कुवैत के हवाई क्षेत्र में घुसे ईरानी ड्रोन मार गिराए, अली अल सलेम एयर बेस पर हमले का दावा
सारांश
मुख्य बातें
कुवैत की सशस्त्र सेना ने शुक्रवार, 31 जुलाई 2026 को घोषणा की कि उसने कुवैत के हवाई क्षेत्र में घुसे कई 'दुश्मन ड्रोन' को सुबह से ही पहचानकर मार गिराया। सेना के अनुसार ये ड्रोन देश के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने के इरादे से भेजे गए थे, और ड्रोन के मलबे के गिरने से कुछ स्थानों पर संपत्ति को नुकसान पहुंचा, हालांकि किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। कुवैती सेना ने इन हमलों के लिए ईरान को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है।
मुख्य घटनाक्रम
कुवैत की सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा कि शुक्रवार की सुबह से हवाई क्षेत्र में घुसे दुश्मन ड्रोनों को वायु रक्षा प्रणाली द्वारा नष्ट किया गया। सेना ने यह स्पष्ट नहीं किया कि कुल कितने ड्रोन मार गिराए गए, किन विशेष ठिकानों को निशाना बनाया गया था, या संपत्ति का नुकसान कितना हुआ।
इससे एक दिन पहले, गुरुवार को हुए कथित ईरानी हमले में उत्तरी कुवैत में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। कुवैत की सशस्त्र सेना और कुवैत स्थित चीनी दूतावास के अनुसार, मारा गया व्यक्ति एक नेपाली ड्राइवर था, जो इलाके में काम कर रही एक चीनी कंपनी के सब-कॉन्ट्रैक्टर के लिए काम करता था। दूतावास ने पुष्टि की कि इस हमले में कोई चीनी नागरिक हताहत नहीं हुआ, हालांकि कंपनी की संपत्ति को नुकसान पहुंचा।
आईआरजीसी का दावा
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने गुरुवार को दावा किया कि उसके लड़ाकों ने कुवैत स्थित अमेरिकी अली अल सलेम एयर बेस पर हमला किया। ईरानी समाचार एजेंसी के हवाले से बताया गया कि इस हमले में दो ड्रोन हैंगर और विमानों तथा सैन्य हेलिकॉप्टरों के लिए उपयोग होने वाला एक ईंधन टैंक आग लगने से नष्ट हो गया।
आईआरजीसी का यह भी कहना है कि हमले में बेस पर मौजूद अमेरिकी सैनिकों से जुड़ी सुविधाओं को नुकसान पहुंचा और कुछ लोग हताहत हुए — हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है। पिछले हफ्ते भी आईआरजीसी ने दावा किया था कि उसकी सेना ने अली अल सलेम एयर बेस पर मौजूद अमेरिका के एक 'बहुत बड़े' गोला-बारूद भंडार को उन्नत और भारी कामिकेज ड्रोन से पूरी तरह नष्ट कर दिया था।
क्षेत्रीय तनाव की पृष्ठभूमि
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब कुछ दिनों की सापेक्षिक शांति के बाद अमेरिका और ईरान के बीच हवाई हमलों का नया दौर शुरू हो गया है। गौरतलब है कि इसी समय लाल सागर क्षेत्र में यमन के हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब से जुड़ा एक नया मोर्चा भी सक्रिय हो गया है, जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति और अधिक जटिल हो गई है।
यह पहली बार नहीं है कि कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया हो — पिछले कुछ हफ्तों में अली अल सलेम एयर बेस पर कई बार हमले के दावे किए जा चुके हैं, जो इस संघर्ष के भौगोलिक विस्तार को दर्शाता है।
आम जनता और संपत्ति पर असर
कुवैती सेना ने पुष्टि की कि ड्रोन के मलबे के गिरने से कुछ स्थानों पर संपत्ति को नुकसान हुआ, लेकिन कोई नागरिक हताहत नहीं हुआ। गुरुवार के हमले में एक नेपाली नागरिक की मौत हो गई थी — यह तथ्य इस बात को रेखांकित करता है कि इस संघर्ष की आंच अब तीसरे देशों के नागरिकों तक भी पहुंच रही है।
क्या होगा आगे
कुवैती सेना ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह इन हमलों के जवाब में क्या कदम उठाएगी। अमेरिकी सेना की ओर से भी अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। क्षेत्रीय विश्लेषकों के अनुसार, यदि ये हमले जारी रहे तो खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति और उनकी सुरक्षा व्यवस्था पर नए सिरे से विचार करना पड़ सकता है।