17 जुलाई 2026
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दिल्ली जलभराव: पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने छतरपुर का निरीक्षण किया, नया आरसीसी नाला बनाने का फैसला

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दिल्ली जलभराव: पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने छतरपुर का निरीक्षण किया, नया आरसीसी नाला बनाने का फैसला

सारांश

दिल्ली के पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने छतरपुर का दौरा कर डेरा मंडी रोड के बार-बार जलभराव की असली वजह उजागर की — लुप्त हो चुके प्राकृतिक नाले और अनियंत्रित शहरीकरण। अब पीडब्ल्यूडी एक नया प्रीकास्ट आरसीसी नाला बनाएगा, जो इस पुरानी समस्या का स्थायी हल बनने का दावा करता है।

मुख्य बातें

पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने 17 जुलाई को छतरपुर क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया।
डेरा मंडी रोड पर जलभराव की मुख्य वजह प्राकृतिक नाले का लुप्त होना और तीव्र शहरीकरण है।
तत्काल राहत के लिए प्रभावित क्षेत्र में पीटीओ पंप तैनात किए गए हैं।
पीडब्ल्यूडी डेरा मंडी रोड से डेरा भाटी रोड तक नया प्रीकास्ट आरसीसी नाला बनाएगा, जो बांध रोड से एसएसएन मार्ग नाले से जुड़ेगा।
प्रभावित क्षेत्र एमसीडी के अधिकार क्षेत्र में है; दिल्ली सरकार संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय कर रही है।

दिल्ली के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) एवं जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने शुक्रवार, 17 जुलाई को छतरपुर क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया और डेरा मंडी रोड पर बार-बार होने वाले जलभराव की स्थायी निकासी के लिए एक नए प्रीकास्ट आरसीसी नाले के निर्माण की घोषणा की। मंडी गाँव के समीप यह समस्या भारी वर्षा के दौरान गंभीर रूप ले लेती है, जिससे स्थानीय निवासियों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है।

मुख्य घटनाक्रम

भारी बारिश के बाद डेरा मंडी रोड पर पानी भर जाने की सूचना मिलने पर मंत्री प्रवेश साहिब सिंह वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मौके पर पहुँचे। उन्होंने सड़क की स्थिति, जल निकासी नेटवर्क और सीवर व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की। अधिकारियों ने बताया कि यह स्थान भौगोलिक रूप से एक प्राकृतिक निचला इलाका है, जहाँ पहले बारिश का पानी एक प्राकृतिक नाले के ज़रिये हरियाणा की ओर बह जाता था।

तत्काल राहत के लिए प्रभावित क्षेत्र में पीटीओ पंप तैनात किए गए हैं और जमा पानी की निकासी का काम लगातार जारी है। उल्लेखनीय है कि प्रभावित क्षेत्र दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के अधिकार क्षेत्र में आता है।

समस्या की जड़: शहरीकरण और लुप्त जलमार्ग

मंत्री ने बताया कि मंडी गाँव और डेरा गाँव दिल्ली-हरियाणा सीमा पर स्थित हैं। वर्षों पूर्व, जब गुरुग्राम का आज जैसा विस्तार नहीं हुआ था, तब बारिश का पानी प्राकृतिक जल निकासी चैनलों के माध्यम से सहज रूप से बह जाता था। लेकिन व्यापक कंक्रीटीकरण, तीव्र शहरीकरण और जनसंख्या वृद्धि के कारण वे प्राकृतिक जलमार्ग अब लुप्त हो चुके हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली के कई इलाके हर मानसून में जलभराव की पुरानी समस्या झेलते हैं। गौरतलब है कि प्राकृतिक नाले के बंद हो जाने के बाद से भारी वर्षा के दौरान यहाँ बारिश के पानी के साथ-साथ सीवर का पानी भी जमा होने लगा है।

