18 जुलाई 2026
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ईरानी हमले में कुवैत के सैन्य ठिकाने और डीसैलिनेशन प्लांट क्षतिग्रस्त, कई जवान घायल

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ईरानी हमले में कुवैत के सैन्य ठिकाने और डीसैलिनेशन प्लांट क्षतिग्रस्त, कई जवान घायल

सारांश

ईरान के ड्रोन हमलों ने खाड़ी को हिला दिया — कुवैत के सैन्य कैंप और डीसैलिनेशन प्लांट निशाने पर आए, कई जवान घायल हुए। आईआरजीसी ने इसे 'ऑपरेशन नस्र-2' का हिस्सा बताया। अमेरिका-ईरान शांति समझौते के महज़ हफ्तों बाद यह हमला उस समझौते की नींव को हिला रहा है।

मुख्य बातें

कुवैत सेना के कई जवान 17 जुलाई को ईरानी ड्रोन हमलों में घायल हुए; कई सैन्य ठिकानों और कैंपों को निशाना बनाया गया।
बिजली उत्पादन और जल डीसैलिनेशन प्लांट में आग लगी, भारी नुकसान; दमकल टीमों ने आग पर काबू पाया, मरम्मत जारी।
आईआरजीसी ने हमलों को 'ऑपरेशन नस्र-2' की 11वीं, 12वीं और 13वीं लहर बताया; सीरिया और ओमान में भी अमेरिकी ठिकानों पर हमले का दावा।
कुवैत के विदेश मंत्रालय ने हमलों को संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताकर कड़ी निंदा की।
ईरान-अमेरिका के बीच जून मध्य में हुए शांति एमओयू के तहत 60 दिनों में बातचीत की शर्त थी; ये हमले उस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हैं।

कुवैत के अधिकारियों ने शुक्रवार, 17 जुलाई को पुष्टि की कि ईरान के ड्रोन हमलों में कुवैत सेना के कई जवान घायल हो गए और देश के एक बिजली उत्पादन एवं समुद्री जल डीसैलिनेशन प्लांट को गंभीर नुकसान पहुँचा। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब ईरान-अमेरिका के बीच तनाव चरम पर है और खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ती जा रही है।

सैन्य ठिकानों पर ड्रोन हमले

कुवैत की सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी कि दुश्मन के ड्रोनों ने शुक्रवार सुबह सेना से जुड़े कई ठिकानों और कैंपों को निशाना बनाया, जिसमें अनेक जवान घायल हुए। घायलों की सटीक संख्या अभी तक आधिकारिक रूप से नहीं बताई गई है।

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने अपने बयान में दावा किया कि यह हमले 'ऑपरेशन नस्र-2' की 11वीं, 12वीं और 13वीं लहर के तहत किए गए। आईआरजीसी के जनसंपर्क विभाग के अनुसार, कुवैत में अमेरिकी बलों के एक ठिकाने पर मौजूद मिसाइल रक्षा निगरानी रडार, कई हथियारों के गोदाम, दो 'हिमर्स' लॉन्चर और कई मिसाइलों को निशाना बनाया गया, जिसके बाद वहाँ बड़ी आग भड़क उठी।

डीसैलिनेशन प्लांट में आग, मरम्मत जारी

कुवैत के बिजली, पानी और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने एक्स पर पोस्ट कर बताया कि ईरानी हमले में देश के एक बिजली उत्पादन और जल डीसैलिनेशन प्लांट में आग लग गई और उसे काफी नुकसान पहुँचा। मंत्रालय ने बताया कि दमकल टीमों ने आग पर काबू पा लिया है और तकनीकी दल क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत में जुटे हैं ताकि प्लांट को शीघ्र पुनः चालू किया जा सके।

मंत्रालय ने नागरिकों से अपील की कि इस 'असाधारण स्थिति' के दौरान बिजली की अधिकतम बचत करें।

