भारतीय नौसेना को मिलेंगे तीन युद्धपोत: कोलकाता में INS दुनागिरि, INS अग्रय और INS संशोधक का एकसाथ कमीशन
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय नौसेना इस सप्ताह कोलकाता में एक ऐतिहासिक समारोह के तहत तीन अत्याधुनिक नौसैनिक पोतों — आईएनएस दुनागिरि, आईएनएस अग्रय और आईएनएस संशोधक — को एकसाथ कमीशन करने जा रही है। देश के नौसैनिक आधुनिकीकरण की दिशा में इसे एक निर्णायक पड़ाव माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, इस समारोह में केंद्र सरकार के एक वरिष्ठ पदाधिकारी की उपस्थिति संभावित है और यह आयोजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रस्तावित कोलकाता यात्रा के दौरान हो सकता है।
दूसरी बार एकसाथ तीन युद्धपोतों का कमीशन
हाल के वर्षों में यह दूसरा अवसर होगा जब भारतीय नौसेना एकसाथ तीन अग्रिम पंक्ति के नौसैनिक प्लेटफॉर्म को सेवा में शामिल करेगी। इससे पहले जनवरी 2025 में प्रधानमंत्री मोदी ने मुंबई नौसैनिक डॉकयार्ड में विध्वंसक आईएनएस सूरत, फ्रिगेट आईएनएस नीलगिरि और पनडुब्बी आईएनएस वाघशीर को एकसाथ नौसेना में शामिल किया था। यह एकसाथ तीन युद्धपोतों के कमीशन की परंपरा भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता में आई तेज़ी को दर्शाती है।
आईएनएस दुनागिरि: प्रोजेक्ट-17ए का पाँचवाँ फ्रिगेट
आईएनएस दुनागिरि प्रोजेक्ट-17ए के तहत निर्मित पाँचवाँ फ्रिगेट है और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) द्वारा बनाया गया अपनी श्रेणी का दूसरा युद्धपोत है। यह ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों और क्लोज-इन वेपन सिस्टम से लैस है।
इस पोत में कंबाइंड डीजल ऑर गैस (CODOG) प्रणोदन प्रणाली और इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म मैनेजमेंट सिस्टम जैसी उन्नत तकनीकें शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि इसका निर्माण केवल 80 महीनों में पूरा हुआ, जबकि इसी श्रेणी के पहले पोत आईएनएस नीलगिरि के निर्माण में 93 महीने लगे थे — यह उत्पादन दक्षता में सुधार का स्पष्ट संकेत है। प्रोजेक्ट-17ए के अंतर्गत आईएनएस महेंद्रगिरि और आईएनएस विंध्यगिरि का कमीशन अभी शेष है।
आईएनएस अग्रय: पनडुब्बी रोधी अभियानों का नया हथियार
आईएनएस अग्रय, 16 पोतों वाले अर्नाला श्रेणी के एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW-SWC) कार्यक्रम का पाँचवाँ पोत है, जिसे वर्ष 2013 में मंजूरी दी गई थी। तटीय और उथले समुद्री क्षेत्रों में संचालन के लिए विशेष रूप से तैयार इस पोत में हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर और अत्याधुनिक सोनार प्रणाली लगी है।
यह पोत उथले समुद्री इलाकों में पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने में सक्षम है। गौरतलब है कि पाकिस्तान नौसेना द्वारा हैंगोर श्रेणी की पनडुब्बियों को शामिल कर अपनी पनडुब्बी क्षमता बढ़ाने की कोशिशों के बीच आईएनएस अग्रय की रणनीतिक उपयोगिता और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
आईएनएस संशोधक: समुद्री सर्वेक्षण की नई ताकत
आईएनएस संशोधक, संध्यायक श्रेणी के सर्वेक्षण पोत कार्यक्रम का चौथा और अंतिम जहाज है। लगभग 110 मीटर लंबे और 3,300 टन वजनी इस पोत में ऑटोनॉमस अंडरवॉटर व्हीकल (AUV), रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल (ROV) और समुद्र तल की मैपिंग एवं नौवहन चार्ट तैयार करने वाली आधुनिक हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण प्रणालियाँ लगी हैं। यह पोत भारत की समुद्री डोमेन जागरूकता और नौवहन सुरक्षा क्षमता को नई ऊँचाई देगा।
भारतीय नौसेना की बढ़ती ताकत
इन तीनों पोतों के कमीशन से भारतीय नौसेना की सतही युद्ध क्षमता, पनडुब्बी रोधी अभियान और समुद्री सर्वेक्षण क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। यह ऐसे समय में आया है जब हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज़ हो रही है। आने वाले महीनों में प्रोजेक्ट-17ए के शेष दो फ्रिगेटों के कमीशन के साथ भारत की नौसैनिक शक्ति और सुदृढ़ होगी।