24 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

फिलिस्तीनी राजदूत अबू शावेश का आह्वान: 'शांति के लिए बयानों से आगे बढ़े अंतरराष्ट्रीय समुदाय'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
फिलिस्तीनी राजदूत अबू शावेश का आह्वान: 'शांति के लिए बयानों से आगे बढ़े अंतरराष्ट्रीय समुदाय'

सारांश

भारत में फिलिस्तीन के राजदूत अब्दुल्ला एम. अबू शावेश ने नई दिल्ली में कहा — बयानों का दौर खत्म हो, अब ठोस कार्रवाई चाहिए। लगातार दूसरे साल UNGA में वीजा से वंचित किए जाने और अमेरिका के 2.8 अरब डॉलर के हथियार सौदे पर उनकी तीखी प्रतिक्रिया वैश्विक असमानता की तस्वीर उजागर करती है।

मुख्य बातें

भारत में फिलिस्तीन के राजदूत अब्दुल्ला एम.
अबू शावेश ने 24 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को बयानबाज़ी से आगे बढ़कर ठोस कदम उठाने होंगे।
अमेरिका ने फिलिस्तीनी प्राधिकरण को लगातार दूसरे साल UNGA में शामिल होने के लिए वीजा नहीं दिया — दूतावास ने विरोध पत्र जारी किया।
फिलिस्तीनी नेतृत्व UNGA से बाहर, जबकि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू महासभा को संबोधित करने न्यूयॉर्क पहुँचे।
अमेरिकी प्रशासन ने इजरायल को 2.8 अरब डॉलर के सौदे के तहत 40,000 बम — प्रत्येक 2,000 पाउंड वजन के — आपूर्ति करने का ऐलान किया।
राजदूत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों के बीच मतभेद को प्रस्तावों के अप्रभावी रहने की मुख्य वजह बताया।

भारत में फिलिस्तीन के राजदूत अब्दुल्ला एम. अबू शावेश ने 24 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में कहा कि फिलिस्तीन में शांति तभी संभव होगी, जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय महज बयानबाज़ी छोड़कर ठोस और व्यावहारिक कदम उठाए। गाजा संघर्ष और इजरायली कब्जे पर अपनी पहली विस्तृत प्रतिक्रिया में राजदूत ने संयुक्त राष्ट्र की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े किए।

गाजा संकट: 'संघर्ष' से परे की वास्तविकता

राजदूत अबू शावेश ने कहा, 'फिलिस्तीन में जो स्थिति बनी हुई है, उसे महज 'संघर्ष' कहना पर्याप्त नहीं है। यह इजराइली कब्जे और लंबे समय से जारी संकट से जुड़ा मामला है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इसकी गंभीरता को उसी रूप में समझना होगा।' उनके अनुसार, कूटनीतिक और शांतिपूर्ण समाधान की उम्मीद तब तक सैद्धांतिक ही बनी रहेगी, जब तक दुनिया एकजुट होकर व्यावहारिक स्तर पर काम नहीं करती।

उन्होंने स्पष्ट किया कि अब ज़रूरत केवल शांति प्रक्रिया का उल्लेख करने की नहीं, बल्कि उसके क्रियान्वयन के लिए निर्णायक कार्रवाई की है। यह ऐसे समय में आया है जब गाजा में मानवीय संकट और गहरा हो रहा है और वैश्विक दबाव बढ़ रहा है।

संयुक्त राष्ट्र की सीमाएँ और सुरक्षा परिषद का गतिरोध

राजदूत ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र 193 देशों के सामूहिक प्रयास का प्रतिनिधित्व करता है, किंतु सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों के बीच मतभेद होने पर उसकी प्रभावशीलता प्रभावित होती है। उनके अनुसार, यही कारण है कि कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों और अंतरराष्ट्रीय अपीलों के बावजूद फिलिस्तीन के प्रश्न पर अपेक्षित बदलाव नहीं आया।

गौरतलब है कि अमेरिका ने सुरक्षा परिषद में कई प्रस्तावों को वीटो किया है, जिससे संस्था की कार्यक्षमता पर बार-बार सवाल उठते रहे हैं।

UNGA में प्रवेश से वंचित: अमेरिकी वीजा विवाद

राजदूत अबू शावेश ने 2026 संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) सत्र में फिलिस्तीनी नेतृत्व की भागीदारी पर गंभीर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, 'अमेरिका ने फिलिस्तीनी प्राधिकरण को लगातार दूसरे साल अमेरिका आने का वीजा नहीं दिया है। 2026 में हो रही UNGA बैठक में हमें शामिल नहीं होने दिया गया — और यह फिर से उसी एक देश की वजह से है जो मेजबान देश है।' उन्होंने यह भी बताया कि दूतावास ने इस पर पहले ही विरोध पत्र जारी किया था।

