फिलिस्तीनी राजदूत अबू शावेश का आह्वान: 'शांति के लिए बयानों से आगे बढ़े अंतरराष्ट्रीय समुदाय'
सारांश
मुख्य बातें
भारत में फिलिस्तीन के राजदूत अब्दुल्ला एम. अबू शावेश ने 24 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में कहा कि फिलिस्तीन में शांति तभी संभव होगी, जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय महज बयानबाज़ी छोड़कर ठोस और व्यावहारिक कदम उठाए। गाजा संघर्ष और इजरायली कब्जे पर अपनी पहली विस्तृत प्रतिक्रिया में राजदूत ने संयुक्त राष्ट्र की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े किए।
गाजा संकट: 'संघर्ष' से परे की वास्तविकता
राजदूत अबू शावेश ने कहा, 'फिलिस्तीन में जो स्थिति बनी हुई है, उसे महज 'संघर्ष' कहना पर्याप्त नहीं है। यह इजराइली कब्जे और लंबे समय से जारी संकट से जुड़ा मामला है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इसकी गंभीरता को उसी रूप में समझना होगा।' उनके अनुसार, कूटनीतिक और शांतिपूर्ण समाधान की उम्मीद तब तक सैद्धांतिक ही बनी रहेगी, जब तक दुनिया एकजुट होकर व्यावहारिक स्तर पर काम नहीं करती।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अब ज़रूरत केवल शांति प्रक्रिया का उल्लेख करने की नहीं, बल्कि उसके क्रियान्वयन के लिए निर्णायक कार्रवाई की है। यह ऐसे समय में आया है जब गाजा में मानवीय संकट और गहरा हो रहा है और वैश्विक दबाव बढ़ रहा है।
संयुक्त राष्ट्र की सीमाएँ और सुरक्षा परिषद का गतिरोध
राजदूत ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र 193 देशों के सामूहिक प्रयास का प्रतिनिधित्व करता है, किंतु सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों के बीच मतभेद होने पर उसकी प्रभावशीलता प्रभावित होती है। उनके अनुसार, यही कारण है कि कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों और अंतरराष्ट्रीय अपीलों के बावजूद फिलिस्तीन के प्रश्न पर अपेक्षित बदलाव नहीं आया।
गौरतलब है कि अमेरिका ने सुरक्षा परिषद में कई प्रस्तावों को वीटो किया है, जिससे संस्था की कार्यक्षमता पर बार-बार सवाल उठते रहे हैं।
UNGA में प्रवेश से वंचित: अमेरिकी वीजा विवाद
राजदूत अबू शावेश ने 2026 संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) सत्र में फिलिस्तीनी नेतृत्व की भागीदारी पर गंभीर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, 'अमेरिका ने फिलिस्तीनी प्राधिकरण को लगातार दूसरे साल अमेरिका आने का वीजा नहीं दिया है। 2026 में हो रही UNGA बैठक में हमें शामिल नहीं होने दिया गया — और यह फिर से उसी एक देश की वजह से है जो मेजबान देश है।' उन्होंने यह भी बताया कि दूतावास ने इस पर पहले ही विरोध पत्र जारी किया था।
इस स्थिति में एक विरोधाभास भी उजागर हुआ — एक तरफ फिलिस्तीनी नेतृत्व को महासभा में व्यक्तिगत रूप से शामिल होने से रोका जा रहा है, जबकि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू महासभा को संबोधित करने के लिए न्यूयॉर्क पहुँच रहे हैं। राजदूत ने इसे अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में असमानता का स्पष्ट उदाहरण बताया।
अमेरिकी हथियार आपूर्ति पर आपत्ति
राजदूत ने अमेरिकी प्रशासन की नीतियों पर भी निशाना साधा। उन्होंने खबरों का हवाला देते हुए कहा कि मौजूदा अमेरिकी प्रशासन ने इजरायल को करीब 2.8 अरब डॉलर के प्रस्तावित हथियार सौदे के तहत 40,000 बम — जिनमें से प्रत्येक का वजन 2,000 पाउंड है — आपूर्ति करने का ऐलान किया है।
उन्होंने कहा कि ऐसी सैन्य सहायता का असर केवल राजनीतिक स्तर पर नहीं रहता, बल्कि इसका सीधा प्रभाव आम नागरिकों पर पड़ता है। राजदूत के अनुसार, फिलिस्तीनी, सीरियाई और लेबनानी परिवारों ने इस लंबे संकट में बड़ी संख्या में अपने प्रियजनों को खोया है।
आगे की राह: ठोस कार्रवाई की माँग
राजदूत अबू शावेश ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील करते हुए कहा कि अब यह तय करना होगा कि वह केवल प्रस्तावों और अपीलों तक सीमित रहेगा या शांति प्रक्रिया को लागू कराने के लिए वास्तविक कदम उठाएगा। उनके शब्दों में, 'जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय बयानबाज़ी से आगे बढ़कर व्यावहारिक कदम उठाएगा, तभी शांति का रास्ता खुलेगा।' यह बयान ऐसे समय पर आया है जब UNGA सत्र के दौरान फिलिस्तीन मुद्दा एक बार फिर वैश्विक मंच पर केंद्र में है।