स्थायी समाधान: नया प्रीकास्ट आरसीसी नाला

स्थल के विस्तृत निरीक्षण के बाद यह निर्णय लिया गया कि पीडब्ल्यूडी डेरा मंडी रोड से डेरा भाटी रोड तक एक नया प्रीकास्ट आरसीसी नाला निर्मित करेगा। यह नाला आगे बांध रोड से जुड़ेगा, जहाँ से पानी को दिल्ली के एसएसएन मार्ग नाले में पंप किया जाएगा। यह परियोजना क्षेत्र में स्थायी जल निकासी व्यवस्था स्थापित करने और वर्षा जल प्रबंधन को बेहतर बनाने के उद्देश्य से तैयार की गई है।

सरकार की प्रतिबद्धता

मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि दिल्ली सरकार वैज्ञानिक योजना और टिकाऊ इंजीनियरिंग समाधानों के ज़रिये पुरानी बुनियादी ढाँचागत चुनौतियों से निपटने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया, 'हमारा उद्देश्य केवल हर बार बारिश के बाद पानी निकालना नहीं है, बल्कि ऐसी अवसंरचना का निर्माण करना है जो जलभराव को ही रोके।'

सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि जनसुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए दिल्ली सरकार तत्काल राहत और दीर्घकालिक समाधान सुनिश्चित करने के लिए संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय में काम कर रही है। प्रत्येक संवेदनशील स्थान का आकलन किया जा रहा है और दीर्घकालिक समाधानों को प्राथमिकता के आधार पर लागू किया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इस परियोजना की समयसीमा और जवाबदेही तय होगी या नहीं — क्योंकि दिल्ली में ऐसी घोषणाएँ अक्सर अगले मानसून तक फाइलों में ही रहती हैं। एमसीडी और पीडब्ल्यूडी के बीच अधिकार क्षेत्र की खींचतान भी इस तरह की परियोजनाओं में विलंब का ऐतिहासिक कारण रही है।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डेरा मंडी रोड पर जलभराव की समस्या क्यों होती है?
यह स्थान भौगोलिक रूप से एक प्राकृतिक निचला इलाका है। पहले यहाँ का पानी एक प्राकृतिक नाले से हरियाणा की ओर बह जाता था, लेकिन शहरीकरण के कारण वह नाला लुप्त हो गया। अब भारी बारिश में पानी के साथ सीवर का पानी भी यहाँ जमा हो जाता है।
पीडब्ल्यूडी मंत्री ने जलभराव के लिए क्या स्थायी समाधान घोषित किया?
पीडब्ल्यूडी डेरा मंडी रोड से डेरा भाटी रोड तक एक नया प्रीकास्ट आरसीसी नाला बनाएगा, जो बांध रोड से जुड़कर पानी को दिल्ली के एसएसएन मार्ग नाले में पंप करेगा। यह परियोजना क्षेत्र में स्थायी जल निकासी व्यवस्था स्थापित करने के लिए बनाई गई है।
तत्काल राहत के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
प्रभावित क्षेत्र से जमा पानी निकालने के लिए पीटीओ पंप तैनात किए गए हैं और वे लगातार काम कर रहे हैं। दिल्ली सरकार संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय कर तत्काल राहत और दीर्घकालिक समाधान दोनों पर काम कर रही है।
क्या यह क्षेत्र दिल्ली सरकार के अधीन है?
प्रभावित क्षेत्र दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के अधिकार क्षेत्र में आता है। हालाँकि, पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने स्पष्ट किया कि दिल्ली सरकार जनसुविधा को प्राथमिकता देते हुए एमसीडी सहित सभी संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रही है।
दिल्ली-हरियाणा सीमा पर जलभराव की समस्या का ऐतिहासिक कारण क्या है?
मंडी गाँव और डेरा गाँव दिल्ली-हरियाणा सीमा पर स्थित हैं। गुरुग्राम के विस्तार से पहले बारिश का पानी प्राकृतिक जल निकासी चैनलों से बह जाता था। व्यापक कंक्रीटीकरण और शहरीकरण ने उन प्राकृतिक जलमार्गों को नष्ट कर दिया, जिससे यह समस्या उत्पन्न हुई।
राष्ट्र प्रेस
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