क्या सरकार दिव्यांगों को सस्ती और तेज कानूनी सेवाएं देने के लिए कदम उठा रही है? : अर्जुन राम मेघवाल
सारांश
Key Takeaways
- ई-कोर्ट्स प्रोजेक्ट दिव्यांगों के लिए डिजिटल सेवाओं का विस्तार करता है।
- दिव्यांगों के लिए लीगल सर्विस स्कीम, 2024 प्रारंभ की गई है।
- सभी राज्यों में विशेष लीगल सर्विस यूनिट बनाई गई हैं।
- सरकार द्वारा नई सुविधाओं के विकास की योजना है।
- इमारतों के डिज़ाइन में एक्सेसिबिलिटी स्टैंडर्ड्स का पालन किया जाएगा।
नई दिल्ली, १२ दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। ई-कोर्ट्स प्रोजेक्ट के तीसरे चरण में दिव्यांगों और अन्य नागरिकों के लिए एक सहज डिजिटल प्रणाली विकसित करने के लिए अनेक प्रयास किए गए हैं। यह जानकारी शुक्रवार को संसद में प्रस्तुत की गई।
कानून और न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के प्लेटफॉर्म में ऐसे तत्व शामिल हैं जो दिव्यांग व्यक्तियों को आसानी से सामग्री देखने में मदद करते हैं, जिसे सामान्यतः देखना कठिन होता है।
लोकसभा में शुक्रवार को एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि दिव्यांगों के लिए बेहतर डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए ७५२ न्यायालयों (उच्च न्यायालय सहित) की वेबसाइटों को 'एस3डब्ल्यूएएएस' प्लेटफॉर्म (सुरक्षित, स्केलेबल और आसान वेबसाइट एज ए सर्विस) पर लाया गया है। इससे ये वेबसाइटें दिव्यांग व्यक्तियों के लिए आसानी से उपयोग करने योग्य हो गई हैं। सरकार सस्ती, अच्छी और तेज कानूनी सेवाएं प्रदान करने के लिए कई कदम उठा रही है।
अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि लीगल सर्विस अथॉरिटी एक्ट, १९८७ के तहत सामाजिक रूप से कमजोर वर्ग (जिसमें दिव्यांग लोग भी शामिल हैं) को मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण कानूनी सेवाएं मिलती हैं। उन्होंने बताया कि नेशनल लीगल सर्विस अथॉरिटी ने दिव्यांग व्यक्तियों, मानसिक रूप से बीमार और बौद्धिक रूप से दिव्यांग लोगों के लिए “लीगल सर्विस स्कीम, २०२४” की शुरुआत की है। इस योजना का उद्देश्य है कि उन्हें कानूनी और सामाजिक आवश्यकताओं के अनुसार सेवाएं मिलें।
मेघवाल ने बताया कि इस योजना के तहत लद्दाख और दादर एवं नगर हवेली को छोड़कर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मानसिक रूप से बीमार और बौद्धिक रूप से दिव्यांग लोगों के लिए विशेष लीगल सर्विस यूनिट स्थापित की गई हैं। सरकार जिला और अधीनस्थ अदालतों के लिए नई सुविधाओं के विकास के लिए सेंट्रली स्पॉन्सर्ड स्कीम लागू कर रही है।
इसके अंतर्गत कोर्ट हॉल, न्यायिक अधिकारियों के लिए आवासीय यूनिट, वकीलों के हॉल, डिजिटल कंप्यूटर रूम और टॉयलेट कॉम्प्लेक्स का निर्माण किया जा रहा है।
इस योजना की दिशानिर्देशों के अनुसार, राज्य और केंद्र शासित प्रदेश यह सुनिश्चित करते हैं कि ये इमारतें दिव्यांगों के लिए उपयुक्त हों। इसके डिज़ाइन में केंद्रीय लोक निर्माण विभाग और सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा निर्धारित नियम और एक्सेसिबिलिटी स्टैंडर्ड्स का पालन किया जाता है।