NCB की तिमाही JCC बैठकें: MP और असम में ड्रग तस्करी के खिलाफ संयुक्त रणनीति तैयार
सारांश
मुख्य बातें
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने 31 जुलाई 2026 को मध्य प्रदेश और असम में 2026 की दूसरी तिमाही की राज्य स्तरीय संयुक्त समन्वय समिति (JCC) बैठकें आयोजित कीं, जिनका उद्देश्य मादक पदार्थों की तस्करी पर बहु-एजेंसी प्रवर्तन को और धारदार बनाना था। आधिकारिक बयान के अनुसार, मध्य प्रदेश की बैठक भोपाल में और असम की बैठक गुवाहाटी में संपन्न हुई।
भोपाल JCC: मुख्य घटनाक्रम
भोपाल में आयोजित बैठक की संयुक्त अध्यक्षता NCB के डिप्टी डायरेक्टर जनरल (पश्चिमी क्षेत्र) और मध्य प्रदेश के एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) के एडीजी ने की। इसमें राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA), स्पेशल इंटेलिजेंस ब्यूरो (SIB), आयकर विभाग, कस्टम्स, केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN), रेलवे सुरक्षा बल (RPF), राज्य अभियोजन विभाग, खाद्य एवं औषधि प्रशासन और राज्य आबकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में नारकोटिक्स नियंत्रण पर विज़न डॉक्यूमेंट के क्रियान्वयन, मध्य प्रदेश में तस्करी के उभरते रुझानों की निगरानी और 50 चिन्हित NDPS मामलों के शीघ्र निपटारे पर विशेष जोर दिया गया। इसके अलावा PIT-NDPS प्रस्तावों में तेज़ी लाने, वित्तीय जाँच को सुदृढ़ करने और अंतर-एजेंसी समन्वय के ज़रिए ड्रग तस्करी नेटवर्क को ध्वस्त करने की कार्ययोजना भी तैयार की गई। गुप्त प्रयोगशालाओं के भंडाफोड़ और खुफिया सूचना-आधारित संयुक्त अभियानों की समीक्षा भी इस बैठक का अहम हिस्सा रही।
गुवाहाटी JCC: पूर्वोत्तर पर फोकस
गुवाहाटी में हुई असम की JCC बैठक की अध्यक्षता NCB के डिप्टी डायरेक्टर जनरल (पूर्वोत्तर क्षेत्र) आर. सुधाकर ने की। इसमें ANTF, कस्टम्स, CGST, आयकर विभाग, DGGI, SIB, NIA, प्रवर्तन निदेशालय (ED), DRI, ड्रग कंट्रोलर, असम राइफल्स, BSF, ITBP और जिला पुलिस अधीक्षकों ने भाग लिया।
यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर भारत में तस्करी के बदलते पैटर्न और लॉजिस्टिक्स-आधारित डिलीवरी नेटवर्क चिंता का विषय बने हुए हैं। बैठक में रेलवे प्रवर्तन के लिए हैंडहेल्ड बैगेज स्क्रीनिंग तकनीक के उपयोग और NCB मॉडल पर असम नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) को और सशक्त बनाने पर भी विस्तृत चर्चा हुई।
समन्वित रणनीति के प्रमुख बिंदु
दोनों बैठकों में संयुक्त पूछताछ, वित्तीय जाँच, समन्वित प्रवर्तन अभियान और कार्टेल को ध्वस्त करने की रणनीतियों पर गहन मंथन हुआ। गौरतलब है कि NDPS जाँच के अभिन्न अंग के रूप में वित्तीय जाँच को मज़बूत करने और ड्रग तस्करी सिंडिकेट्स के वित्तीय ढाँचे को समाप्त करने के लिए 'पूरी-सरकार' (whole-of-government) दृष्टिकोण अपनाने पर सहमति बनी। सभी एजेंसियों ने 'नशा मुक्त भारत' के संकल्प को दोहराया।
आगे की राह
इन बैठकों में तय की गई कार्ययोजना के तहत खुफिया सूचना-आधारित प्रवर्तन को प्राथमिकता दी जाएगी और अंतर-एजेंसी समन्वय को संस्थागत रूप दिया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित JCC बैठकें एजेंसियों के बीच सूचना के अंतराल को पाटने में सहायक हैं, जो ड्रग तस्करी नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में एक ज़रूरी कदम है।