19 जुलाई 2026
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राजस्थान में एनसीबी की जेसीसी बैठक: ड्रग तस्करी के खिलाफ 10 एजेंसियों ने मिलाया हाथ

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राजस्थान में एनसीबी की जेसीसी बैठक: ड्रग तस्करी के खिलाफ 10 एजेंसियों ने मिलाया हाथ

सारांश

राजस्थान में ड्रग तस्करी के खिलाफ एनसीबी ने जयपुर में जेसीसी की बैठक बुलाई, जिसमें एनआईए, डीआरआई, आईबी समेत 10 से अधिक एजेंसियों ने एनडीपीएस के 50 चिन्हित मामलों की समीक्षा की और संगठित ड्रग नेटवर्क को तोड़ने के लिए इंटेलिजेंस-आधारित संयुक्त अभियान की रणनीति तय की।

मुख्य बातें

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने 19 जुलाई को जयपुर में राज्य-स्तरीय जेसीसी बैठक बुलाई।
बैठक की संयुक्त अध्यक्षता एनसीबी के डिप्टी डायरेक्टर जनरल (पश्चिमी क्षेत्र) और एएनटीएफ के इंस्पेक्टर जनरल ने की।
एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज 50 चिन्हित मामलों की समीक्षा और शीघ्र निपटारे पर बल दिया गया।
एनआईए, डीआरआई, सीबीआईसी, आईबी, इनकम टैक्स समेत दस से अधिक केंद्र व राज्य एजेंसियाँ शामिल हुईं।
इंटेलिजेंस-आधारित संयुक्त अभियान, वित्तीय जाँच और नशा-मुक्त भारत लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई गई।

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने राजस्थान में ड्रग तस्करी के विरुद्ध प्रवर्तन कार्रवाई को और धार देने के लिए जयपुर में राज्य-स्तरीय संयुक्त समन्वय समिति (जेसीसी) की बैठक बुलाई, जिसमें केंद्र और राज्य की दस से अधिक प्रमुख एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। 19 जुलाई को हुई इस बैठक का उद्देश्य नशीले पदार्थों से जुड़े अपराधों पर लगाम लगाने के लिए एजेंसियों के बीच खुफिया साझेदारी और समन्वित अभियानों को मज़बूत करना था।

बैठक की अध्यक्षता और भागीदारी

इस बैठक की संयुक्त अध्यक्षता एनसीबी के डिप्टी डायरेक्टर जनरल (पश्चिमी क्षेत्र) और राजस्थान एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) के इंस्पेक्टर जनरल ने की। बैठक में नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए), डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (डीआरआई), सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेस एंड कस्टम्स (सीबीआईसी), इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी), इनकम टैक्स विभाग, सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स (सीबीएन), सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय तथा ड्रग कंट्रोलर कार्यालय के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

मुख्य एजेंडा: 50 चिन्हित मामले और वित्तीय जाँच

अधिकारियों के अनुसार बैठक में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) एक्ट के तहत दर्ज 50 चिन्हित मामलों की प्रगति की समीक्षा की गई और उनके शीघ्र निपटारे को सुनिश्चित करने पर बल दिया गया। इसके साथ ही प्रिवेंशन ऑफ इलिसिट ट्रैफिक इन नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (पीआईटी-एनडीपीएस) एक्ट के तहत प्रस्तावों में तेज़ी लाने और वित्तीय जाँच को सुदृढ़ करने पर भी विचार-विमर्श हुआ। यह ऐसे समय में आया है जब राजस्थान में ड्रग तस्करी के उभरते रुझान चिंता का विषय बने हुए हैं।

इंटेलिजेंस-आधारित अभियान और जन-जागरूकता पर जोर

चर्चा का केंद्रबिंदु इंटेलिजेंस-आधारित संयुक्त अभियानों को बढ़ावा देना, समन्वित पूछताछ प्रक्रिया अपनाना और एजेंसियों के बीच सूचना का समय पर आदान-प्रदान सुनिश्चित करना रहा। गौरतलब है कि संगठित ड्रग तस्करी नेटवर्क को तोड़ने के लिए वित्तीय जाँच को प्रमुख हथियार के रूप में देखा जा रहा है। नशा-मुक्ति पहलों और जन-जागरूकता अभियानों को भी प्रवर्तन रणनीति के अभिन्न अंग के रूप में शामिल करने पर सहमति बनी।

विजन डॉक्यूमेंट की समीक्षा और सामूहिक प्रतिबद्धता

बैठक में ड्रग कंट्रोल पर विजन डॉक्यूमेंट के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा की गई। भाग लेने वाली सभी एजेंसियों ने निरंतर सहयोग और समन्वित प्रवर्तन प्रयासों के ज़रिए नशा-मुक्त भारत के राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। आगे की कार्रवाई के तहत एजेंसियाँ संयुक्त अभियान और नियमित समीक्षा बैठकों के माध्यम से इस समन्वय को जारी रखेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन जब तक इन मामलों में दोषसिद्धि दर और ज़ब्त की गई संपत्ति के आँकड़े सार्वजनिक नहीं होते, जवाबदेही अधूरी रहती है। राजस्थान की लंबी अंतरराज्यीय सीमाएँ और पाकिस्तान से सटी सरहद इसे ड्रग ट्रांज़िट रूट के रूप में संवेदनशील बनाती हैं — इस भौगोलिक वास्तविकता के बिना किसी भी रणनीति की सीमाएँ हैं।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनसीबी की जेसीसी बैठक क्या होती है?
जेसीसी यानी संयुक्त समन्वय समिति एक बहु-एजेंसी मंच है जिसे नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो राज्य-स्तर पर बुलाता है। इसका उद्देश्य केंद्र और राज्य की प्रवर्तन एजेंसियों के बीच खुफिया साझेदारी, मामलों की समीक्षा और संयुक्त अभियानों की रणनीति तय करना है।
राजस्थान जेसीसी बैठक में कौन-कौन सी एजेंसियाँ शामिल थीं?
बैठक में एनआईए, डीआरआई, सीबीआईसी, इंटेलिजेंस ब्यूरो, इनकम टैक्स विभाग, सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय तथा ड्रग कंट्रोलर कार्यालय सहित दस से अधिक केंद्र व राज्य एजेंसियाँ शामिल थीं।
बैठक में एनडीपीएस के 50 मामलों की समीक्षा क्यों की गई?
अधिकारियों के अनुसार ये 50 मामले एनडीपीएस एक्ट के तहत चिन्हित प्राथमिकता वाले मामले हैं। इनकी निगरानी करके शीघ्र निपटारा सुनिश्चित करना और पीआईटी-एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रस्तावों में तेज़ी लाना बैठक के प्रमुख एजेंडे में शामिल था।
राजस्थान में ड्रग तस्करी रोकने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाएँगे?
बैठक में इंटेलिजेंस-आधारित संयुक्त अभियान, समन्वित पूछताछ, एजेंसियों के बीच समय पर सूचना साझाकरण और वित्तीय जाँच को मज़बूत करने पर सहमति बनी। साथ ही नशा-मुक्ति और जन-जागरूकता अभियानों को प्रवर्तन रणनीति से जोड़ने का निर्णय लिया गया।
नशा-मुक्त भारत अभियान में राजस्थान की भूमिका क्या है?
राजस्थान की अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की संवेदनशीलता के कारण यह ड्रग ट्रांज़िट और वितरण के लिहाज़ से महत्वपूर्ण राज्य है। जेसीसी बैठक में भाग लेने वाली सभी एजेंसियों ने नशा-मुक्त भारत के राष्ट्रीय लक्ष्य के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
राष्ट्र प्रेस
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