हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज का दावा गलत — बृज भूषण शरण सिंह ने योगी के बयान को नकारा
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व सांसद बृज भूषण शरण सिंह ने 17 जुलाई 2026 को गोंडा में पत्रकारों से बातचीत के दौरान स्पष्ट किया कि हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर कभी नमाज नहीं पढ़ी गई। यह बयान उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस दावे के संदर्भ में दिया, जिसमें योगी ने 2003 की एक घटना का हवाला देते हुए विपक्षी दलों पर आरोप लगाया था कि उन्होंने हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज की अनुमति दी थी।
बृज भूषण का खंडन
बृज भूषण शरण सिंह ने कहा, 'मैं किसी के बयान पर टिप्पणी नहीं करना चाहता, लेकिन हनुमानगढ़ी पर नमाज नहीं पढ़ी गई — यह बात गलत है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि जो लोग इस दावे को दोहराते हैं, उन्हें यह जानकारी होनी चाहिए कि हनुमानगढ़ी मंदिर का निर्माण बाराबंकी के एक मुसलमान ने करवाया था, जिनका नाम आज भी वहाँ के एक पत्थर पर अंकित है।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब हनुमानगढ़ी को लेकर विवादास्पद दावे सामने आए हों। अयोध्या स्थित यह मंदिर ऐतिहासिक रूप से संवेदनशील रहा है और राजनीतिक बयानबाजी का केंद्र बनता रहा है। बृज भूषण का यह खंडन इस मायने में उल्लेखनीय है कि वे स्वयं BJP के वरिष्ठ नेता हैं और अपनी ही पार्टी के मुख्यमंत्री के बयान को सार्वजनिक रूप से गलत ठहरा रहे हैं।
रामपुर बुलडोजर कार्रवाई पर प्रतिक्रिया
रामपुर में जारी बुलडोजर कार्रवाई पर बृज भूषण ने कहा कि उन्हें इस मामले की आंशिक जानकारी है। उन्होंने कहा कि कई इमारतों को अवैध बताया जा रहा है और जो अवैध हैं, उन्हें तोड़ा जा रहा होगा। उन्होंने इस विषय पर आगे कोई विस्तृत टिप्पणी करने से परहेज किया।
भगवान कृष्ण विवाद पर संयमित जवाब
भगवान कृष्ण को 'पाँच वक्त का नमाजी' बताए जाने वाले विवादास्पद बयान पर पूर्व सांसद ने कहा कि इस समय एक ऐसी प्रवृत्ति चल पड़ी है जिसमें एक-दूसरे को आहत करने वाली बातें कही जाती हैं। उन्होंने कहा, 'ऐसे व्यक्तियों के बारे में बोलना उचित नहीं है — यह उनकी मानसिकता है।' उनका यह संयमित रुख उल्लेखनीय है, क्योंकि इस विषय पर भाजपा के कई नेता तीखी प्रतिक्रिया दे चुके हैं।
सोनम वांगचुक के अनशन पर बयान
पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन और 'कॉकरोच प्रोटेस्ट' पर बृज भूषण ने कहा कि उनकी बात पूरे देश तक पहुँच चुकी है और सरकार के संज्ञान में भी यह मामला आ गया है। उन्होंने वांगचुक से अपील की कि वे धरना समाप्त करें और सरकार की कार्रवाई की प्रतीक्षा करें।
राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में धार्मिक और राजनीतिक बयानों की आवृत्ति बढ़ी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का 2003 की घटना का संदर्भ देना और उस पर BJP के ही एक वरिष्ठ नेता का सार्वजनिक खंडन — दोनों मिलकर पार्टी के भीतर बयानों की असंगति को उजागर करते हैं। आगामी दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि BJP इस आंतरिक असहमति को किस प्रकार संभालती है।