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ईरान का दावा: कुवैत में ड्रोन हमलों से दो अमेरिकी सैन्य ठिकाने तबाह, ऑपरेशन 'सैकेह' का 16वाँ चरण

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ईरान का दावा: कुवैत में ड्रोन हमलों से दो अमेरिकी सैन्य ठिकाने तबाह, ऑपरेशन 'सैकेह' का 16वाँ चरण

सारांश

ईरानी सेना ने दावा किया है कि उसने कुवैत में अमेरिका के दो अहम सैन्य ठिकानों — कैंप उदैरी और अली अल सलेम एयरबेस — पर ड्रोन हमले किए। यह ऑपरेशन 'सैकेह' का 16वाँ चरण है और अमेरिका द्वारा ईरान के डार्कहोविन न्यूक्लियर साइट पर हमले के बाद की जवाबी कार्रवाई बताई जा रही है।

मुख्य बातें

ईरानी सेना ने दावा किया कि ऑपरेशन 'सैकेह (लाइटनिंग)' के 16वें चरण में कुवैत स्थित अमेरिका के दो सैन्य ठिकानों पर ड्रोन हमले किए गए।
निशाने पर कैंप उदैरी का गोला-बारूद भंडार और अली अल सलेम एयरबेस का पैट्रियट रडार सिस्टम शामिल हैं।
कैंप उदैरी ईरान की सीमा से लगभग 104 किलोमीटर दूर स्थित एक प्रमुख अमेरिकी लॉजिस्टिक्स केंद्र है।
इससे पहले अमेरिका ने कथित तौर पर ईरान के खुजेस्तान प्रांत में डार्कहोविन न्यूक्लियर पावर प्लांट पर हमला किया था — स्थानीय समय सुबह 3:39 बजे ।
ईरान के AEOI ने हमले को 'आक्रामक और क्रूर' बताया; किसी हताहत की पुष्टि नहीं की।
ईरानी दावों की अमेरिका या कुवैत की ओर से अभी तक स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

ईरानी सेना ने 19 जुलाई 2026 को दावा किया कि उसने ऑपरेशन 'सैकेह (लाइटनिंग)' के 16वें चरण के तहत कुवैत में तैनात अमेरिका के दो प्रमुख सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले किए। ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी 'फार्स न्यूज' के हवाले से सेना ने कहा कि यह कार्रवाई अमेरिका की ओर से ईरान पर बार-बार किए गए घातक हमलों का जवाब है।

कौन-से ठिकाने बने निशाना

ईरानी सेना के अनुसार, हमलों में कैंप उदैरी स्थित अमेरिकी गोला-बारूद भंडार को निशाना बनाया गया। इसके अतिरिक्त अली अल सलेम एयरबेस पर तैनात पैट्रियट मिसाइल रक्षा रडार सिस्टम और एक हवाई निगरानी रडार पर भी हमला किया गया। यह दोनों दावे ईरानी सेना की ओर से किए गए हैं; अमेरिका या कुवैत की ओर से इनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी तक उपलब्ध नहीं है।

इन ठिकानों का सामरिक महत्व

कैंप उदैरी ईरान की सीमा से लगभग 104 किलोमीटर दूर स्थित है और अमेरिका का एक प्रमुख सैन्य लॉजिस्टिक्स एवं फोर्स सपोर्ट केंद्र माना जाता है। वहीं, अली अल सलेम एयर बेस पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैनिकों की तैनाती के मुख्य प्रवेश द्वारों में से एक है और अमेरिकी सैन्य विमानों के लिए एक अहम एयरलिफ्ट केंद्र के रूप में जाना जाता है।

ईरान का पक्ष: नागरिक ढाँचे पर हमलों का आरोप

ईरानी सेना का दावा है कि अमेरिका ने ईरान पर किए गए हमलों में आम नागरिकों की जान ली और पुलों, बुनियादी ढाँचे तथा अन्य गैर-सैन्य ठिकानों को भी क्षति पहुँचाई। सेना ने इन्हीं हमलों को अपनी कार्रवाई का आधार बताया है। गौरतलब है कि इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