इस स्थिति में एक विरोधाभास भी उजागर हुआ — एक तरफ फिलिस्तीनी नेतृत्व को महासभा में व्यक्तिगत रूप से शामिल होने से रोका जा रहा है, जबकि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू महासभा को संबोधित करने के लिए न्यूयॉर्क पहुँच रहे हैं। राजदूत ने इसे अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में असमानता का स्पष्ट उदाहरण बताया।

अमेरिकी हथियार आपूर्ति पर आपत्ति

राजदूत ने अमेरिकी प्रशासन की नीतियों पर भी निशाना साधा। उन्होंने खबरों का हवाला देते हुए कहा कि मौजूदा अमेरिकी प्रशासन ने इजरायल को करीब 2.8 अरब डॉलर के प्रस्तावित हथियार सौदे के तहत 40,000 बम — जिनमें से प्रत्येक का वजन 2,000 पाउंड है — आपूर्ति करने का ऐलान किया है।

उन्होंने कहा कि ऐसी सैन्य सहायता का असर केवल राजनीतिक स्तर पर नहीं रहता, बल्कि इसका सीधा प्रभाव आम नागरिकों पर पड़ता है। राजदूत के अनुसार, फिलिस्तीनी, सीरियाई और लेबनानी परिवारों ने इस लंबे संकट में बड़ी संख्या में अपने प्रियजनों को खोया है।

आगे की राह: ठोस कार्रवाई की माँग

राजदूत अबू शावेश ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील करते हुए कहा कि अब यह तय करना होगा कि वह केवल प्रस्तावों और अपीलों तक सीमित रहेगा या शांति प्रक्रिया को लागू कराने के लिए वास्तविक कदम उठाएगा। उनके शब्दों में, 'जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय बयानबाज़ी से आगे बढ़कर व्यावहारिक कदम उठाएगा, तभी शांति का रास्ता खुलेगा।' यह बयान ऐसे समय पर आया है जब UNGA सत्र के दौरान फिलिस्तीन मुद्दा एक बार फिर वैश्विक मंच पर केंद्र में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर यह नहीं पूछती कि जब संस्थागत तंत्र ही असमान रूप से संचालित हो, तो 'ठोस कदम' की माँग किससे की जाए।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फिलिस्तीनी राजदूत अब्दुल्ला एम. अबू शावेश ने नई दिल्ली में क्या कहा?
भारत में फिलिस्तीन के राजदूत अब्दुल्ला एम. अबू शावेश ने 24 सितंबर 2026 को कहा कि फिलिस्तीन में शांति तभी संभव है, जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय बयानबाज़ी छोड़कर व्यावहारिक कदम उठाए। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े किए।
UNGA 2026 में फिलिस्तीन को वीजा क्यों नहीं मिला?
राजदूत के अनुसार, अमेरिका ने फिलिस्तीनी प्राधिकरण को लगातार दूसरे साल UNGA में शामिल होने के लिए वीजा नहीं दिया। उन्होंने इसे मेजबान देश का संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतों के विरुद्ध आचरण बताया और दूतावास ने इस पर विरोध पत्र जारी किया।
अमेरिका के इजरायल को हथियार देने पर फिलिस्तीनी राजदूत की क्या प्रतिक्रिया रही?
राजदूत ने कहा कि अमेरिकी प्रशासन ने इजरायल को लगभग 2.8 अरब डॉलर के सौदे के तहत 40,000 बम — जिनमें से प्रत्येक का वजन 2,000 पाउंड है — आपूर्ति करने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि इस सैन्य सहायता का सीधा असर फिलिस्तीनी, सीरियाई और लेबनानी आम नागरिकों पर पड़ता है।
संयुक्त राष्ट्र फिलिस्तीन मुद्दे पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं कर पाता?
राजदूत अबू शावेश के अनुसार, सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों के बीच मतभेद होने पर संयुक्त राष्ट्र की प्रभावशीलता बाधित होती है। यही वजह है कि कई प्रस्तावों के बावजूद फिलिस्तीन के प्रश्न पर जमीनी असर सीमित रहा है।
फिलिस्तीनी राजदूत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से क्या अपील की?
राजदूत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वह केवल प्रस्तावों और औपचारिक प्रतिक्रियाओं तक सीमित न रहे, बल्कि शांति प्रक्रिया को लागू कराने के लिए वास्तविक और ठोस कदम उठाए। उनके अनुसार, शांति का रास्ता व्यावहारिक कार्रवाई से ही खुलेगा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले