ईरानी हमले के बाद कुवैत में आग: कई दमकलकर्मी घायल, बिजली-जल संयंत्र निशाने पर
सारांश
मुख्य बातें
कुवैत में 18 जुलाई 2026 को ईरान की ओर से किए गए कथित मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद भड़की आग बुझाने के दौरान कई दमकलकर्मी और एक नागरिक कर्मचारी घायल हो गए। कुवैत फायर फोर्स ने अपने आधिकारिक बयान में इसकी पुष्टि की और बताया कि राहत एवं बचाव अभियान अभी भी जारी है।
मुख्य घटनाक्रम
कुवैत फायर फोर्स के एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जारी बयान के अनुसार, आग की दो अलग-अलग घटनाओं से निपटने के लिए दमकल दल तैनात किए गए। पहले घटनास्थल पर पाँच दमकल दल और दूसरे घटनास्थल पर तीन दमकल दल भेजे गए। पहले स्थान पर राहत अभियान के दौरान कुछ कर्मी घायल हुए, जिन्हें तत्काल अस्पताल भेजा गया।
फायर फोर्स ने अभी तक घायलों की स्थिति की गंभीरता और दोनों घटनास्थलों की पहचान सार्वजनिक नहीं की है।
बिजली और जल संयंत्र पर हमला
कुवैत के बिजली, जल और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने पुष्टि की कि एक बिजली उत्पादन एवं जल डिसेलिनेशन संयंत्र पर हमले के बाद आग लग गई। सुरक्षा कारणों से संयंत्र की कुछ उत्पादन इकाइयों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा। मंत्रालय ने कहा कि आपातकालीन योजनाएं सक्रिय कर दी गई हैं और बिजली एवं जल आपूर्ति की निरंतर निगरानी की जा रही है।
वायु रक्षा और हवाई यातायात पर असर
कुवैती अधिकारियों के अनुसार, शनिवार तड़के हुए हमलों के दौरान कुवैत की वायु रक्षा प्रणाली ने कई मिसाइलों और ड्रोन को सफलतापूर्वक रोका। हमलों के बाद कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उड़ानें अस्थायी रूप से प्रभावित हुईं। कुवैत एयरवेज ने यात्रियों को सूचित किया कि सुरक्षा कारणों से कई उड़ानों को पुनर्निर्धारित किया गया है।
व्यापक क्षेत्रीय तनाव की पृष्ठभूमि
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अपने चरम पर है। अमेरिका ने लगातार सातवीं रात ईरान पर हमले किए। जवाबी कार्रवाई में तेहरान ने कथित तौर पर खाड़ी देशों और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन हमलों का दावा किया है। गौरतलब है कि कुवैत में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति दशकों से बनी हुई है, जो इसे इस क्षेत्रीय संघर्ष में संभावित निशाना बनाती है।
आगे क्या होगा
कुवैती अधिकारियों ने कहा कि आग बुझाने का अभियान जारी है और आगे की जानकारी बाद में साझा की जाएगी। बिजली और जल आपूर्ति पर दीर्घकालिक प्रभाव का आकलन किया जा रहा है। क्षेत्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका-ईरान तनाव के थमने तक खाड़ी देशों में ऐसी घटनाओं का खतरा बना रहेगा।