26 जून 2026
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गाजा के 36 में से केवल 17 अस्पताल चालू, फिलिस्तीनी राजदूत अबू शावेश को भारत से बड़ी मेडिकल सहायता की उम्मीद

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गाजा के 36 में से केवल 17 अस्पताल चालू, फिलिस्तीनी राजदूत अबू शावेश को भारत से बड़ी मेडिकल सहायता की उम्मीद

सारांश

गाजा के 36 में से केवल 17 अस्पताल चालू हैं, 1,000 दिनों के युद्ध ने पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था तोड़ दी है। फिलिस्तीनी राजदूत अब्दुल्ला अबू शावेश ने भारतीय विदेश मंत्री से बातचीत के बाद भरोसा जताया है कि भारत जल्द बड़ी चिकित्सा सहायता भेजेगा और वेस्ट बैंक में अस्पताल भी बनाएगा।

मुख्य बातें

गाजा के 36 अस्पतालों में से केवल 17 आंशिक रूप से काम कर रहे हैं — फिलिस्तीनी राजदूत अब्दुल्ला अबू शावेश के अनुसार।
पिछले अक्टूबर में युद्धविराम घोषणा के बाद से 1,000 से अधिक फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं, जिनमें 250 बच्चे शामिल हैं।
सेव द चिल्ड्रन और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की रिपोर्ट के अनुसार, करीब 5,000 बच्चों के शव मलबे में दबे हैं।
राजदूत ने भारतीय विदेश मंत्री से बातचीत और फोन के बाद भरोसा जताया कि भारत जल्द बड़ी मेडिकल सहायता भेजेगा।
भारत वेस्ट बैंक में एक अस्पताल निर्माण परियोजना शुरू करने के करीब है।
लगभग 7 लाख फिलिस्तीनी छात्र दो साल की शिक्षा से वंचित हो चुके हैं।

भारत में फिलिस्तीन के राजदूत अब्दुल्ला अबू शावेश ने 26 जून 2026 को नई दिल्ली में कहा कि गाजा की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है और उन्हें पूरा विश्वास है कि भारत सरकार बहुत जल्द एक बड़ी और महत्वपूर्ण चिकित्सा सहायता भेजेगी। उन्होंने बताया कि गाजा के 36 अस्पतालों में से केवल 17 ही आंशिक रूप से काम कर रहे हैं, और पिछले अक्टूबर में युद्धविराम की घोषणा के बाद से अब तक 1,000 से अधिक फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं।

गाजा में मानवीय संकट की स्थिति

राजदूत अबू शावेश के अनुसार, इज़रायली युद्ध को लगभग 1,000 दिन पूरे होने को हैं और इस दौरान गाजा का संपूर्ण बुनियादी ढाँचा तबाह हो चुका है। उन्होंने कहा कि भूख और खाद्य संकट की समस्या अभी भी बनी हुई है, भले ही कुछ महीने पहले की तुलना में उसकी तीव्रता थोड़ी कम हुई हो। लगभग 7 लाख फिलिस्तीनी छात्र दो साल की शिक्षा से वंचित हो चुके हैं।

उन्होंने बताया कि युद्धविराम घोषणा के बाद मारे गए 1,000 से अधिक फिलिस्तीनियों में 250 बच्चे शामिल हैं। सेव द चिल्ड्रन के हवाले से उन्होंने कहा कि करीब 5,000 बच्चों के शव अभी भी मलबे के नीचे दबे हुए हैं — एक तथ्य जिसे हाल ही में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की रिपोर्ट में भी दर्ज किया गया है।

भारत से चिकित्सा सहायता की उम्मीद

राजदूत ने बताया कि उन्होंने हाल ही में भारतीय विदेश मंत्रालय के एक मंत्री से मुलाकात की, जिन्होंने उन्हें भरोसा दिलाया कि भारत अपनी पूरी कोशिश करेगा। उन्होंने यह भी बताया कि दो दिन पहले विदेश मंत्री की ओर से उन्हें फोन भी आया था। उनके अनुसार, 'प्रक्रिया जारी है और हम भारत की ओर से बड़ी सहायता मिलने के काफी करीब हैं।'

यह ऐसे समय में आया है जब इज़रायली युद्ध की शुरुआत से ही भारत ने फिलिस्तीन को दवाइयाँ और मेडिकल सामान भेजा है। अबू शावेश ने कहा कि न केवल भारत सरकार, बल्कि कई भारतीय व्यक्ति और संस्थाएँ भी सीधे संपर्क कर रही हैं।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर सवाल

