पश्चिम एशिया संघर्ष में 14 भारतीय नाविकों की मौत, 2 लापता; स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर तैनाती रोकी
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्रालय (MEA) ने शुक्रवार, 17 जुलाई 2026 को पुष्टि की कि पश्चिम एशिया में जारी सशस्त्र संघर्ष के चलते अब तक 14 भारतीय नाविकों की जान जा चुकी है, जबकि 2 भारतीय नाविक अभी भी लापता हैं। यह जानकारी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नई दिल्ली में अपनी नियमित प्रेस ब्रीफिंग के दौरान दी।
मुख्य घटनाक्रम
डायरेक्टरेट जनरल ऑफ मैरीटाइम एडमिनिस्ट्रेशन (DGMA) ने जहाज मालिकों, जहाज प्रबंधन कंपनियों और रिक्रूटमेंट एंड प्लेसमेंट सर्विस लाइसेंस (RPSL) कंपनियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि अगली सूचना तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले किसी भी जहाज पर भारतीय नाविकों की तैनाती न की जाए। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग द्वारा जारी एडवाइजरी का हवाला देते हुए जायसवाल ने कहा कि यह कदम क्षेत्र में बढ़ते सुरक्षा खतरे को देखते हुए उठाया गया है।
प्रवक्ता जायसवाल ने ब्रीफिंग में कहा, 'पश्चिम एशिया की स्थिति अभी भी अस्थिर बनी हुई है, और इसी को ध्यान में रखते हुए यह सलाह जारी की गई है। इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में भारतीय नाविक काम करते हैं, और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारी जिम्मेदारी है। अब तक 14 भारतीयों की जान जा चुकी है और दो भारतीय अभी भी लापता हैं।'
कौन से जहाज निशाने पर रहे
DGMA के अनुसार, हाल के हफ्तों में मोम्बासा बी, अल बह्या, जीएफएस गैलेक्सी, एमटी वेड्यान और अल रेकाय्यत जैसे व्यापारिक जहाजों पर हमले हुए हैं, जिसके बाद इस क्षेत्र में काम करने वाले नाविकों और जहाजों के लिए खतरा काफी बढ़ गया है। समुद्री नियामक ने अपने आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह निर्देश भारतीय नाविकों की सुरक्षा, बचाव और समग्र भलाई को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए जारी किया गया है।
व्यापक क्षेत्रीय संदर्भ
यह सलाह ऐसे समय में आई है जब मध्य पूर्व में तनाव अपने चरम पर है। अमेरिका द्वारा ईरान के सैन्य ठिकानों पर किए गए हमलों के बाद पूरे क्षेत्र में बड़े सशस्त्र संघर्ष की आशंका और गहरी हो गई है। गौरतलब है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अत्यंत संवेदनशील समुद्री मार्ग है, और इस रास्ते पर किसी भी व्यवधान का असर भारत सहित दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की ऊर्जा सुरक्षा पर सीधे पड़ सकता है।
मंगलवार को भारत ने एक बार फिर दोहराया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नौवहन सुरक्षित और निर्बाध रूप से जारी रहना चाहिए। भारत का मानना है कि इस महत्वपूर्ण समुद्री गलियारे से व्यापार का सुचारु संचालन वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए अपरिहार्य है।
सरकार की प्रतिक्रिया और कूटनीतिक रुख
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि भारत सरकार पश्चिम एशिया की स्थिति पर निरंतर नज़र बनाए हुए है। भारत ने सभी पक्षों से तनाव कम करने और बातचीत व कूटनीति के जरिए समाधान निकालने की अपील की है, ताकि क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता सुनिश्चित हो सके। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय नाविकों की एक बड़ी संख्या खाड़ी देशों के जहाजों पर कार्यरत है और उनके परिवार देश में उनकी सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता में हैं।
आम जनता और नाविक परिवारों पर असर
भारत दुनिया के सबसे बड़े नाविक-आपूर्तिकर्ता देशों में से एक है, और पश्चिम एशिया के व्यापारिक मार्गों पर हज़ारों भारतीय नाविक तैनात हैं। DGMA की नई एडवाइजरी के बाद कई जहाज कंपनियों को अपने परिचालन में बदलाव करना पड़ सकता है, जिसका असर समुद्री रोजगार बाज़ार पर भी पड़ने की आशंका है। आने वाले दिनों में सरकार से यह स्पष्ट करने की माँग बढ़ सकती है कि लापता दो नाविकों की तलाश के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।