GRSE यार्ड में लॉन्च हुआ NGOPV 'श्रुति', 2026-27 तक नौसेना को मिलेंगे 5 युद्धपोत
सारांश
मुख्य बातें
गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) लिमिटेड ने 11 अगस्त 2026 को कोलकाता स्थित अपने यार्ड में अगली पीढ़ी के अपतटीय गश्ती पोत (NGOPV) 'श्रुति' को जलावतरण किया। इसी अवसर पर GRSE के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक कमोडोर पी.आर. हरि, आईएन (सेवानिवृत्त) ने घोषणा की कि शिपयार्ड वित्तीय वर्ष 2026-27 के अंत तक भारतीय नौसेना को पाँच युद्धपोत सुपुर्द कर देगा।
श्रुति का जलावतरण: मुख्य घटनाक्रम
'श्रुति' GRSE द्वारा निर्मित चार NGOPV की श्रृंखला में दूसरा पोत है। इससे पहले पहला पोत 'संघमित्रा' 20 मई 2026 को लॉन्च किया गया था। 'श्रुति' का जलावतरण भारतीय नौसेना के युद्धपोत उत्पादन एवं अधिग्रहण नियंत्रक वाइस एडमिरल संजय साधु की पत्नी मानिका साधु ने पारंपरिक अनुष्ठानों और वैदिक श्लोकों के उच्चारण के बीच संपन्न किया। वाइस एडमिरल संजय साधु इस समारोह के मुख्य अतिथि थे।
डिलीवरी योजना और निर्माणाधीन युद्धपोत
कमोडोर हरि ने बताया कि GRSE वर्तमान में चार NGOPV सहित कुल नौ युद्धपोत निर्माणाधीन अवस्था में हैं। वित्तीय वर्ष के अंत तक सुपुर्द किए जाने वाले पाँच युद्धपोतों में उन्नत स्टील्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट 'विंध्यगिरि' और चार पनडुब्बी-रोधी उथले जल नौकाएँ (ASWSWC) शामिल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि शेष दो NGOPV का जलावतरण भी इसी समय-सीमा के भीतर पूरा कर लिया जाएगा।
NGOPV की तकनीकी विशेषताएँ
ये नई पीढ़ी के अपतटीय गश्ती पोत पूर्व में निर्मित पोतों की तुलना में आकार, क्षमता और तकनीक — तीनों मोर्चों पर उन्नत हैं। प्रत्येक पोत लगभग 113 मीटर लंबा और 14.6 मीटर चौड़ा है, जिसका विस्थापन 3,000 टन है। इन पर उन्नत सेंसर और आधुनिक उपकरण लगाए गए हैं।
ये पोत 23 समुद्री मील की अधिकतम गति प्राप्त कर सकते हैं और 14 समुद्री मील की गति पर इनकी परिचालन सहनशक्ति 8,500 समुद्री मील है। मात्र 4 मीटर के ड्राफ्ट की आवश्यकता के कारण ये उथले तटीय जल में भी सहजता से संचालित हो सकते हैं।
परिचालन भूमिकाएँ
NGOPV को बहु-भूमिका संचालन के लिए तैयार किया गया है। ये पोत अपतटीय संपत्तियों की सुरक्षा, समुद्री अवरोधन, विजिट-बोर्ड-सर्च-एंड-सीजर (VBSS) अभियान, निगरानी, बारूदी सुरंग-रोधी अभियान और विशेष बलों के साथ संयुक्त अभियानों में सक्षम हैं। इसके अतिरिक्त ये पोत गैर-लड़ाकू निकासी, काफिला सुरक्षा, समुद्री डाकू-रोधी अभियान, मानवीय सहायता, आपदा राहत, खोज एवं बचाव अभियानों के साथ-साथ अस्पताल पोत और खुफिया जानकारी जुटाने वाले जहाज के रूप में भी कार्य कर सकते हैं।
ऑर्डर की कमी पर चिंता
कमोडोर हरि ने भविष्य के ऑर्डर को लेकर चिंता भी जताई। उन्होंने कहा, 'हमारा मुख्य व्यवसाय युद्धपोत निर्माण है। पाँच युद्धपोतों की डिलीवरी के बाद नौसैनिक प्लेटफार्मों के लिए हमारे ऑर्डर काफी कम हो जाएंगे। यह चिंता का विषय है। हालाँकि, मुझे विश्वास है कि अगली पीढ़ी के कोरवेट के ऑर्डर मिलने से स्थिति में सुधार होगा।' यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारत के रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम घरेलू जहाज निर्माण में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेज़ी से काम कर रहे हैं। अगली पीढ़ी के कोरवेट परियोजना के ऑर्डर मिलने पर GRSE की उत्पादन पाइपलाइन पुनः भर जाने की उम्मीद है।