अमित शाह की अध्यक्षता में नार्को-कोऑर्डिनेशन सेंटर की 10वीं बैठक, ₹6,000 करोड़ के नशीले पदार्थ होंगे नष्ट
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह 27 जून 2025 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में नार्को-कोऑर्डिनेशन सेंटर (NCORD) की 10वीं शीर्ष-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करेंगे। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) द्वारा आयोजित यह बैठक देश में मादक पदार्थों के विरुद्ध समन्वित कार्रवाई को नई दिशा देने का प्रयास है।
बैठक में कौन होगा शामिल
यह बैठक हाइब्रिड मोड में आयोजित होगी, जिसमें 44 केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के प्रमुख हितधारकों के साथ-साथ राज्य सरकारों और ड्रग कानून प्रवर्तन एजेंसियों के 108 प्रतिनिधि भाग लेंगे। यह मंच केंद्र और राज्यों के बीच नशा-विरोधी अभियान में समन्वय को और सुदृढ़ करने का अवसर प्रदान करेगा।
विज़न डॉक्यूमेंट 2026–2029 का होगा विमोचन
इस अवसर पर गृह मंत्री शाह 'मादक पदार्थ नियंत्रण पर विज़न डॉक्यूमेंट (2026–2029)' जारी करेंगे। केंद्र सरकार के संबंधित विभागों, प्रवर्तन एजेंसियों और अन्य हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद तैयार यह दस्तावेज़ तीन मुख्य स्तंभों — मांग में कमी, आपूर्ति में कमी और नुकसान में कमी — पर एक साझा रोडमैप प्रस्तुत करेगा।
इस रोडमैप में नेटवर्क-केंद्रित प्रवर्तन दृष्टिकोण की परिकल्पना की गई है। अगले तीन वर्षों में सिंथेटिक ड्रग्स और डार्कनेट के ज़रिए होने वाली तस्करी से निपटना, युवाओं को नशे से दूर रखना, तथा उपचार एवं पुनर्वास केंद्रों की पहुँच बढ़ाना इसके प्रमुख उद्देश्य हैं। यह दस्तावेज़ सभी हितधारकों की जिम्मेदारियों, समय-सीमाओं और लक्ष्यों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करते हुए प्रवर्तन, पुनर्वास, जन-जागरूकता, क्षमता निर्माण और अंतर-एजेंसी समन्वय को एकीकृत करता है।
₹6,000 करोड़ के नशीले पदार्थ होंगे नष्ट
बैठक के दौरान गृह मंत्री NCB वार्षिक रिपोर्ट 2025 जारी करेंगे और जम्मू एवं गुवाहाटी में नवनिर्मित NCB आंचलिक कार्यालयों का उद्घाटन करेंगे। इसके अलावा, 'ड्रग डिस्पोज़ल फोर्टनाइट कैंपेन' के अंतर्गत देशभर में केंद्रीय और राज्य कानून-प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा लगभग 2,09,500 किलोग्राम नशीले पदार्थ नष्ट किए जाने की उम्मीद है, जिनका अनुमानित बाज़ार मूल्य ₹6,000 करोड़ बताया गया है।
नशामुक्त भारत की दिशा में व्यापक समीक्षा
यह बैठक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मादक पदार्थ तस्करी के विरुद्ध 'जीरो टॉलरेंस नीति' को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यह मंच सहभागी राज्यों, विभागों और एजेंसियों द्वारा किए गए सामूहिक प्रयासों की व्यापक समीक्षा का अवसर भी प्रदान करेगा। गौरतलब है कि NCORD की यह 10वीं बैठक ऐसे समय में हो रही है जब देश में सिंथेटिक ड्रग्स और डार्कनेट के माध्यम से नशे की तस्करी के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
आगे क्या होगा
विज़न डॉक्यूमेंट के लागू होने के बाद सभी हितधारक एजेंसियाँ निर्धारित समय-सीमाओं और लक्ष्यों के अनुसार अपनी कार्ययोजना तैयार करेंगी। अगले तीन वर्षों में इसके क्रियान्वयन की निगरानी NCORD के माध्यम से की जाएगी, जिससे नशामुक्त भारत के लक्ष्य को संस्थागत रूप मिलेगा।