13 जुलाई 2026
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गोवा 'बिर्च' अग्निकांड: ईडी ने ₹11.01 करोड़ की संपत्तियाँ कुर्क कीं, कुल अटैचमेंट ₹29.05 करोड़ पहुँची

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गोवा 'बिर्च' अग्निकांड: ईडी ने ₹11.01 करोड़ की संपत्तियाँ कुर्क कीं, कुल अटैचमेंट ₹29.05 करोड़ पहुँची

सारांश

गोवा के अरपोरा में 6 दिसंबर 2025 को हुई भीषण आग — जिसमें 25 लोगों की जान गई — से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने ₹11.01 करोड़ की संपत्तियाँ कुर्क कीं। कुल अटैचमेंट अब ₹29.05 करोड़ पहुँच गई है। जांच में जाली एनओसी, एक्सपायर्ड लाइसेंस और ₹29.78 करोड़ की 'अपराध से अर्जित आय' उजागर हुई है।

मुख्य बातें

ईडी ने 27 मई 2026 को गोवा के अरपोरा स्थित 'बिर्च' प्रतिष्ठान से जुड़े मामले में ₹11.01 करोड़ की अचल संपत्तियाँ अस्थायी रूप से कुर्क कीं।
इस मामले में कुल कुर्की और फ्रीजिंग अब ₹29.05 करोड़ हो गई है।
जांच 6 दिसंबर 2025 की उस आग से जुड़ी है जिसमें 25 लोगों की मौत हुई थी।
प्रतिष्ठान का व्यापार लाइसेंस 31 मार्च 2024 को समाप्त हो चुका था; फायर एनओसी और अन्य अनिवार्य मंजूरियाँ भी नहीं थीं।
जांच में ₹29.78 करोड़ की कमाई को 'अपराध से अर्जित आय' घोषित किया गया।
23 जनवरी 2026 को हुई तलाशी में ₹59 लाख के बैंक खाते फ्रीज और डिजिटल उपकरण जब्त किए गए थे।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के पणजी जोनल ऑफिस ने 27 मई 2026 को गोवा के अरपोरा स्थित प्रतिष्ठान 'बिर्च' के अवैध संचालन से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत ₹11.01 करोड़ की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के अंतर्गत की गई इस कार्रवाई के बाद इस मामले में कुल कुर्की और फ्रीजिंग की राशि अब ₹29.05 करोड़ तक पहुँच गई है।

मामले की पृष्ठभूमि

ईडी ने यह जांच गोवा पुलिस — अंजुना पुलिस स्टेशन और मापुसा पुलिस स्टेशन — द्वारा सौरभ लूथरा और अन्य आरोपियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की। ये एफआईआर 6 दिसंबर 2025 को हुई उस भीषण आग से संबंधित हैं जिसमें 25 लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हुए थे।

इसके अतिरिक्त, एफआईआर में दस्तावेज जालसाजी के आरोप भी शामिल हैं — विशेष रूप से नियामक मंजूरियाँ हासिल करने के लिए नकली अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) और अन्य वैधानिक दस्तावेज इस्तेमाल करने के।

जांच में सामने आए तथ्य

पीएमएलए जांच में पता चला कि प्रतिष्ठान का संचालन एम/एस बीइंग जीएस हॉस्पिटैलिटी गोवा अर्पोरा एलएलपी द्वारा किया जा रहा था — और वह भी बिना अनिवार्य वैधानिक मंजूरियों के, जिनमें फायर एनओसी भी शामिल है। जांच के अनुसार, प्रतिष्ठान के भागीदारों ने कथित तौर पर लाइसेंस प्राप्त करने और इस अवैध इकाई को वैध दिखाने के लिए नकली स्वास्थ्य एनओसी और जाली पुलिस क्लीयरेंस प्रमाण पत्र जमा किए थे।

गौरतलब है कि प्रतिष्ठान का व्यापार लाइसेंस 31 मार्च 2024 को समाप्त हो गया था और उसका नवीनीकरण नहीं कराया गया था। इसके बावजूद भागीदारों ने आपस में मिलीभगत कर व्यावसायिक संचालन जारी रखा।

अपराध से अर्जित आय

जांच में यह भी उजागर हुआ कि प्रतिष्ठान ने वित्त वर्ष 2023-24 से वित्त वर्ष 2025-26 (6 दिसंबर 2025 तक) की अवधि में लगभग ₹29.78 करोड़ का कुल राजस्व अर्जित किया। ईडी ने इस राशि को पीएमएलए के प्रावधानों के तहत 'अपराध से अर्जित आय' के रूप में चिह्नित किया है।

