क्या ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई में निरंतर जागरूकता हमें सुरक्षित कर सकती है: गृह मंत्री अमित शाह?

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क्या ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई में निरंतर जागरूकता हमें सुरक्षित कर सकती है: गृह मंत्री अमित शाह?

सारांश

गृह मंत्री अमित शाह ने नशे के खिलाफ लड़ाई में जागरूकता के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने 2029 तक का रोडमैप तैयार करने और सभी विभागों के बीच समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया। क्या हम एक नशा मुक्त भारत की ओर बढ़ सकते हैं?

Key Takeaways

  • नशे के खिलाफ जागरूकता महत्वपूर्ण है।
  • 2029 तक का रोडमैप तैयार किया जाएगा।
  • सभी विभागों का समन्वय आवश्यक है।
  • नशे के विक्टिम के प्रति सहानुभूति जरूरी है।
  • सख्त कार्यवाही की जाएगी।

नई दिल्ली, 9 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में नार्को-कोऑर्डिनेशन सेंटर (एन-कोर्ड) की 9वीं शीर्ष-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस अवसर पर केंद्रीय गृहमंत्री ने नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के अमृतसर कार्यालय का उद्घाटन भी किया। एनसीबी द्वारा हाइब्रिड मोड में आयोजित इस बैठक में केंद्र सरकार के मंत्रालयों एवं विभागों के प्रमुख हितधारक तथा राज्य सरकारों के प्रतिनिधि और ड्रग लॉ एनफोर्समेंट एजेंसियां ने भाग लिया।

अपने संबोधन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई में भारत सरकार के सभी विभागों को 2029 तक का रोडमैप और उस पर अमल के लिए समयबद्ध समीक्षा की पद्धति बनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह चुनौती कानून-व्यवस्था से ज्यादा नार्को-टेरर के प्रश्न से जुड़ी है और सबसे अधिक महत्वपूर्ण है कि यह एक प्रकार से देश की आने वाली नस्लों को बरबाद करने का षड्यंत्र है।

शाह ने कहा कि हमारे युवाओं के स्वास्थ्य, उनके सोचने और परफॉर्म करने की क्षमता और अपराध एक प्रकार से इस समस्या से ही जुड़े हैं। गृह मंत्री ने कहा कि 31 मार्च 2026 से हम सब एक साथ इस समस्या के खिलाफ 3 साल का एक सामूहिक अभियान चलाएंगे, जिसमें नशे की समस्या के खिलाफ सभी स्तम्भों की कार्यपद्धति परिभाषित की जाएगी और लक्षांक तय कर इसकी समयबद्ध समीक्षा होगी।

अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विगत 11 साल में हमने नशे के खिलाफ लड़ाई में काफी सफलता प्राप्त की है और 2019 में एनकॉर्ड के पुनर्गठन के बाद हमने इस समस्या पर संपूर्ण नियंत्रण करने के रास्ते को भी सुनिश्चित किया है। अब हमने स्पीड बना ली है और तीन सूत्रीय प्लान ऑफ एक्शन के साथ आगे बढ़ेंगे।

गृह मंत्री ने कहा कि एनकॉर्ड बैठकों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है, लेकिन इसे और बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जिलास्तरीय व राज्यस्तरीय बैठकें नियमित रूप से होनी चाहिए। शाह ने कहा कि भारत सरकार की अप्रोच बहुत स्पष्ट है कि ड्रग्स बनाने वाले और बेचने वाले, दोनों के प्रति कोई दयाभाव नहीं रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि ड्रग्स के विक्टिम के प्रति हमें मानवतापूर्ण दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

