महरंग बलोच को दूसरी बार नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नॉमिनेट, पाकिस्तान ने सुनाई है उम्रकैद
सारांश
मुख्य बातें
बलूच मानवाधिकार कार्यकर्ता महरंग बलोच को दूसरी बार प्रतिष्ठित नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया गया है — ठीक उस समय जब पाकिस्तान की एक आतंकवाद निरोधी अदालत ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। बलूच यकजेहती कमेटी (BYC) ने शुक्रवार देर रात इस नामांकन की घोषणा की, जो जनवरी 2026 में हुआ था।
नामांकन की घोषणा और इसका समय
BYC ने बताया कि यह नामांकन जनवरी 2026 में हुआ था, किंतु संगठन की नीति के तहत उस समय इसे सार्वजनिक नहीं किया गया था। संगठन ने अपने बयान में कहा, "आज इस तथ्य को सार्वजनिक करना इसलिए आवश्यक है, क्योंकि जिस व्यक्ति को पाकिस्तान सरकार ने आतंकवाद के झूठे और निराधार आरोपों के ज़रिए दंडित करने की कोशिश की, उसी व्यक्ति को दुनिया अब शांति, न्याय और मानवाधिकारों के संघर्ष के प्रतीक के रूप में पहचान रही है।" यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब पाकिस्तानी अदालत के फैसले की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक आलोचना हो रही है।
अदालती फैसले का अंतरराष्ट्रीय संदर्भ
पाकिस्तान की आतंकवाद निरोधी अदालत ने महरंग बलोच सहित चार कार्यकर्ताओं को फ्रंटियर कॉर्प्स के एक अधिकारी की हत्या से जुड़े मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई। BYC का आरोप है कि यह मुकदमा मनगढ़ंत एफआईआर और बेबुनियाद आरोपों पर आधारित था। BYC ने कहा कि संगठन के नेताओं के विरुद्ध राज्य की यह कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध और दमन को दर्शाती है।
बलूचिस्तान में मानवाधिकार की स्थिति
BYC के अनुसार, महरंग बलोच और अन्य नेताओं की गिरफ्तारी के बाद बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी, न्यायेतर हत्याओं और सैन्य अभियानों में और तेज़ी आई है। संगठन का दावा है कि इसका सीधा असर आम बलूच नागरिकों के जीवन पर पड़ रहा है। गौरतलब है कि बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप वर्षों से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाए जाते रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय समर्थन और अपील
एक अन्य मानवाधिकार संगठन बलूच वॉयस फॉर जस्टिस (BVJ) ने कहा, "जब पाकिस्तान सरकार राजनीतिक रूप से प्रेरित मुकदमों के ज़रिए उन्हें आजीवन कारावास की सजा दे रही है, तब अंतरराष्ट्रीय समुदाय उनके मानवाधिकारों और न्याय के प्रति शांतिपूर्ण समर्पण को मान्यता दे रहा है।" BYC ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय, मानवाधिकार संगठनों और लोकतांत्रिक ताकतों से बलूचिस्तान की स्थिति पर सक्रिय हस्तक्षेप करने और महरंग बलोच सहित अन्य बलूच नेताओं के मौलिक अधिकारों की रक्षा की अपील की है।
आगे क्या
BVJ ने माँग की है कि यह नामांकन बलूचिस्तान की मानवाधिकार स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक सक्रिय हस्तक्षेप को प्रोत्साहित करे, शांतिपूर्ण गतिविधियों के कारण जेल में बंद लोगों को रिहा किया जाए और दंडमुक्ति की संस्कृति को समाप्त करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएँ। महरंग बलोच का यह दूसरा नोबेल नामांकन बलूचिस्तान के मुद्दे को वैश्विक मंच पर नई धार देने वाला साबित हो सकता है।