राजदूत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर फिलिस्तीन के मुद्दे को हल करने के लिए पर्याप्त प्रयास न करने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि अमेरिका-इज़रायल-ईरान संघर्ष के कारण फिलिस्तीन का मुद्दा वैश्विक एजेंडे में पीछे चला गया है। उन्होंने कहा कि 'युद्ध से करीब तीन महीने पहले तक पूरी दुनिया में सबसे अधिक चर्चा फिलिस्तीनी संघर्ष की थी, लेकिन अब मुख्य फोकस बदल गया है।'

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र से अपील की कि वह लगातार विस्तृत और प्रमाणित रिपोर्टें जारी करता रहे, जो गाजा की मानवीय स्थिति को सटीक रूप से दर्ज करें।

भारत-फिलिस्तीन संबंध और वेस्ट बैंक अस्पताल परियोजना

राजदूत अबू शावेश ने भारत के दो-राष्ट्र समाधान के समर्थन की सराहना की और कहा कि भारत ने संयुक्त राष्ट्र में फिलिस्तीन से जुड़े प्रस्तावों के पक्ष में मतदान किया है। उन्होंने एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा की कि भारत वेस्ट बैंक में एक अस्पताल निर्माण परियोजना शुरू करने के करीब है — जो द्विपक्षीय सहयोग का एक ठोस कदम होगा।

आने वाले हफ्तों में भारत की ओर से चिकित्सा सहायता की आधिकारिक घोषणा और वेस्ट बैंक अस्पताल परियोजना की औपचारिक शुरुआत पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन गाजा की जमीनी हकीकत तत्काल कार्रवाई की माँग करती है। भारत का दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन और संयुक्त राष्ट्र में मतदान तो स्थापित नीति है, परंतु वेस्ट बैंक अस्पताल परियोजना जैसे ठोस कदम ही इस समर्थन को विश्वसनीयता देंगे। यह भी गौरतलब है कि अमेरिका-इज़रायल-ईरान संघर्ष के कारण गाजा संकट वैश्विक एजेंडे से पीछे खिसक रहा है — ऐसे में भारत की सक्रिय भूमिका न केवल मानवीय दृष्टि से, बल्कि वैश्विक कूटनीतिक नेतृत्व के नजरिए से भी अहम हो जाती है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गाजा की स्वास्थ्य व्यवस्था की मौजूदा स्थिति क्या है?
फिलिस्तीनी राजदूत अब्दुल्ला अबू शावेश के अनुसार, गाजा के 36 अस्पतालों में से केवल 17 ही आंशिक रूप से काम कर रहे हैं। इज़रायली युद्ध के लगभग 1,000 दिनों में पूरा बुनियादी ढाँचा ध्वस्त हो चुका है।
भारत फिलिस्तीन को क्या सहायता देने वाला है?
राजदूत अबू शावेश ने बताया कि भारतीय विदेश मंत्री से बातचीत और फोन के बाद उन्हें भरोसा है कि भारत जल्द बड़ी चिकित्सा सहायता — दवाइयाँ, मेडिकल उपकरण और अन्य जरूरी सामान — भेजेगा। इसके अलावा भारत वेस्ट बैंक में एक अस्पताल निर्माण परियोजना शुरू करने के करीब है।
गाजा में बच्चों की स्थिति कितनी गंभीर है?
सेव द चिल्ड्रन और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, करीब 5,000 बच्चों के शव मलबे में दबे हुए हैं। युद्धविराम घोषणा के बाद से मारे गए 1,000 से अधिक फिलिस्तीनियों में 250 बच्चे शामिल हैं।
फिलिस्तीन का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय एजेंडे से क्यों पीछे हट गया है?
राजदूत अबू शावेश के अनुसार, अमेरिका-इज़रायल-ईरान संघर्ष ने वैश्विक ध्यान फिलिस्तीनी मुद्दे से हटा दिया है। उनका कहना है कि युद्ध से करीब तीन महीने पहले तक गाजा संकट दुनिया में सर्वाधिक चर्चित विषय था, लेकिन अब प्राथमिकताएँ बदल गई हैं।
भारत-फिलिस्तीन संबंध कैसे हैं?
भारत दो-राष्ट्र समाधान का समर्थक रहा है और संयुक्त राष्ट्र में फिलिस्तीन से जुड़े प्रस्तावों के पक्ष में मतदान करता आया है। भारत फिलिस्तीन में कई विकास परियोजनाएँ भी चला रहा है और वेस्ट बैंक में एक नए अस्पताल की परियोजना शुरू करने के करीब है।
राष्ट्र प्रेस
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