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भारतीय नौसेना को मिलेंगे तीन युद्धपोत: कोलकाता में INS दुनागिरि, INS अग्रय और INS संशोधक का एकसाथ कमीशन

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भारतीय नौसेना को मिलेंगे तीन युद्धपोत: कोलकाता में INS दुनागिरि, INS अग्रय और INS संशोधक का एकसाथ कमीशन

सारांश

एक ही समारोह में तीन युद्धपोत — फ्रिगेट, पनडुब्बी रोधी क्राफ्ट और सर्वेक्षण पोत। कोलकाता में होने वाला यह कमीशन भारत की 'आत्मनिर्भर नौसेना' की दिशा में दूसरा बड़ा प्रदर्शन है और हिंद महासागर में बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच आया है।

मुख्य बातें

भारतीय नौसेना इस सप्ताह कोलकाता में आईएनएस दुनागिरि , आईएनएस अग्रय और आईएनएस संशोधक को एकसाथ कमीशन करेगी।
आईएनएस दुनागिरि प्रोजेक्ट-17ए का पाँचवाँ फ्रिगेट है, जिसे GRSE ने 80 महीनों में तैयार किया — पिछले पोत से 13 महीने कम।
आईएनएस अग्रय अर्नाला श्रेणी का पाँचवाँ ASW पोत है, जो उथले समुद्र में पनडुब्बी रोधी अभियानों के लिए विशेष रूप से तैयार है।
आईएनएस संशोधक लगभग 110 मीटर लंबा और 3,300 टन वजनी सर्वेक्षण पोत है, जो AUV और ROV से लैस है।
इससे पहले जनवरी 2025 में मुंबई में तीन युद्धपोत एकसाथ कमीशन किए गए थे — यह उसी परंपरा की दूसरी कड़ी है।
प्रोजेक्ट-17ए के तहत आईएनएस महेंद्रगिरि और आईएनएस विंध्यगिरि का कमीशन अभी शेष है।

भारतीय नौसेना इस सप्ताह कोलकाता में एक ऐतिहासिक समारोह के तहत तीन अत्याधुनिक नौसैनिक पोतों — आईएनएस दुनागिरि, आईएनएस अग्रय और आईएनएस संशोधक — को एकसाथ कमीशन करने जा रही है। देश के नौसैनिक आधुनिकीकरण की दिशा में इसे एक निर्णायक पड़ाव माना जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, इस समारोह में केंद्र सरकार के एक वरिष्ठ पदाधिकारी की उपस्थिति संभावित है और यह आयोजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रस्तावित कोलकाता यात्रा के दौरान हो सकता है।

दूसरी बार एकसाथ तीन युद्धपोतों का कमीशन

हाल के वर्षों में यह दूसरा अवसर होगा जब भारतीय नौसेना एकसाथ तीन अग्रिम पंक्ति के नौसैनिक प्लेटफॉर्म को सेवा में शामिल करेगी। इससे पहले जनवरी 2025 में प्रधानमंत्री मोदी ने मुंबई नौसैनिक डॉकयार्ड में विध्वंसक आईएनएस सूरत, फ्रिगेट आईएनएस नीलगिरि और पनडुब्बी आईएनएस वाघशीर को एकसाथ नौसेना में शामिल किया था। यह एकसाथ तीन युद्धपोतों के कमीशन की परंपरा भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता में आई तेज़ी को दर्शाती है।

आईएनएस दुनागिरि: प्रोजेक्ट-17ए का पाँचवाँ फ्रिगेट

आईएनएस दुनागिरि प्रोजेक्ट-17ए के तहत निर्मित पाँचवाँ फ्रिगेट है और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) द्वारा बनाया गया अपनी श्रेणी का दूसरा युद्धपोत है। यह ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों और क्लोज-इन वेपन सिस्टम से लैस है।

इस पोत में कंबाइंड डीजल ऑर गैस (CODOG) प्रणोदन प्रणाली और इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म मैनेजमेंट सिस्टम जैसी उन्नत तकनीकें शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि इसका निर्माण केवल 80 महीनों में पूरा हुआ, जबकि इसी श्रेणी के पहले पोत आईएनएस नीलगिरि के निर्माण में 93 महीने लगे थे — यह उत्पादन दक्षता में सुधार का स्पष्ट संकेत है। प्रोजेक्ट-17ए के अंतर्गत आईएनएस महेंद्रगिरि और आईएनएस विंध्यगिरि का कमीशन अभी शेष है।