कुवैत का कड़ा विरोध

कुवैत के विदेश मंत्रालय ने इन हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की। मंत्रालय ने कहा कि ये हमले कुवैत की संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन हैं। उसने चेतावनी दी कि इस तरह की कार्रवाइयाँ पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव को और भड़का सकती हैं। कुवैत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसे अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने का पूर्ण अधिकार है।

ऑपरेशन नस्र-2 और व्यापक संदर्भ

आईआरजीसी के बयान के अनुसार, 11वीं लहर ईरान के ईरानशहर के बंपुर इलाके में मारे गए सैनिकों की याद में की गई, जिसमें सीरिया के अल-तनफ क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज के कमांड सेंटर पर हमला किया गया। इसके अलावा, ओमान में रडार ठिकानों को भी निशाना बनाया गया।

गौरतलब है कि जून के मध्य में अमेरिका और ईरान के बीच एक शांति समझौता (एमओयू) हुआ था, जिसके तहत दोनों देशों को 60 दिनों के भीतर बातचीत कर अंतिम समझौते की दिशा में कदम उठाने थे। इन ताज़ा हमलों ने उस समझौते की व्यवहार्यता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

आगे क्या होगा

खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया का इंतज़ार है। कुवैत की ओर से आगे की कूटनीतिक या सैन्य कार्रवाई के संकेत अभी स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन विदेश मंत्रालय के बयान से संकेत मिलता है कि कुवैत निष्क्रिय नहीं रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि ईरान का एक सुविचारित संदेश है — कि खाड़ी में अमेरिकी मौजूदगी की कीमत उसके सहयोगी देश चुकाएँगे। जून में हुए शांति एमओयू के बावजूद 'ऑपरेशन नस्र-2' का जारी रहना यह दर्शाता है कि तेहरान कूटनीति और सैन्य दबाव को एक साथ चला रहा है। डीसैलिनेशन प्लांट को निशाना बनाना विशेष रूप से चिंताजनक है — पानी की कमी से जूझते खाड़ी देशों में ऐसे बुनियादी ढाँचे पर हमला नागरिक जीवन को सीधे प्रभावित करता है। अब सवाल यह है कि क्या अमेरिका अपने खाड़ी सहयोगियों की रक्षा के लिए शांति वार्ता को जोखिम में डालेगा।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईरान ने कुवैत पर हमला क्यों किया?
आईआरजीसी के अनुसार, ये हमले 'ऑपरेशन नस्र-2' के तहत जवाबी कार्रवाई के रूप में किए गए, जिसमें कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। ईरान ने इसे अपने सैनिकों की मौत का बदला बताया।
कुवैत के डीसैलिनेशन प्लांट को कितना नुकसान हुआ?
कुवैत के बिजली, पानी और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, प्लांट में आग लग गई और उसे 'काफी नुकसान' पहुँचा। दमकल टीमों ने आग बुझा दी है और तकनीकी दल मरम्मत में जुटे हैं।
ऑपरेशन नस्र-2 क्या है?
यह ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) का एक सैन्य अभियान है, जिसके तहत क्रमबद्ध हमलों की लहरें चलाई जा रही हैं। 17 जुलाई को इसकी 11वीं, 12वीं और 13वीं लहर के तहत कुवैत, सीरिया और ओमान में अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए गए।
कुवैत ने इन हमलों पर क्या रुख अपनाया है?
कुवैत के विदेश मंत्रालय ने हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इन्हें संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया। कुवैत ने चेतावनी दी कि ऐसे हमले पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ा सकते हैं और अपनी सुरक्षा के अधिकार पर जोर दिया।
ईरान-अमेरिका शांति समझौते का क्या हुआ?
जून मध्य में दोनों देशों के बीच एक शांति एमओयू हुआ था, जिसके तहत 60 दिनों में अंतिम समझौते की दिशा में बातचीत होनी थी। इन ताज़ा हमलों ने उस प्रक्रिया की व्यवहार्यता पर गंभीर सवाल उठा दिए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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