पश्चिम बंगाल: NCB की अगुवाई में कोलकाता में ड्रग तस्करी रोधी JCC बैठक, 50 NDPS मामलों की निगरानी पर जोर
सारांश
मुख्य बातें
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने 30 जुलाई 2026 को कोलकाता में पश्चिम बंगाल की वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही की राज्य स्तरीय संयुक्त समन्वय समिति (JCC) की बैठक आयोजित की, जिसमें मादक पदार्थों की तस्करी के विरुद्ध अंतर-एजेंसी सहयोग को और सुदृढ़ करने तथा खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान को तेज़ करने की रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा हुई। यह बैठक ऐसे समय में बुलाई गई जब पश्चिम बंगाल में ड्रग तस्करी के उभरते रुझान सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं।
बैठक की अध्यक्षता और भागीदारी
बैठक की संयुक्त अध्यक्षता NCB के उप महानिदेशक (पूर्वी क्षेत्र) और पश्चिम बंगाल एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) के महानिरीक्षक ने की। इसमें सीमा शुल्क राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) — जिसमें हवाई खुफिया इकाई, निवारक और बंदरगाह शाखाएँ शामिल हैं — सीमा सुरक्षा बल (BSF), राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA), पश्चिम बंगाल विशेष जाँच शाखा, आयकर विभाग, ड्रग्स कंट्रोलर और राज्य उत्पाद शुल्क विभाग के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
मुख्य एजेंडा और विचार-विमर्श
बैठक की शुरुआत केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा जारी मादक पदार्थ नियंत्रण संबंधी विजन डॉक्यूमेंट पर एक प्रस्तुति से हुई, जिसमें नशीले पदार्थों के नेटवर्क को ध्वस्त करने की रणनीतिक प्राथमिकताओं की रूपरेखा दी गई है। चर्चा के प्रमुख बिंदुओं में शामिल थे: पश्चिम बंगाल में उभरते तस्करी के रुझान, शीघ्र निपटान के लिए चिन्हित 50 NDPS मामलों की निगरानी, PIT-NDPS प्रस्तावों में तेज़ी लाना, वित्तीय जाँच को मज़बूत करना और संगठित तस्करी नेटवर्क को तोड़ने के लिए समन्वित कार्रवाई।
एजेंसियों ने प्रमुख मामले साझा किए
NCB, ANTF, DRI, कोलकाता पुलिस, पश्चिम बंगाल उत्पाद शुल्क और सीमा शुल्क सहित सभी भाग लेने वाली एजेंसियों ने हाल के दो-दो प्रमुख NDPS मामलों की जानकारी साझा की। विचार-विमर्श तस्करों के तौर-तरीकों, खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान और प्रभावी प्रवर्तन की सर्वोत्तम प्रथाओं पर केंद्रित रहा।
गुप्त प्रयोगशालाओं और रसायन डायवर्जन पर विशेष ध्यान
NCB ने गुप्त मादक पदार्थ प्रयोगशालाओं और नियंत्रित पदार्थों तथा पूर्ववर्ती रसायनों के डायवर्जन के रेड फ्लैग संकेतकों पर विशेष प्रस्तुतियाँ दीं। इसका उद्देश्य सभी एजेंसियों की परिचालन तत्परता को बढ़ाना और उभरते मादक पदार्थों के खतरों की शीघ्र पहचान सुनिश्चित करना था। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल की भौगोलिक स्थिति — म्यांमार और बांग्लादेश से सटी सीमाओं के कारण — इसे ड्रग तस्करी के लिए एक संवेदनशील गलियारा बनाती है।
आगे की राह
बैठक में सहमति बनी कि अंतर-एजेंसी समन्वय को नियमित आधार पर और सुदृढ़ किया जाएगा तथा 50 चिन्हित NDPS मामलों का शीघ्र निपटान सुनिश्चित करने के लिए निगरानी तंत्र को और प्रभावी बनाया जाएगा। यह बैठक भारत सरकार की उस व्यापक प्रतिबद्धता का हिस्सा है जिसके तहत राज्य और केंद्रीय एजेंसियों के बीच ड्रग विरोधी अभियानों में तालमेल बढ़ाया जा रहा है।