20 जुलाई 2026
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ड्रग तस्करी पर एनसीबी का शिकंजा: कर्नाटक और राजस्थान में JCC बैठक, 10 से अधिक एजेंसियाँ एकजुट

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ड्रग तस्करी पर एनसीबी का शिकंजा: कर्नाटक और राजस्थान में JCC बैठक, 10 से अधिक एजेंसियाँ एकजुट

सारांश

एनसीबी ने एक ही दिन बेंगलुरु और जयपुर में JCC बैठकें बुलाकर ड्रग तस्करी के खिलाफ दो-मोर्चे की रणनीति का संकेत दिया। दस से अधिक केंद्रीय और राज्य एजेंसियाँ एकजुट हुईं — यह 'नशा मुक्त भारत' को ज़मीनी कार्रवाई में बदलने की दिशा में एक ठोस कदम है।

मुख्य बातें

एनसीबी ने 19 जुलाई 2026 को बेंगलुरु में कर्नाटक की राज्यस्तरीय JCC तिमाही बैठक आयोजित की।
बैठक की अध्यक्षता एनसीबी के डिप्टी डायरेक्टर जनरल (दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र) ने की; डीआरआई, ईडी, एनआईए, आईबी, आरपीएफ सहित 10 से अधिक एजेंसियाँ शामिल हुईं।
बैठक में पीआईटी-एनडीपीएस कानून के तहत निवारक हिरासत, वित्तीय जाँच और प्रीकर्सर रसायनों की निगरानी पर विशेष ज़ोर दिया गया।
उसी दिन जयपुर में राजस्थान की JCC बैठक भी हुई, जिसमें एनडीपीएस कानून के तहत 50 चिन्हित मामलों की त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने पर सहमति बनी।
सभी एजेंसियों ने नशा मुक्त भारत के लक्ष्य को दोहराते हुए संयुक्त कार्रवाई को और मज़बूत करने का संकल्प लिया।

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने 19 जुलाई 2026 को बेंगलुरु में राज्यस्तरीय संयुक्त समन्वय समिति (JCC) की तिमाही बैठक आयोजित की, जिसमें कर्नाटक में ड्रग तस्करी के खिलाफ बहु-एजेंसी रणनीति को और पुख्ता करने पर सहमति बनी। अधिकारियों के बयान के अनुसार, यह बैठक नशीले पदार्थों से जुड़े उभरते खतरों से निपटने और राष्ट्रीय नारकोटिक्स नियंत्रण रोडमैप को ज़मीनी स्तर पर लागू करने के लिए बुलाई गई थी।

बैठक में कौन-कौन शामिल हुए

एनसीबी के डिप्टी डायरेक्टर जनरल (दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र) की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में डीआरआई, कस्टम्स, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी), राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए), आयकर विभाग, रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ), सीडीएससीओ, राज्य एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ), ड्रग कंट्रोल विभाग और कर्नाटक राज्य आबकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। इस व्यापक भागीदारी से स्पष्ट है कि सरकार ड्रग तस्करी को अब केवल पुलिस की समस्या नहीं, बल्कि एक बहु-आयामी सुरक्षा चुनौती मान रही है।

मुख्य घटनाक्रम और एजेंडा

बैठक में कई अहम मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ। इनमें ड्रग तस्करी के नए तरीकों की पहचान, पीआईटी-एनडीपीएस कानून के तहत निवारक हिरासत के प्रस्तावों में तेज़ी, वित्तीय जाँच को मज़बूत करना, नशीले पदार्थ बनाने में इस्तेमाल होने वाले रसायनों की निगरानी और फरार आरोपियों की पहचान के लिए खुफिया जानकारी के बेहतर उपयोग पर ज़ोर दिया गया। अधिकारियों के बयान के अनुसार, सभी एजेंसियों ने आपसी समन्वय बढ़ाने और संयुक्त कार्रवाई को और प्रभावी बनाने पर सहमति जताई।

राजस्थान में भी समानांतर बैठक

उल्लेखनीय है कि बेंगलुरु की बैठक के साथ-साथ उसी दिन जयपुर में राजस्थान की JCC तिमाही बैठक भी आयोजित हुई। इसकी संयुक्त अध्यक्षता एनसीबी के पश्चिमी क्षेत्र के डिप्टी डायरेक्टर जनरल और राजस्थान एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) के इंस्पेक्टर जनरल ने की। इसमें एनआईए, डीआरआई, केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी), आईबी, आयकर विभाग, केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन), सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय और ड्रग कंट्रोलर कार्यालय के अधिकारी शामिल रहे।