आईएनएस अग्रय: पनडुब्बी रोधी अभियानों का नया हथियार

आईएनएस अग्रय, 16 पोतों वाले अर्नाला श्रेणी के एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW-SWC) कार्यक्रम का पाँचवाँ पोत है, जिसे वर्ष 2013 में मंजूरी दी गई थी। तटीय और उथले समुद्री क्षेत्रों में संचालन के लिए विशेष रूप से तैयार इस पोत में हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर और अत्याधुनिक सोनार प्रणाली लगी है।

यह पोत उथले समुद्री इलाकों में पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने में सक्षम है। गौरतलब है कि पाकिस्तान नौसेना द्वारा हैंगोर श्रेणी की पनडुब्बियों को शामिल कर अपनी पनडुब्बी क्षमता बढ़ाने की कोशिशों के बीच आईएनएस अग्रय की रणनीतिक उपयोगिता और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

आईएनएस संशोधक: समुद्री सर्वेक्षण की नई ताकत

आईएनएस संशोधक, संध्यायक श्रेणी के सर्वेक्षण पोत कार्यक्रम का चौथा और अंतिम जहाज है। लगभग 110 मीटर लंबे और 3,300 टन वजनी इस पोत में ऑटोनॉमस अंडरवॉटर व्हीकल (AUV), रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल (ROV) और समुद्र तल की मैपिंग एवं नौवहन चार्ट तैयार करने वाली आधुनिक हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण प्रणालियाँ लगी हैं। यह पोत भारत की समुद्री डोमेन जागरूकता और नौवहन सुरक्षा क्षमता को नई ऊँचाई देगा।

भारतीय नौसेना की बढ़ती ताकत

इन तीनों पोतों के कमीशन से भारतीय नौसेना की सतही युद्ध क्षमता, पनडुब्बी रोधी अभियान और समुद्री सर्वेक्षण क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। यह ऐसे समय में आया है जब हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज़ हो रही है। आने वाले महीनों में प्रोजेक्ट-17ए के शेष दो फ्रिगेटों के कमीशन के साथ भारत की नौसैनिक शक्ति और सुदृढ़ होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर प्रशिक्षित मानव संसाधन और रखरखाव पारिस्थितिकी तंत्र उतनी तेज़ी से नहीं बढ़ रहे। हिंद महासागर में चीन की बढ़ती उपस्थिति के बीच इन पोतों की परिचालन प्रभावशीलता ही असली मापदंड होगी, न केवल कमीशन की संख्या।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस सप्ताह कोलकाता में कौन-से तीन युद्धपोत कमीशन किए जाएँगे?
भारतीय नौसेना कोलकाता में आईएनएस दुनागिरि (प्रोजेक्ट-17ए फ्रिगेट), आईएनएस अग्रय (पनडुब्बी रोधी उथले जल पोत) और आईएनएस संशोधक (हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण पोत) को एकसाथ कमीशन करेगी। सूत्रों के अनुसार, इस समारोह में केंद्र सरकार के एक वरिष्ठ पदाधिकारी के शामिल होने की संभावना है।
आईएनएस दुनागिरि की खासियत क्या है?
आईएनएस दुनागिरि प्रोजेक्ट-17ए के तहत GRSE द्वारा निर्मित पाँचवाँ फ्रिगेट है, जो ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों और CODOG प्रणोदन प्रणाली से लैस है। इसका निर्माण केवल 80 महीनों में पूरा हुआ, जो इसी श्रेणी के पहले पोत से 13 महीने कम है।
आईएनएस अग्रय किस काम के लिए बनाया गया है?
आईएनएस अग्रय को विशेष रूप से तटीय और उथले समुद्री क्षेत्रों में पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने के लिए तैयार किया गया है। इसमें हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर और अत्याधुनिक सोनार प्रणाली लगी है।
क्या पहले भी भारतीय नौसेना ने एकसाथ तीन युद्धपोत कमीशन किए हैं?
हाँ, जनवरी 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुंबई नौसैनिक डॉकयार्ड में आईएनएस सूरत , आईएनएस नीलगिरि और आईएनएस वाघशीर को एकसाथ नौसेना में शामिल किया था। कोलकाता का यह समारोह उसी परंपरा की दूसरी कड़ी है।
प्रोजेक्ट-17ए के तहत अभी कौन-से पोत कमीशन होने बाकी हैं?
प्रोजेक्ट-17ए के अंतर्गत आईएनएस महेंद्रगिरि और आईएनएस विंध्यगिरि का कमीशन अभी शेष है। आईएनएस दुनागिरि इस श्रेणी का पाँचवाँ पोत है और GRSE द्वारा निर्मित दूसरा फ्रिगेट है।
राष्ट्र प्रेस
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