11 अगस्त 2026
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भारत की ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा करेगी नौसेना, GRSE में NGOPV 'श्रुति' लॉन्च; वाइस एडमिरल साधु का बड़ा बयान

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भारत की ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा करेगी नौसेना, GRSE में NGOPV 'श्रुति' लॉन्च; वाइस एडमिरल साधु का बड़ा बयान

सारांश

GRSE कोलकाता में NGOPV 'श्रुति' के लॉन्च पर वाइस एडमिरल संजय साधु ने स्पष्ट किया — होर्मुज़ संकट के बीच नौसेना भारत की ऊर्जा आपूर्ति की रक्षा करेगी। 44 युद्धपोतों के ऑर्डर, 85% स्वदेशी सामग्री और ₹70,000 करोड़ के निवेश के साथ भारत 2047 तक वैश्विक शिपबिल्डिंग में 5वें स्थान का लक्ष्य लेकर चल रहा है।

मुख्य बातें

वाइस एडमिरल संजय साधु ने 11 अगस्त 2026 को GRSE, कोलकाता में NGOPV 'श्रुति' के लॉन्च समारोह में नौसेना की ऊर्जा सुरक्षा प्रतिबद्धता दोहराई।
NGOPV 'श्रुति' में 85 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री होगी — 'आत्मनिर्भर भारत' का प्रत्यक्ष उदाहरण।
भारतीय नौसेना ने 44 प्लेटफॉर्म्स का ऑर्डर दिया है, जो सभी भारतीय शिपयार्ड्स में बन रहे हैं।
सरकार ने शिपबिल्डिंग लक्ष्यों के लिए ₹70,000 करोड़ आवंटित किए हैं।
2035 तक वैश्विक जहाज़ निर्माण में 5% हिस्सेदारी और 2047 तक दुनिया के शीर्ष 5 शिपबिल्डिंग देशों में शामिल होने का लक्ष्य।

भारतीय नौसेना समुद्री मार्गों पर आवाजाही की स्वतंत्रता बनाए रखने और देश की ऊर्जा आपूर्ति को निर्बाध रखने के लिए प्रतिबद्ध है — और इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए और अधिक उन्नत युद्धपोतों की आवश्यकता होगी। वॉरशिप प्रोडक्शन एंड एक्विजिशन के कंट्रोलर वाइस एडमिरल संजय साधु ने मंगलवार, 11 अगस्त 2026 को कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) लिमिटेड में नेक्स्ट जेनरेशन ऑफशोर पेट्रोल वेसल (NGOPV) 'श्रुति' के लॉन्च समारोह में यह उद्गार व्यक्त किए।

समारोह और 'श्रुति' की विशेषताएँ

वाइस एडमिरल साधु ने NGOPV 'श्रुति' के लॉन्च को भारतीय शिपयार्ड की क्षमता का उत्सव बताया। उन्होंने कहा, 'यह हमारे शिपयार्ड्स की उन्नत युद्धपोत निर्माण क्षमता का जश्न है।' उन्होंने बताया कि जब यह NGOPV पूरी तरह तैयार होगा, तब इसमें 85 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री होगी — जो 'मेक इन इंडिया' की दिशा में एक ठोस कदम है।

यह बहु-उपयोगी पोत समुद्री सीमाओं की निगरानी के साथ-साथ अन्य सामरिक भूमिकाएँ भी निभाने में सक्षम होगा। वाइस एडमिरल के अनुसार, इस श्रेणी के पोत भारत की समुद्री सुरक्षा संरचना को और मज़बूत बनाएंगे।

44 युद्धपोतों का ऑर्डर, आत्मनिर्भरता की मिसाल

वाइस एडमिरल साधु ने बताया कि भारतीय नौसेना ने 44 प्लेटफॉर्म्स का ऑर्डर दिया है और ये सभी भारतीय शिपयार्ड्स में निर्मित हो रहे हैं। उन्होंने इसे सरकार की 'आत्मनिर्भर भारत' नीति का प्रत्यक्ष प्रमाण बताया। उन्होंने शिपबिल्डिंग उद्योग से जुड़े सभी कर्मचारियों, सुपरवाइज़रों और अन्य हितधारकों से उत्कृष्ट गुणवत्ता वाले प्लेटफॉर्म्स के निर्माण की अपील की।

होर्मुज़ जलडमरूमध्य और ऊर्जा सुरक्षा की चुनौती

क्षेत्रीय भू-राजनीतिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए वाइस एडमिरल साधु ने कहा, 'इस इलाके के हालात — जैसे यूएस-ईरान युद्ध, जिसका होर्मुज़ जलडमरूमध्य जैसे अहम समुद्री मार्गों पर असर पड़ा है — को देखते हुए नौसेना हमारे समुद्री रास्तों की सुरक्षा करने और भारत की ऊर्जा ज़रूरतों व अन्य आवश्यक सामग्री की आपूर्ति सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभा रही है।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में अनिश्चितता बनी हुई है और भारत अपनी ऊर्जा आयात निर्भरता को लेकर रणनीतिक रूप से सतर्क है।

