16 जुलाई 2026
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पुडुचेरी में नशा-विरोधी अभियान तेज: सीएम रंगासामी और एनसीबी डीडीजी सुधाकर की अहम बैठक

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पुडुचेरी में नशा-विरोधी अभियान तेज: सीएम रंगासामी और एनसीबी डीडीजी सुधाकर की अहम बैठक

सारांश

पुडुचेरी में सीएम रंगासामी और एनसीबी डीडीजी सुधाकर की बैठक — NCORD तंत्र मज़बूत करने, ड्रग्स अभियान तेज करने और छात्रों के लिए जागरूकता कार्यक्रम पर सहमति। केंद्र के आँकड़े बताते हैं कि 2014 से 2025 के बीच ₹1.71 लाख करोड़ की ड्रग्स ज़ब्त हुई — 2004-2013 से कई गुना अधिक।

मुख्य बातें

पुडुचेरी के सीएम एन.
रंगासामी और एनसीबी (दक्षिणी क्षेत्र) के डीडीजी आर.
सुधाकर ने 29 मई 2026 को नशा-विरोधी अभियान पर उच्चस्तरीय बैठक की।
बैठक में NCORD तंत्र मज़बूत करने , नशीली दवाओं के खिलाफ अभियान तेज करने और छात्रों के लिए जागरूकता कार्यक्रम लागू करने पर चर्चा हुई।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के अनुसार 2014 से 2025 के बीच ₹1.71 लाख करोड़ मूल्य की 1 करोड़ 11 लाख किलोग्राम नशीली दवाएं जब्त हुईं।
नष्ट की गई ड्रग्स की मात्रा में 11 गुना की वृद्धि दर्ज; अफीम फसल नष्ट करने का दायरा 2020 के 10,770 एकड़ से बढ़कर नवंबर 2025 तक 40,000 एकड़ हुआ।
शाह ने फोरेंसिक लैब के उपयोग और समय पर चार्जशीट से दोषसिद्धि दर बढ़ाने को प्राथमिकता बताया।

पुडुचेरी के मुख्यमंत्री एन. रंगासामी ने शुक्रवार, 29 मई 2026 को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के दक्षिणी क्षेत्र के उप महानिदेशक (डीडीजी) आर. सुधाकर के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की, जिसमें पुडुचेरी केंद्र शासित प्रदेश में नशा-विरोधी अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने पर विस्तृत चर्चा हुई। इस बैठक में छात्रों के लिए लक्षित जागरूकता कार्यक्रम, नारको-समन्वय केंद्र (NCORD) तंत्र को सुदृढ़ करना और नशीली दवाओं के खिलाफ अभियान में तेज़ी लाना — तीन प्रमुख बिंदुओं पर सहमति बनी।

बैठक के मुख्य बिंदु

एनसीबी की ओर से जानकारी दी गई कि डीडीजी सुधाकर और मुख्यमंत्री रंगासामी के बीच हुई चर्चा का केंद्र तीन स्तंभों पर था — NCORD तंत्र को मज़बूत करना, नशीली दवाओं के खिलाफ अभियान को तेज़ करना और केंद्र शासित प्रदेश भर के छात्रों के लिए जागरूकता कार्यक्रम लागू करना। एनसीबी ने इस बैठक की जानकारी एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा की।

गौरतलब है कि पुडुचेरी की भौगोलिक स्थिति — तमिलनाडु से घिरा होना और समुद्री सीमा — इसे नशीली दवाओं की तस्करी के लिए संवेदनशील बनाती है, जिससे केंद्रीय और स्थानीय एजेंसियों के बीच समन्वय और भी ज़रूरी हो जाता है।

केंद्र सरकार की नीति और गृह मंत्री का निर्देश

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में एनसीओआरडी बैठक की अध्यक्षता करते हुए स्पष्ट किया कि नशामुक्त भारत का लक्ष्य तीन दृष्टिकोणों से ही हासिल किया जा सकता है — आपूर्ति श्रृंखला तोड़ने के लिए कठोर दृष्टिकोण, मांग घटाने के लिए रणनीतिक दृष्टिकोण और नशे के शिकार लोगों के लिए मानवीय दृष्टिकोण

शाह ने कहा, 'जो लोग नशीली दवाएं बनाते और बेचते हैं, उनके प्रति कोई नरमी नहीं बरती जानी चाहिए, लेकिन जो लोग नशीली दवाओं का सेवन शुरू कर चुके हैं, उनके प्रति मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए — यही केंद्र सरकार की स्पष्ट नीति है।' उन्होंने यह भी कहा कि नशीली दवाओं के सरगनाओं, वित्तपोषकों और लॉजिस्टिक्स मार्गों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई समीक्षा का मुख्य केंद्र होनी चाहिए।

