देहरादून में NCB ने ₹236 करोड़ की नशीली दवाएं नष्ट कीं, 303 किलो मादक पदार्थों का सुरक्षित निस्तारण
सारांश
मुख्य बातें
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने 17 जून 2025 को उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई के तहत ₹236 करोड़ से अधिक मूल्य की जब्त नशीली दवाओं को विधिवत नष्ट किया। कुल 303 किलोग्राम मादक पदार्थों का यह निस्तारण 11 अलग-अलग प्री-ट्रायल और पोस्ट-ट्रायल मामलों से जुड़ा था, और इसे देश में नशा-विरोधी अभियान की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
क्या-क्या नष्ट किया गया
नष्ट किए गए मादक पदार्थों में ट्रामाडोल टैबलेट, अल्प्राजोलम टैबलेट और चरस जैसी प्रतिबंधित एवं नियंत्रित श्रेणी की सामग्री शामिल थी। NCB के अनुसार, यह कार्रवाई नियमों के अनुसार संपन्न हुई और इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि जब्त सामग्री किसी भी परिस्थिति में दोबारा अवैध बाज़ार में न पहुँच सके।
NCB की रणनीति और कार्यप्रणाली
ब्यूरो ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर यह जानकारी साझा करते हुए स्पष्ट किया कि जब्त मादक पदार्थों का समयबद्ध निस्तारण एजेंसी की प्रभावी कार्यप्रणाली और तस्करी-विरोधी सख्त नीति का प्रमाण है। अधिकारियों का कहना है कि हाल के वर्षों में देशभर में न केवल तस्करों और गिरोहों पर कार्रवाई तेज हुई है, बल्कि जब्त सामग्री के शीघ्र निस्तारण की प्रक्रिया को भी संस्थागत रूप दिया गया है।
नागरिकों से अपील
NCB ने यह भी रेखांकित किया कि भारत को नशा-मुक्त बनाने के लिए केवल कानून प्रवर्तन एजेंसियों के प्रयास पर्याप्त नहीं हैं — इसमें आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी भी अनिवार्य है। ब्यूरो ने लोगों से अपील की है कि वे अपने आसपास नशीली दवाओं की तस्करी, बिक्री या किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल साझा करें।
मानस हेल्पलाइन: गोपनीय सूचना का माध्यम
इस उद्देश्य के लिए NCB ने 'मानस' हेल्पलाइन (टोल-फ्री नंबर 1933) का उल्लेख किया है। ब्यूरो ने भरोसा दिलाया है कि सूचना देने वाले नागरिक की पहचान पूरी तरह सुरक्षित और गोपनीय रखी जाती है। यह कदम नशा-विरोधी अभियान में जन-भागीदारी को संस्थागत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
आगे क्या
गौरतलब है कि यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब केंद्र सरकार नशा-मुक्त भारत के संकल्प को प्रशासनिक और कानूनी दोनों स्तरों पर मज़बूत कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब्त सामग्री के त्वरित निस्तारण से न केवल पुनः तस्करी का जोखिम घटता है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया में भी पारदर्शिता सुनिश्चित होती है।