4 अगस्त 2026
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नशा तस्करी पर भारत का वैश्विक शिकंजा: NCB ने 27 देशों से द्विपक्षीय समझौते, 19 से MOU किए

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नशा तस्करी पर भारत का वैश्विक शिकंजा: NCB ने 27 देशों से द्विपक्षीय समझौते, 19 से MOU किए

सारांश

भारत ने नशा तस्करी के खिलाफ वैश्विक मोर्चे पर बड़ा कदम उठाया है — 27 देशों से द्विपक्षीय समझौते, 19 से MOU, और 2026-2029 के लिए एक नया विज़न डॉक्यूमेंट। NCORD पोर्टल और JCC के ज़रिए केंद्र-राज्य समन्वय को भी नई धार दी जा रही है।

मुख्य बातें

NCB ने 27 देशों के साथ द्विपक्षीय समझौते और 19 देशों के साथ MOU किए हैं।
26 जून को नारकोटिक्स कंट्रोल विज़न डॉक्यूमेंट (2026-2029) जारी किया गया, जिसमें तीन वर्षीय समयबद्ध लक्ष्य हैं।
चार स्तरीय NCORD तंत्र केंद्र और राज्य एजेंसियों के बीच समन्वय का एकीकृत मंच है।
NCB DG अनुराग गर्ग की अध्यक्षता में JCC की केंद्रीय स्तर पर 11 और राज्य स्तर पर 75 बैठकें हो चुकी हैं।
फील्ड अधिकारियों को मेफेड्रोन और एम्फेटामाइन जैसे सिंथेटिक ड्रग्स के जोखिमों पर संवेदनशील बनाया जा रहा है।
अपराध से अर्जित संपत्तियों की जब्ती के लिए विस्तृत वित्तीय जाँच दिशा-निर्देश जारी।

केंद्र सरकार ने मंगलवार, 4 अगस्त को लोकसभा में खुलासा किया कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए 27 देशों के साथ द्विपक्षीय समझौते और 19 देशों के साथ समझौता ज्ञापन (MOU) किए हैं। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने सांसदों के लिखित प्रश्नों के उत्तर में यह जानकारी दी।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग का विस्तार

राय ने बताया कि भारत म्यांमार, नेपाल, थाईलैंड, श्रीलंका, इंडोनेशिया, सिंगापुर और अमेरिका सहित कई देशों के साथ नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों पर नियमित रूप से महानिदेशक (DG) स्तर और द्विपक्षीय वार्ता करता है। यह सहयोग तस्करी नेटवर्क की पहचान और उन्हें ध्वस्त करने में अहम भूमिका निभा रहा है।

गौरतलब है कि भारत 'गोल्डन ट्राएंगल' और 'गोल्डन क्रेसेंट' — दोनों प्रमुख नशा-उत्पादन क्षेत्रों से भौगोलिक रूप से निकट है, जो इस अंतरराष्ट्रीय समन्वय को और अधिक महत्वपूर्ण बनाता है।

नारकोटिक्स कंट्रोल विज़न डॉक्यूमेंट 2026-2029

सांसद नरेश गणपत म्हस्के और श्रीकांत शिंदे के प्रश्नों का उत्तर देते हुए राय ने बताया कि अवैध मादक पदार्थों की तस्करी और नशे के दुरुपयोग से निपटने के लिए 26 जून को 'नारकोटिक्स कंट्रोल विज़न डॉक्यूमेंट (2026-2029)' जारी किया गया है। इस दस्तावेज़ में अगले तीन वर्षों के लिए स्पष्ट प्राथमिकताएँ और समयबद्ध लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।

इसका मूल उद्देश्य 'संपूर्ण सरकार' और 'संपूर्ण समाज' की सक्रिय भागीदारी से नशीले पदार्थों पर नियंत्रण पाना है — अर्थात केवल कानून प्रवर्तन नहीं, बल्कि नागरिक समाज और स्थानीय समुदायों को भी इस लड़ाई में शामिल करना।

NCORD तंत्र और एकीकृत पोर्टल

राय ने सदन को बताया कि NCB ने केंद्र और राज्यों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच समन्वय सुनिश्चित करने के लिए चार स्तरीय नार्को-कोऑर्डिनेशन सेंटर (NCORD) तंत्र स्थापित किया है। NCORD पोर्टल मादक पदार्थ कानून प्रवर्तन से जुड़ी जानकारी के लिए एकीकृत मंच के रूप में कार्य करता है।

इस पोर्टल पर प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण, मादक पदार्थ अपराधियों का डेटाबेस, कानूनी जानकारी और राज्यों द्वारा अपनाई गई बेहतर पहलों का विवरण उपलब्ध है।