डार्कहोविन न्यूक्लियर साइट पर पहले हुआ था हमला

ईरानी हमलों से पहले, रविवार की सुबह अमेरिका ने कथित तौर पर ईरान के खुजेस्तान प्रांत में निर्माणाधीन डार्कहोविन न्यूक्लियर पावर प्लांट की साइट पर प्रोजेक्टाइल से हमला किया। ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन (AEOI) ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी बयान में बताया कि यह हमला स्थानीय समय के अनुसार सुबह 3:39 बजे (GMT 24:09) हुआ। संगठन ने इसे 'आक्रामक और क्रूर कार्रवाई' बताते हुए कहा कि यह ईरान की राष्ट्रीय संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है। हालाँकि, संगठन ने किसी हताहत या भौतिक नुकसान का ब्यौरा नहीं दिया।

आगे क्या

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान तनाव अपने चरम पर है। दोनों पक्षों के बीच जवाबी हमलों का यह सिलसिला क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया और कूटनीतिक हस्तक्षेप की संभावनाओं पर अब सबकी नज़रें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

न अमेरिका ने। लेकिन यह पैटर्न खतरनाक है: दोनों पक्ष एक-दूसरे की कार्रवाइयों को 'जवाब' बताकर एस्केलेशन की सीढ़ी चढ़ते जा रहे हैं, जिसमें सत्यापन की कोई स्वतंत्र कड़ी नहीं है। डार्कहोविन जैसे परमाणु ढाँचे पर हमले का आरोप — चाहे सिद्ध हो या न हो — अंतरराष्ट्रीय परमाणु कानून की सीमाओं को परखता है। असली सवाल यह है कि इस 'ऑपरेशन सैकेह' के 16 चरण बिना किसी व्यापक अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप के कैसे पूरे हो गए — और 17वाँ चरण कहाँ तक जाएगा।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ऑपरेशन 'सैकेह' क्या है?
ऑपरेशन 'सैकेह (लाइटनिंग)' ईरानी सेना का एक सैन्य अभियान है जिसके तहत अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमलों की घोषणा की जा रही है। 19 जुलाई 2026 को इसका 16वाँ चरण बताया गया, जिसमें कुवैत स्थित दो अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया गया।
कुवैत में किन अमेरिकी ठिकानों पर हमले का दावा किया गया?
ईरानी सेना ने कैंप उदैरी के गोला-बारूद भंडार और अली अल सलेम एयरबेस के पैट्रियट मिसाइल रक्षा रडार सिस्टम तथा एक हवाई निगरानी रडार पर हमले का दावा किया है। ये दोनों ठिकाने पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति के अहम केंद्र माने जाते हैं।
डार्कहोविन न्यूक्लियर पावर प्लांट पर हमला कब और कैसे हुआ?
ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन (AEOI) के अनुसार, यह हमला रविवार को स्थानीय समय सुबह 3:39 बजे (GMT 24:09) हुआ। खुजेस्तान प्रांत में निर्माणाधीन इस परमाणु साइट पर प्रोजेक्टाइल से हमला किया गया; हालाँकि AEOI ने किसी हताहत या नुकसान की पुष्टि नहीं की।
क्या ईरान के इन दावों की पुष्टि हुई है?
नहीं। ईरानी सेना के ये दावे अभी तक केवल 'फार्स न्यूज' जैसी अर्ध-सरकारी एजेंसी के माध्यम से सामने आए हैं। अमेरिका और कुवैत की ओर से इन हमलों की कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
इन हमलों से पश्चिम एशिया की स्थिति पर क्या असर पड़ सकता है?
अमेरिका-ईरान के बीच जवाबी हमलों का यह सिलसिला क्षेत्रीय तनाव को और गहरा कर सकता है। परमाणु ढाँचे पर हमले के आरोप और कुवैत जैसे तीसरे देश में सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने के दावे व्यापक संघर्ष की आशंका को बढ़ाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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