गृह मंत्री ने कहा कि कमांड, कम्प्लायंस और एकाउंटेबिलिटी को सुदृढ़ करते हुए ही हमें इस लड़ाई में आगे बढ़ना चाहिए। अब हमें बैठकों की संख्या नहीं बल्कि इनके परिणामों की समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नशे के व्यापार के किंगपिन, फायनेंसर और लॉजिस्टिक्स के रूट्स पर की जाने वाली कठोर कार्यवाही हमारी समीक्षा का मुद्दा होना चाहिए। शाह ने यह भी कहा कि हमें एफएसएल का उपयोग और समय पर चार्जशीट दाखिल कर सजा कराने की दर बढ़ाने को भी अपने लक्ष्यों में शामिल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि टॉप टू बॉटम और बॉटम टू टॉप अप्रोच ड्रग्स के पूरे नेटवर्क की जांच के लिए बेहद जरूरी है।

गृह मंत्री ने कहा कि नार्कोटिक्स के विरूद्ध लड़ाई की उपलब्धियां संतोषजनक हैं। उन्होंने बताया कि 2004 से 2013 के दौरान 40 हजार करोड़ रुपए मूल्य की 26 लाख किलोग्राम ड्रग्स जब्त की गई जबकि 2014 से 2025 के दौरान 1 लाख 71 हजार करोड़ रुपए मूल्य की 1 करोड़ 11 लाख किलोग्राम ड्रग्स पकड़ी गई है। शाह ने कहा कि सिंथेटिक ड्रग्स के खिलाफ हमारी मुहिम उत्साह देने वाली रही है। ड्रग्स को डिस्पोज करने की मात्रा में भी हम 11 गुना बढ़ोत्तरी कर सके हैं। उन्होंने कहा कि 2020 में 10,770 एकड़ भूमि पर अफीम की फसल नष्ट की गई और नवंबर 2025 तक 40 हजार एकड़ भूमि पर फसल को नष्ट किया गया है।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने सभी विभागों को निर्देश दिया है कि वे ड्रग्स की समस्या से निपटने की अपनी-अपनी जिम्मेदारियों के अनुसार 31 मार्च तक एक रोडमैप तैयार करें, निगरानी तंत्र स्थापित करें और उस पर पूरी तरह फोकस करें, ताकि इस समस्या का संपूर्ण समाधान हो सके। उन्होंने कहा कि हमें अगले तीन वर्षों में देश में ड्रग्स के खिलाफ सभी मोर्चों पर लड़ाई लड़कर ‘नशा मुक्त भारत’ बनाना है और देश के युवाओं को ड्रग्स से सुरक्षित रखने का प्रयास करना है।

Point of View

यह स्पष्ट है कि नशे की समस्या का समाधान केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है। समाज के सभी हिस्सों को एकजुट होकर इस चुनौती का सामना करना होगा। हमें न केवल नशे के विक्टिम के प्रति सहानुभूति, बल्कि ड्रग्स के निर्माताओं और विक्रेताओं के प्रति कठोर दृष्टिकोण अपनाना होगा।
NationPress
10/01/2026

Frequently Asked Questions

ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई में भारत सरकार क्या कदम उठा रही है?
भारत सरकार ने नार्को-कोऑर्डिनेशन सेंटर के माध्यम से सभी विभागों को एकजुट करने का प्रयास किया है।
क्या ड्रग्स की समस्या केवल कानून व्यवस्था से जुड़ी है?
नहीं, यह एक सामाजिक और स्वास्थ्य समस्या भी है, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रभावित कर सकती है।
अमित शाह ने कब तक का रोडमैप बनाने की बात की है?
उन्होंने 2029 तक का रोडमैप तैयार करने की बात की है।
क्या ड्रग्स के विक्टिम के प्रति सरकार की कोई योजना है?
सरकार मानवतापूर्ण दृष्टिकोण रखने का प्रयास कर रही है।
नशे के खिलाफ लड़ाई में क्या रणनीतियाँ अपनाई जा रही हैं?
तीन सूत्रीय प्लान ऑफ एक्शन और समयबद्ध समीक्षा की पद्धति अपनाई जा रही है।
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