सियोल में अमेरिकी दूतावास के बाहर 500 लोगों का प्रदर्शन, दक्षिण कोरिया के मामलों में दखल का आरोप
सारांश
Key Takeaways
सियोल के ग्वांगवामुन इलाके में 2 मई 2026 को एक प्रगतिशील नागरिक समूह 'कैंडललाइट एक्शन' ने अमेरिकी दूतावास के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और अमेरिका पर दक्षिण कोरिया के अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया। पुलिस के मुताबिक, इस रैली में करीब 500 लोग शामिल हुए।
मुख्य घटनाक्रम
प्रदर्शनकारी जोंগগाक स्टेशन से मार्च करते हुए दूतावास के सामने पहुँचे और रैली की। उनके हाथों में तख्तियाँ थीं, जिन पर आरोप लगाया गया था कि अमेरिका दक्षिण कोरिया की संप्रभुता को कमज़ोर कर रहा है। पुलिस ने लाउडस्पीकर से दो बार चेतावनी दी, जिसके बाद प्रदर्शनकारी शांतिपूर्वक हट गए और कोई झड़प नहीं हुई।
प्रदर्शनकारियों के आरोप
योनहाप न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने कई गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि अमेरिका दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग पर इसलिए 'हमला' कर रहा है क्योंकि उन्होंने ईरान के खिलाफ अमेरिकी युद्ध में साथ देने से इनकार किया है और युद्धकालीन ऑपरेशनल कंट्रोल को जल्द वापस लेने की कोशिश कर रहे हैं।
इसके अलावा, प्रदर्शनकारियों ने के-पॉप एंटरटेनमेंट कंपनी हाइब के चेयरमैन बैंग सी-ह्युक पर लगे एग्जिट बैन को हटाने की अमेरिकी अनुरोध की भी आलोचना की। उनका तर्क था कि यह दक्षिण कोरिया के घरेलू न्यायिक मामलों में सीधा हस्तक्षेप है।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका ने उत्तर कोरिया से जुड़ी खुफिया जानकारी साझा करने पर रोक लगा दी है। इसकी वजह यह बताई जा रही है कि एकीकरण मंत्री चुंग डोंग-यंग ने एक अज्ञात उत्तर कोरियाई परमाणु सुविधा से जुड़ी साझा जानकारी को एकतरफा तरीके से सार्वजनिक कर दिया था।
वॉशिंगटन द्वारा मिशेल पार्क स्टील — एक कंज़र्वेटिव और पूर्व रिपब्लिकन सांसद — को दक्षिण कोरिया का नया राजदूत नियुक्त करने के फैसले की भी इस रैली में आलोचना की गई।
कंज़र्वेटिव समूह का अलग प्रदर्शन
उसी दिन कुछ घंटे पहले, करीब 6,000 लोगों ने एक अलग प्रदर्शन किया, जो एक कंज़र्वेटिव समूह से जुड़ा था। इस प्रदर्शन का नेतृत्व कट्टरपंथी पादरी जियोन क्वांग-हून कर रहे थे। इन प्रदर्शनकारियों ने पूर्व राष्ट्रपति यून सुक-योल द्वारा लगाए गए अल्पकालिक मार्शल लॉ को सही ठहराया और कहा कि देश के संकट में नेता को ऐसा कदम उठाने का अधिकार है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण कोरिया में राजनीतिक ध्रुवीकरण चरम पर है। गौरतलब है कि फरवरी 2026 में भी कंज़र्वेटिव और प्रगतिशील समूहों ने अलग-अलग रैलियाँ की थीं, जब एक अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति यून सुक-योल को 2024 में मार्शल लॉ लागू करने की कोशिश के मामले में उम्रकैद की सज़ा सुनाई थी। यह दक्षिण कोरिया में प्रगतिशील और कंज़र्वेटिव खेमों के बीच बढ़ती खाई को दर्शाता है, और अमेरिका-दक्षिण कोरिया संबंधों में तनाव के नए आयाम सामने आ रहे हैं।