यह भी कहा कि 'शांतिपूर्ण ढंग से अधिकारों की माँग करने वाले लोग वास्तव में लोकतंत्र के सबसे मज़बूत रक्षक हैं, और उन्हें दंडित करना सत्ता की कमज़ोरी को दर्शाता है।'

व्यापक संदर्भ और आगे की राह

यह फैसला बलोचिस्तान में दशकों से चली आ रही राजनीतिक अशांति और मानवाधिकार संगठनों की चिंताओं की पृष्ठभूमि में आया है। आलोचकों का कहना है कि पाकिस्तान में बलोच कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और वकीलों को लक्षित करने का एक दीर्घकालिक पैटर्न रहा है। सिंध बार काउंसिल की यह आपत्ति पाकिस्तान के कानूनी बिरादरी के भीतर से उठी एक दुर्लभ लेकिन महत्त्वपूर्ण आवाज़ है। अब देखना यह होगा कि उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय में इस फैसले को चुनौती दी जाती है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि यह पाकिस्तान की अपनी कानूनी बिरादरी के भीतर से उठी आवाज़ है — जो बाहरी आलोचना से कहीं अधिक असुविधाजनक है। असली सवाल यह है कि क्या एंटी-टेररिज्म कानूनों का उपयोग राजनीतिक विरोध को कुचलने के लिए हो रहा है — और यदि हाँ, तो पाकिस्तान का संवैधानिक ढाँचा किस हद तक इसे रोकने में सक्षम है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चुप्पी इस मामले में भी उतनी ही उल्लेखनीय है जितना फैसला खुद।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महरंग बलोच कौन हैं और उन्हें सजा क्यों दी गई?
महरंग बलोच बलोच यकजेहती कमेटी (BYC) की प्रमुख नेता हैं और पाकिस्तान में बलोच अधिकारों की सबसे मुखर आवाज़ों में से एक मानी जाती हैं। पाकिस्तान की एंटी-टेररिज्म कोर्ट ने उन्हें फ्रंटियर कॉर्प्स के एक अधिकारी की हत्या से जुड़े मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
सिंध बार काउंसिल ने इस फैसले पर क्या आपत्ति जताई?
सिंध बार काउंसिल ने कहा कि यदि यह फैसला निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों की अनदेखी करके दिया गया है, तो यह न्यायपालिका की विश्वसनीयता के लिए गंभीर खतरा है। काउंसिल ने यह भी कहा कि शांतिपूर्ण असहमति को अपराध बनाना संविधान की आत्मा के विरुद्ध है।
इस मामले में और कौन-कौन से कार्यकर्ताओं को सजा मिली?
महरंग बलोच के अलावा बलोच स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (BSO) के अध्यक्ष बलाच कादिर, BYC के केंद्रीय नेता अबू बकर कलांची और BYC नेता सिबघतुल्लाह शाजी को भी आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है।
पाकिस्तान में बलोच कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई का यह पहला मामला है?
नहीं, आलोचकों का कहना है कि पाकिस्तान में बलोच कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और वकीलों को लक्षित करने का एक दीर्घकालिक पैटर्न रहा है। यह फैसला बलोचिस्तान में दशकों से चली आ रही राजनीतिक अशांति और मानवाधिकार संगठनों की चिंताओं की पृष्ठभूमि में आया है।
इस फैसले के बाद आगे क्या हो सकता है?
सिंध बार काउंसिल की आपत्ति के बाद यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि उच्च न्यायालय या पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय में इस फैसले को चुनौती दी जाती है या नहीं। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की प्रतिक्रिया भी इस मामले में दबाव का एक महत्त्वपूर्ण कारक हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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