राजस्थान बैठक के प्रमुख बिंदु

जयपुर बैठक में अधिकारियों ने नारकोटिक्स नियंत्रण विजन दस्तावेज के क्रियान्वयन की समीक्षा की और राजस्थान में ड्रग तस्करी के नए रुझानों पर चर्चा की। विशेष रूप से एनडीपीएस कानून के तहत दर्ज 50 चिन्हित मामलों की निगरानी कर उनका शीघ्र निपटारा सुनिश्चित करने, पीआईटी-एनडीपीएस के लंबित प्रस्तावों में तेज़ी लाने और संगठित ड्रग तस्करी नेटवर्क को समाप्त करने पर सहमति बनी।

आगे क्या होगा

दोनों राज्यों में हुई इन बैठकों से यह संकेत मिलता है कि एनसीबी देशभर में एक साथ समन्वित अभियान चलाने की तैयारी में है। यह ऐसे समय में आया है जब नशीले पदार्थों की तस्करी के नए मार्गों और डिजिटल माध्यमों से होने वाले लेनदेन की चिंता बढ़ रही है। गौरतलब है कि 'नशा मुक्त भारत अभियान' के तहत केंद्र सरकार ने पहले भी बहु-एजेंसी दृष्टिकोण अपनाने पर बल दिया है, और ये JCC बैठकें उसी रणनीति की कड़ी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इन बैठकों का नतीजा ज़मीन पर कितनी गिरफ्तारियों और बरामदगियों में तब्दील होता है। बहु-एजेंसी समन्वय की बात वर्षों से होती आई है, फिर भी राजस्थान और कर्नाटक दोनों ड्रग तस्करी के सक्रिय मार्गों पर बने हुए हैं। पीआईटी-एनडीपीएस के तहत निवारक हिरासत एक शक्तिशाली औज़ार है, लेकिन इसके दुरुपयोग की आशंका को लेकर नागरिक अधिकार संगठन पहले भी सवाल उठा चुके हैं। बिना पारदर्शी परिणाम-रिपोर्टिंग के, ये बैठकें महज़ प्रशासनिक औपचारिकता बनकर रह सकती हैं।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनसीबी की JCC बैठक क्या होती है और इसका उद्देश्य क्या है?
JCC यानी संयुक्त समन्वय समिति की बैठक एनसीबी द्वारा तिमाही आधार पर आयोजित की जाती है, जिसमें केंद्रीय और राज्य स्तर की विभिन्न एजेंसियाँ ड्रग तस्करी से निपटने की साझा रणनीति बनाती हैं। इसका उद्देश्य सूचनाओं का आदान-प्रदान, लंबित मामलों की समीक्षा और संयुक्त अभियानों की योजना बनाना है।
19 जुलाई की बेंगलुरु बैठक में कौन-कौन सी एजेंसियाँ शामिल हुईं?
बेंगलुरु बैठक में डीआरआई, कस्टम्स, ईडी, आईबी, एनआईए, आयकर विभाग, आरपीएफ, सीडीएससीओ, राज्य एएनटीएफ, ड्रग कंट्रोल विभाग और कर्नाटक राज्य आबकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक की अध्यक्षता एनसीबी के डिप्टी डायरेक्टर जनरल (दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र) ने की।
पीआईटी-एनडीपीएस कानून क्या है और इसे बैठक में क्यों उठाया गया?
पीआईटी-एनडीपीएस (Prevention of Illicit Traffic in Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act) एक विशेष कानून है जो ड्रग तस्करी में संलिप्त व्यक्तियों को बिना मुकदमे के निवारक हिरासत में रखने की अनुमति देता है। बैठक में इसके तहत लंबित प्रस्तावों में तेज़ी लाने पर चर्चा हुई ताकि तस्करों को जल्द से जल्द हिरासत में लिया जा सके।
राजस्थान की JCC बैठक में क्या तय हुआ?
जयपुर में हुई राजस्थान JCC बैठक में एनडीपीएस कानून के तहत दर्ज 50 चिन्हित मामलों की त्वरित सुनवाई, वित्तीय जाँच को मज़बूत करने और संगठित ड्रग तस्करी नेटवर्क को खत्म करने पर सहमति बनी। इसकी संयुक्त अध्यक्षता एनसीबी के पश्चिमी क्षेत्र के डिप्टी डायरेक्टर जनरल और राजस्थान एएनटीएफ के इंस्पेक्टर जनरल ने की।
इन बैठकों का आम नागरिकों पर क्या असर पड़ेगा?
इन बैठकों के ज़रिए एजेंसियाँ ड्रग तस्करी नेटवर्क पर अधिक प्रभावी कार्रवाई की तैयारी में हैं, जिससे कर्नाटक और राजस्थान में नशीले पदार्थों की आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने की उम्मीद है। दीर्घकालिक रूप से, यह 'नशा मुक्त भारत' अभियान के तहत युवाओं तक नशे की पहुँच कम करने में सहायक हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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