संयुक्त समन्वय समिति और नार्को-टेररिज़्म

बड़े और महत्वपूर्ण मादक पदार्थ मामलों — विशेष रूप से नार्को-टेररिज़्म से जुड़े प्रकरणों — की जाँच की निगरानी के लिए NCB महानिदेशक अनुराग गर्ग की अध्यक्षता में एक संयुक्त समन्वय समिति (JCC) गठित की गई है। अब तक केंद्रीय स्तर पर JCC की 11 बैठकें और राज्य स्तर पर 75 बैठकें आयोजित हो चुकी हैं।

ज़मीनी स्तर पर संवेदनशीलता और वित्तीय जाँच

राय ने बताया कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस महानिदेशकों (DGP) से अनुरोध किया गया है कि वे बीट कांस्टेबल, फील्ड अधिकारियों और थाना प्रभारियों को सिंथेटिक ड्रग्स — विशेष रूप से मेफेड्रोन और एम्फेटामाइन श्रेणी के उत्तेजक पदार्थों — के गुप्त निर्माण से जुड़े जोखिमों और चेतावनी संकेतों के बारे में संवेदनशील बनाएँ।

इसके अलावा, वित्तीय जाँच को मज़बूत करने और अपराध से अर्जित संपत्तियों की पहचान, पता लगाने तथा जब्ती की प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश भी जारी किए गए हैं। यह कदम नशा तस्करी की आर्थिक रीढ़ तोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इन समझौतों के तहत वास्तविक सूचना-साझाकरण और संयुक्त अभियानों की दर क्या रही है — यह संसद में नहीं बताया गया। NCORD जैसे समन्वय तंत्र वर्षों से अस्तित्व में हैं, फिर भी सिंथेटिक ड्रग्स की ज़ब्ती के आँकड़े हर साल नए रिकॉर्ड तोड़ रहे हैं, जो माँग और आपूर्ति दोनों में वृद्धि का संकेत देते हैं। नार्को-टेररिज़्म पर JCC की 86 बैठकें संस्थागत गंभीरता दर्शाती हैं, लेकिन जब तक अभियोजन दर और संपत्ति ज़ब्ती के परिणाम सार्वजनिक नहीं होते, नीति की वास्तविक सफलता का आकलन संभव नहीं।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत ने नशा तस्करी रोकने के लिए कितने देशों से समझौते किए हैं?
NCB ने मादक पदार्थों की तस्करी पर नियंत्रण के लिए 27 देशों के साथ द्विपक्षीय समझौते और 19 देशों के साथ MOU किए हैं। यह जानकारी गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने 4 अगस्त को लोकसभा में दी।
नारकोटिक्स कंट्रोल विज़न डॉक्यूमेंट 2026-2029 क्या है?
यह 26 जून को जारी एक तीन वर्षीय नीति दस्तावेज़ है जो अवैध मादक पदार्थों की तस्करी और नशे के दुरुपयोग से निपटने के लिए समयबद्ध लक्ष्य और प्राथमिकताएँ निर्धारित करता है। इसका दृष्टिकोण 'संपूर्ण सरकार' और 'संपूर्ण समाज' की भागीदारी पर आधारित है।
NCORD तंत्र क्या है और यह कैसे काम करता है?
नार्को-कोऑर्डिनेशन सेंटर (NCORD) एक चार स्तरीय तंत्र है जो केंद्र और राज्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच समन्वय सुनिश्चित करता है। NCORD पोर्टल पर अपराधियों का डेटा, प्रशिक्षण सामग्री और राज्यों की बेहतर पहलें उपलब्ध हैं।
संयुक्त समन्वय समिति (JCC) का क्या काम है?
JCC बड़े मादक पदार्थ मामलों, विशेष रूप से नार्को-टेररिज़्म से जुड़े प्रकरणों की जाँच की निगरानी करती है। NCB DG अनुराग गर्ग की अध्यक्षता में अब तक केंद्रीय स्तर पर 11 और राज्य स्तर पर 75 बैठकें हो चुकी हैं।
सिंथेटिक ड्रग्स के खिलाफ सरकार क्या कदम उठा रही है?
सभी राज्यों के DGP से अनुरोध किया गया है कि फील्ड अधिकारियों को मेफेड्रोन और एम्फेटामाइन श्रेणी के सिंथेटिक ड्रग्स के गुप्त निर्माण के जोखिमों के बारे में संवेदनशील बनाएँ। साथ ही अपराध से अर्जित संपत्तियों की जब्ती के लिए विस्तृत वित्तीय जाँच दिशा-निर्देश भी जारी किए गए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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