पुडुचेरी में नशा-विरोधी अभियान तेज: सीएम रंगासामी और एनसीबी डीडीजी सुधाकर की अहम बैठक
सारांश
मुख्य बातें
पुडुचेरी के मुख्यमंत्री एन. रंगासामी ने शुक्रवार, 29 मई 2026 को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के दक्षिणी क्षेत्र के उप महानिदेशक (डीडीजी) आर. सुधाकर के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की, जिसमें पुडुचेरी केंद्र शासित प्रदेश में नशा-विरोधी अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने पर विस्तृत चर्चा हुई। इस बैठक में छात्रों के लिए लक्षित जागरूकता कार्यक्रम, नारको-समन्वय केंद्र (NCORD) तंत्र को सुदृढ़ करना और नशीली दवाओं के खिलाफ अभियान में तेज़ी लाना — तीन प्रमुख बिंदुओं पर सहमति बनी।
बैठक के मुख्य बिंदु
एनसीबी की ओर से जानकारी दी गई कि डीडीजी सुधाकर और मुख्यमंत्री रंगासामी के बीच हुई चर्चा का केंद्र तीन स्तंभों पर था — NCORD तंत्र को मज़बूत करना, नशीली दवाओं के खिलाफ अभियान को तेज़ करना और केंद्र शासित प्रदेश भर के छात्रों के लिए जागरूकता कार्यक्रम लागू करना। एनसीबी ने इस बैठक की जानकारी एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा की।
गौरतलब है कि पुडुचेरी की भौगोलिक स्थिति — तमिलनाडु से घिरा होना और समुद्री सीमा — इसे नशीली दवाओं की तस्करी के लिए संवेदनशील बनाती है, जिससे केंद्रीय और स्थानीय एजेंसियों के बीच समन्वय और भी ज़रूरी हो जाता है।
केंद्र सरकार की नीति और गृह मंत्री का निर्देश
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में एनसीओआरडी बैठक की अध्यक्षता करते हुए स्पष्ट किया कि नशामुक्त भारत का लक्ष्य तीन दृष्टिकोणों से ही हासिल किया जा सकता है — आपूर्ति श्रृंखला तोड़ने के लिए कठोर दृष्टिकोण, मांग घटाने के लिए रणनीतिक दृष्टिकोण और नशे के शिकार लोगों के लिए मानवीय दृष्टिकोण।
शाह ने कहा, 'जो लोग नशीली दवाएं बनाते और बेचते हैं, उनके प्रति कोई नरमी नहीं बरती जानी चाहिए, लेकिन जो लोग नशीली दवाओं का सेवन शुरू कर चुके हैं, उनके प्रति मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए — यही केंद्र सरकार की स्पष्ट नीति है।' उन्होंने यह भी कहा कि नशीली दवाओं के सरगनाओं, वित्तपोषकों और लॉजिस्टिक्स मार्गों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई समीक्षा का मुख्य केंद्र होनी चाहिए।
जब्ती के आँकड़े: दो दशकों की तुलना
गृह मंत्री शाह ने नशीली दवाओं की जब्ती के आँकड़ों की तुलना करते हुए बताया कि 2004 से 2013 के दस वर्षों में ₹40,000 करोड़ मूल्य की 26 लाख किलोग्राम नशीली दवाएं जब्त हुईं, जबकि 2014 से 2025 के बीच यह आँकड़ा बढ़कर ₹1.71 लाख करोड़ मूल्य की 1 करोड़ 11 लाख किलोग्राम हो गया। इसके अलावा नष्ट की गई ड्रग्स की मात्रा में 11 गुना की वृद्धि का भी दावा किया गया।
अफीम की फसल नष्ट करने के मामले में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है — 2020 में 10,770 एकड़ पर अफीम की फसल नष्ट की गई थी, जो नवंबर 2025 तक बढ़कर 40,000 एकड़ हो गई।
रणनीति में बदलाव की ज़रूरत
शाह ने एनसीबी अधिकारियों को सचेत किया कि नशीली दवाओं के वितरण और भुगतान के तरीके लगातार बदल रहे हैं और अपराधी नए-नए हथकंडे अपना रहे हैं। उन्होंने कहा कि फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी का उपयोग सुनिश्चित करके और समय पर चार्जशीट दाखिल करके दोषसिद्धि दर बढ़ाना प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि बैठकों की संख्या नहीं, बल्कि परिणामों की समीक्षा और प्रभाव का आकलन महत्वपूर्ण है।
आगे की राह
पुडुचेरी में इस बैठक के बाद अपेक्षा है कि राज्य स्तर पर छात्र-केंद्रित जागरूकता कार्यक्रमों को जल्द लागू किया जाएगा और NCORD तंत्र के ज़रिए केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय बेहतर होगा। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब केंद्र सरकार पूरे देश में नशा-विरोधी अभियान को नई गति देने की कोशिश में है।