जब्ती के आँकड़े: दो दशकों की तुलना

गृह मंत्री शाह ने नशीली दवाओं की जब्ती के आँकड़ों की तुलना करते हुए बताया कि 2004 से 2013 के दस वर्षों में ₹40,000 करोड़ मूल्य की 26 लाख किलोग्राम नशीली दवाएं जब्त हुईं, जबकि 2014 से 2025 के बीच यह आँकड़ा बढ़कर ₹1.71 लाख करोड़ मूल्य की 1 करोड़ 11 लाख किलोग्राम हो गया। इसके अलावा नष्ट की गई ड्रग्स की मात्रा में 11 गुना की वृद्धि का भी दावा किया गया।

अफीम की फसल नष्ट करने के मामले में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है — 2020 में 10,770 एकड़ पर अफीम की फसल नष्ट की गई थी, जो नवंबर 2025 तक बढ़कर 40,000 एकड़ हो गई।

रणनीति में बदलाव की ज़रूरत

शाह ने एनसीबी अधिकारियों को सचेत किया कि नशीली दवाओं के वितरण और भुगतान के तरीके लगातार बदल रहे हैं और अपराधी नए-नए हथकंडे अपना रहे हैं। उन्होंने कहा कि फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी का उपयोग सुनिश्चित करके और समय पर चार्जशीट दाखिल करके दोषसिद्धि दर बढ़ाना प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि बैठकों की संख्या नहीं, बल्कि परिणामों की समीक्षा और प्रभाव का आकलन महत्वपूर्ण है।

आगे की राह

पुडुचेरी में इस बैठक के बाद अपेक्षा है कि राज्य स्तर पर छात्र-केंद्रित जागरूकता कार्यक्रमों को जल्द लागू किया जाएगा और NCORD तंत्र के ज़रिए केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय बेहतर होगा। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब केंद्र सरकार पूरे देश में नशा-विरोधी अभियान को नई गति देने की कोशिश में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि बड़े सरगना कितने पकड़े गए और दोषसिद्धि दर क्या है — जो अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई। छात्र-केंद्रित जागरूकता कार्यक्रम सही दिशा है, लेकिन बिना स्थायी बजट आवंटन और मापन ढाँचे के, ऐसी बैठकें अक्सर घोषणाओं तक सीमित रह जाती हैं।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुडुचेरी में एनसीबी और सीएम रंगासामी की बैठक किस बारे में थी?
यह बैठक 29 मई 2026 को हुई, जिसमें पुडुचेरी में नशा-विरोधी अभियान तेज करने, NCORD तंत्र को मज़बूत करने और छात्रों के लिए जागरूकता कार्यक्रम लागू करने पर चर्चा हुई। एनसीबी (दक्षिणी क्षेत्र) के डीडीजी आर. सुधाकर ने सीएम एन. रंगासामी से मुलाकात की।
NCORD तंत्र क्या है और यह क्यों ज़रूरी है?
NCORD यानी नारको-समन्वय केंद्र एक बहु-एजेंसी ढाँचा है जो केंद्र और राज्य/केंद्र शासित प्रदेश की नशा-विरोधी एजेंसियों के बीच समन्वय सुनिश्चित करता है। इसे मज़बूत करने से ड्रग्स तस्करी पर त्वरित और एकीकृत कार्रवाई संभव होती है।
2014 से 2025 के बीच कितनी नशीली दवाएं जब्त हुईं?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के अनुसार 2014 से 2025 के बीच ₹1.71 लाख करोड़ मूल्य की 1 करोड़ 11 लाख किलोग्राम नशीली दवाएं जब्त की गईं। यह 2004-2013 के दस वर्षों में जब्त ₹40,000 करोड़ मूल्य की 26 लाख किलोग्राम ड्रग्स से कई गुना अधिक है।
पुडुचेरी में छात्रों के लिए कौन-से जागरूकता कार्यक्रम लागू होंगे?
बैठक में पूरे केंद्र शासित प्रदेश में छात्रों के लिए लक्षित जागरूकता कार्यक्रम लागू करने पर सहमति बनी। हालाँकि कार्यक्रम के विस्तृत स्वरूप और समयसीमा की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है।
केंद्र सरकार की नशामुक्त भारत नीति क्या है?
गृह मंत्री अमित शाह के अनुसार इस नीति के तीन स्तंभ हैं — आपूर्ति श्रृंखला तोड़ने के लिए कठोर दृष्टिकोण, मांग घटाने के लिए रणनीतिक दृष्टिकोण, और नशे के शिकार लोगों के लिए मानवीय दृष्टिकोण। ड्रग्स बनाने-बेचने वालों के प्रति सख्ती और उपभोक्ताओं के प्रति पुनर्वास की नीति अपनाई जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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