पूर्व कार्रवाइयाँ

23 जनवरी 2026 को जांच के दौरान संबंधित परिसरों पर तलाशी ली गई थी, जिसमें आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण जब्त किए गए और लगभग ₹59 लाख की राशि वाले बैंक खाते फ्रीज किए गए। इससे पहले इस मामले में ₹17.45 करोड़ का एक प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर (पीएओ) भी जारी किया जा चुका था।

आगे क्या होगा

ताज़ा कुर्की के साथ इस मामले में कुल संलग्न और फ्रीज की गई राशि ₹29.05 करोड़ हो गई है। पीएमएलए के तहत मामला अब न्यायनिर्णयन प्राधिकरण के समक्ष जाएगा, जहाँ अस्थायी कुर्की को स्थायी करने अथवा रद्द करने पर निर्णय होगा। यह कार्रवाई गोवा में अवैध रूप से संचालित मनोरंजन प्रतिष्ठानों पर केंद्रीय एजेंसियों की बढ़ती निगरानी का संकेत है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस व्यापक नियामक विफलता की कहानी है जिसमें एक्सपायर्ड लाइसेंस और जाली एनओसी के बावजूद प्रतिष्ठान चलता रहा और 25 लोगों की जान गई। ईडी की कुर्की वित्तीय जवाबदेही तय करती है, लेकिन असली सवाल यह है कि स्थानीय प्रशासन और नियामक निकाय इतने लंबे समय तक इस अवैध संचालन से अनजान कैसे रहे। जब तक लाइसेंसिंग और निरीक्षण प्रणाली में संरचनात्मक सुधार नहीं होता, ऐसे मामले दोहराए जाते रहेंगे — और ईडी की कार्रवाई त्रासदी के बाद की प्रतिक्रिया बनकर रह जाएगी।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गोवा के 'बिर्च' प्रतिष्ठान पर ईडी की कार्रवाई क्यों हुई?
ईडी ने 6 दिसंबर 2025 को अरपोरा स्थित 'बिर्च' में लगी आग — जिसमें 25 लोगों की मौत हुई — और दस्तावेज जालसाजी के मामलों में गोवा पुलिस की एफआईआर के आधार पर पीएमएलए के तहत जांच शुरू की। जांच में अवैध संचालन से अर्जित आय को मनी लॉन्ड्रिंग का आधार माना गया।
इस मामले में अब तक कुल कितनी संपत्ति कुर्क हुई है?
27 मई 2026 की ताज़ा कार्रवाई में ₹11.01 करोड़ की अचल संपत्तियाँ कुर्क की गई हैं। इससे पहले ₹17.45 करोड़ का प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर और ₹59 लाख के बैंक खाते फ्रीज किए जा चुके थे। कुल मिलाकर इस मामले में अब ₹29.05 करोड़ की कुर्की और फ्रीजिंग हो चुकी है।
'बिर्च' प्रतिष्ठान के खिलाफ क्या अनियमितताएँ पाई गईं?
जांच में पाया गया कि प्रतिष्ठान बिना फायर एनओसी, स्वास्थ्य एनओसी और वैध व्यापार लाइसेंस के संचालित हो रहा था। व्यापार लाइसेंस 31 मार्च 2024 को समाप्त हो चुका था। इसके अलावा, कथित तौर पर नकली और जाली दस्तावेज जमा कर नियामक मंजूरियाँ हासिल करने की कोशिश की गई थी।
इस मामले में 'अपराध से अर्जित आय' कितनी है?
ईडी की जांच के अनुसार, प्रतिष्ठान ने वित्त वर्ष 2023-24 से 6 दिसंबर 2025 तक लगभग ₹29.78 करोड़ का राजस्व अर्जित किया, जिसे पीएमएलए के तहत 'अपराध से अर्जित आय' के रूप में चिह्नित किया गया है।
इस मामले में आगे क्या होगा?
अस्थायी कुर्की के बाद मामला पीएमएलए के तहत न्यायनिर्णयन प्राधिकरण के समक्ष जाएगा, जहाँ कुर्की को स्थायी करने या रद्द करने पर फैसला होगा। आरोपी सौरभ लूथरा और अन्य भागीदारों के विरुद्ध आपराधिक कार्यवाही भी समानांतर रूप से जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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