गोवा 'बिर्च' अग्निकांड: ईडी ने ₹11.01 करोड़ की संपत्तियाँ कुर्क कीं, कुल अटैचमेंट ₹29.05 करोड़ पहुँची
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के पणजी जोनल ऑफिस ने 27 मई 2026 को गोवा के अरपोरा स्थित प्रतिष्ठान 'बिर्च' के अवैध संचालन से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत ₹11.01 करोड़ की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के अंतर्गत की गई इस कार्रवाई के बाद इस मामले में कुल कुर्की और फ्रीजिंग की राशि अब ₹29.05 करोड़ तक पहुँच गई है।
मामले की पृष्ठभूमि
ईडी ने यह जांच गोवा पुलिस — अंजुना पुलिस स्टेशन और मापुसा पुलिस स्टेशन — द्वारा सौरभ लूथरा और अन्य आरोपियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की। ये एफआईआर 6 दिसंबर 2025 को हुई उस भीषण आग से संबंधित हैं जिसमें 25 लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हुए थे।
इसके अतिरिक्त, एफआईआर में दस्तावेज जालसाजी के आरोप भी शामिल हैं — विशेष रूप से नियामक मंजूरियाँ हासिल करने के लिए नकली अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) और अन्य वैधानिक दस्तावेज इस्तेमाल करने के।
जांच में सामने आए तथ्य
पीएमएलए जांच में पता चला कि प्रतिष्ठान का संचालन एम/एस बीइंग जीएस हॉस्पिटैलिटी गोवा अर्पोरा एलएलपी द्वारा किया जा रहा था — और वह भी बिना अनिवार्य वैधानिक मंजूरियों के, जिनमें फायर एनओसी भी शामिल है। जांच के अनुसार, प्रतिष्ठान के भागीदारों ने कथित तौर पर लाइसेंस प्राप्त करने और इस अवैध इकाई को वैध दिखाने के लिए नकली स्वास्थ्य एनओसी और जाली पुलिस क्लीयरेंस प्रमाण पत्र जमा किए थे।
गौरतलब है कि प्रतिष्ठान का व्यापार लाइसेंस 31 मार्च 2024 को समाप्त हो गया था और उसका नवीनीकरण नहीं कराया गया था। इसके बावजूद भागीदारों ने आपस में मिलीभगत कर व्यावसायिक संचालन जारी रखा।
अपराध से अर्जित आय
जांच में यह भी उजागर हुआ कि प्रतिष्ठान ने वित्त वर्ष 2023-24 से वित्त वर्ष 2025-26 (6 दिसंबर 2025 तक) की अवधि में लगभग ₹29.78 करोड़ का कुल राजस्व अर्जित किया। ईडी ने इस राशि को पीएमएलए के प्रावधानों के तहत 'अपराध से अर्जित आय' के रूप में चिह्नित किया है।
पूर्व कार्रवाइयाँ
23 जनवरी 2026 को जांच के दौरान संबंधित परिसरों पर तलाशी ली गई थी, जिसमें आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण जब्त किए गए और लगभग ₹59 लाख की राशि वाले बैंक खाते फ्रीज किए गए। इससे पहले इस मामले में ₹17.45 करोड़ का एक प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर (पीएओ) भी जारी किया जा चुका था।
आगे क्या होगा
ताज़ा कुर्की के साथ इस मामले में कुल संलग्न और फ्रीज की गई राशि ₹29.05 करोड़ हो गई है। पीएमएलए के तहत मामला अब न्यायनिर्णयन प्राधिकरण के समक्ष जाएगा, जहाँ अस्थायी कुर्की को स्थायी करने अथवा रद्द करने पर निर्णय होगा। यह कार्रवाई गोवा में अवैध रूप से संचालित मनोरंजन प्रतिष्ठानों पर केंद्रीय एजेंसियों की बढ़ती निगरानी का संकेत है।