ईरानी हमले में कुवैत के सैन्य ठिकाने और डीसैलिनेशन प्लांट क्षतिग्रस्त, कई जवान घायल
सारांश
मुख्य बातें
कुवैत के अधिकारियों ने शुक्रवार, 17 जुलाई को पुष्टि की कि ईरान के ड्रोन हमलों में कुवैत सेना के कई जवान घायल हो गए और देश के एक बिजली उत्पादन एवं समुद्री जल डीसैलिनेशन प्लांट को गंभीर नुकसान पहुँचा। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब ईरान-अमेरिका के बीच तनाव चरम पर है और खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ती जा रही है।
सैन्य ठिकानों पर ड्रोन हमले
कुवैत की सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी कि दुश्मन के ड्रोनों ने शुक्रवार सुबह सेना से जुड़े कई ठिकानों और कैंपों को निशाना बनाया, जिसमें अनेक जवान घायल हुए। घायलों की सटीक संख्या अभी तक आधिकारिक रूप से नहीं बताई गई है।
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने अपने बयान में दावा किया कि यह हमले 'ऑपरेशन नस्र-2' की 11वीं, 12वीं और 13वीं लहर के तहत किए गए। आईआरजीसी के जनसंपर्क विभाग के अनुसार, कुवैत में अमेरिकी बलों के एक ठिकाने पर मौजूद मिसाइल रक्षा निगरानी रडार, कई हथियारों के गोदाम, दो 'हिमर्स' लॉन्चर और कई मिसाइलों को निशाना बनाया गया, जिसके बाद वहाँ बड़ी आग भड़क उठी।
डीसैलिनेशन प्लांट में आग, मरम्मत जारी
कुवैत के बिजली, पानी और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने एक्स पर पोस्ट कर बताया कि ईरानी हमले में देश के एक बिजली उत्पादन और जल डीसैलिनेशन प्लांट में आग लग गई और उसे काफी नुकसान पहुँचा। मंत्रालय ने बताया कि दमकल टीमों ने आग पर काबू पा लिया है और तकनीकी दल क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत में जुटे हैं ताकि प्लांट को शीघ्र पुनः चालू किया जा सके।
मंत्रालय ने नागरिकों से अपील की कि इस 'असाधारण स्थिति' के दौरान बिजली की अधिकतम बचत करें।
कुवैत का कड़ा विरोध
कुवैत के विदेश मंत्रालय ने इन हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की। मंत्रालय ने कहा कि ये हमले कुवैत की संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन हैं। उसने चेतावनी दी कि इस तरह की कार्रवाइयाँ पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव को और भड़का सकती हैं। कुवैत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसे अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने का पूर्ण अधिकार है।
ऑपरेशन नस्र-2 और व्यापक संदर्भ
आईआरजीसी के बयान के अनुसार, 11वीं लहर ईरान के ईरानशहर के बंपुर इलाके में मारे गए सैनिकों की याद में की गई, जिसमें सीरिया के अल-तनफ क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज के कमांड सेंटर पर हमला किया गया। इसके अलावा, ओमान में रडार ठिकानों को भी निशाना बनाया गया।
गौरतलब है कि जून के मध्य में अमेरिका और ईरान के बीच एक शांति समझौता (एमओयू) हुआ था, जिसके तहत दोनों देशों को 60 दिनों के भीतर बातचीत कर अंतिम समझौते की दिशा में कदम उठाने थे। इन ताज़ा हमलों ने उस समझौते की व्यवहार्यता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आगे क्या होगा
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया का इंतज़ार है। कुवैत की ओर से आगे की कूटनीतिक या सैन्य कार्रवाई के संकेत अभी स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन विदेश मंत्रालय के बयान से संकेत मिलता है कि कुवैत निष्क्रिय नहीं रहेगा।