2035 और 2047 के शिपबिल्डिंग लक्ष्य

वाइस एडमिरल साधु ने सरकार की दीर्घकालिक शिपबिल्डिंग महत्वाकांक्षाओं का विवरण दिया। उनके अनुसार, 2035 तक भारतीय शिपयार्ड्स वैश्विक जहाज़ निर्माण में 5 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करें और भारत के वाणिज्यिक जहाज़ बेड़े का कम से कम 50 प्रतिशत स्वदेश में निर्मित हो। इस लक्ष्य के लिए सरकार ने ₹70,000 करोड़ निर्धारित किए हैं।

इससे भी आगे, 2047 तक भारत को वैश्विक शिपबिल्डिंग देशों की सूची में 5वें स्थान पर लाने का लक्ष्य रखा गया है। वाइस एडमिरल ने कहा, 'यह हासिल किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए सभी कर्मचारियों को कड़ी मेहनत करनी होगी।' गौरतलब है कि फिलहाल वैश्विक शिपबिल्डिंग में चीन, दक्षिण कोरिया और जापान का वर्चस्व है, ऐसे में भारत के लिए यह लक्ष्य महत्वाकांक्षी लेकिन सुनियोजित है।

आगे की राह

NGOPV 'श्रुति' का यह लॉन्च भारत की नौसेना आधुनिकीकरण यात्रा में एक और मील का पत्थर है। ₹70,000 करोड़ के सरकारी आवंटन और 44 युद्धपोतों के सक्रिय ऑर्डर के साथ, भारतीय शिपबिल्डिंग उद्योग एक निर्णायक दौर में प्रवेश कर रहा है। वाइस एडमिरल साधु ने समारोह में हिंदी में भी संबोधन किया ताकि उनका संदेश शिपयार्ड के अधिक से अधिक कर्मचारियों तक पहुँच सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा को अपनी प्राथमिकता मान रही है। ₹70,000 करोड़ का आवंटन और 2047 का लक्ष्य महत्वाकांक्षी हैं, लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या भारतीय शिपयार्ड्स चीन, दक्षिण कोरिया और जापान जैसी स्थापित शक्तियों के सामने गुणवत्ता और गति दोनों में टिक पाएंगे — क्योंकि घोषणाएँ और वास्तविक क्षमता-निर्माण के बीच की खाई को पाटना ही इस दशक की असली चुनौती होगी।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

NGOPV 'श्रुति' क्या है और इसे क्यों लॉन्च किया गया?
'श्रुति' एक नेक्स्ट जेनरेशन ऑफशोर पेट्रोल वेसल (NGOPV) है जिसे GRSE, कोलकाता में 11 अगस्त 2026 को लॉन्च किया गया। यह बहु-उपयोगी युद्धपोत समुद्री सीमाओं की निगरानी और अन्य सामरिक भूमिकाओं के लिए तैयार किया गया है, और इसमें 85 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री होगी।
भारतीय नौसेना होर्मुज़ जलडमरूमध्य संकट में क्या भूमिका निभा रही है?
वाइस एडमिरल संजय साधु के अनुसार, यूएस-ईरान युद्ध के कारण होर्मुज़ जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर पड़ रहे असर को देखते हुए नौसेना भारत की ऊर्जा आपूर्ति और आवश्यक सामग्री के निर्बाध प्रवाह को सुनिश्चित करने में सक्रिय भूमिका निभा रही है।
भारत की शिपबिल्डिंग के लिए 2035 और 2047 के क्या लक्ष्य हैं?
2035 तक भारतीय शिपयार्ड्स को वैश्विक जहाज़ निर्माण में 5 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करनी है और भारत के वाणिज्यिक जहाज़ बेड़े का कम से कम 50 प्रतिशत स्वदेश में निर्मित होना चाहिए। 2047 तक भारत को वैश्विक शिपबिल्डिंग देशों की सूची में 5वें स्थान पर पहुँचाने का लक्ष्य है।
सरकार ने शिपबिल्डिंग के लिए कितना बजट तय किया है?
सरकार ने शिपबिल्डिंग लक्ष्यों को पूरा करने के लिए ₹70,000 करोड़ निर्धारित किए हैं। इसके साथ ही नौसेना ने 44 प्लेटफॉर्म्स का ऑर्डर दिया है जो सभी भारतीय शिपयार्ड्स में निर्मित हो रहे हैं।
NGOPV 'श्रुति' में स्वदेशी सामग्री कितनी होगी?
वाइस एडमिरल साधु के अनुसार, NGOPV 'श्रुति' के पूर्ण निर्माण के बाद इसमें 85 प्रतिशत हिस्सा भारत में निर्मित होगा। यह सरकार की 'आत्मनिर्भर भारत' नीति के तहत रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
राष्ट्र प्रेस
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