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तीन स्वदेशी युद्धपोत नौसेना में शामिल: मोदी ने कोलकाता में आईएनएस दूनागिरी, अग्रय और संशोधक किए कमीशन

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तीन स्वदेशी युद्धपोत नौसेना में शामिल: मोदी ने कोलकाता में आईएनएस दूनागिरी, अग्रय और संशोधक किए कमीशन

सारांश

कोलकाता में मोदी ने एक साथ तीन स्वदेशी युद्धपोत नौसेना को सौंपे — यह महज एक समारोह नहीं, बल्कि भारत के 'खरीददार से निर्माता' बनने की घोषणा है। 40 से अधिक 'मेड इन इंडिया' पोत पहले ही शामिल हो चुके हैं, 45 और निर्माणाधीन हैं।

मुख्य बातें

PM मोदी ने 21 जून 2026 को कोलकाता के श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह पर आईएनएस दूनागिरी , आईएनएस अग्रय और आईएनएस संशोधक को भारतीय नौसेना में कमीशन किया।
तीनों युद्धपोत पूरी तरह स्वदेशी डिजाइन और निर्माण के हैं — भारतीय इंजीनियरों, उद्योगों और श्रमिकों द्वारा तैयार।
बीते वर्षों में 40 से अधिक 'मेड इन इंडिया' युद्धपोत और पनडुब्बियाँ नौसेना में शामिल हो चुकी हैं।
वर्तमान में 45 बड़े नौसैनिक प्लेटफॉर्म निर्माणाधीन हैं।
मोदी ने समुद्री क्षेत्र को लाखों रोज़गार पैदा करने वाला इंजन बताया।
21 जून को विश्व जल सर्वेक्षण दिवस पर आईएनएस संशोधक — भारत का सबसे उन्नत जल-सर्वेक्षण जहाज — कमीशन किया गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 जून 2026 को कोलकाता के श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह पर पूरी तरह स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित तीन युद्धपोतों — आईएनएस दूनागिरी, आईएनएस अग्रय और आईएनएस संशोधक — को भारतीय नौसेना में औपचारिक रूप से शामिल किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि जिस देश का समुद्री सामर्थ्य मजबूत होगा, उसका आर्थिक और रणनीतिक प्रभाव भी उतना ही सशक्त होगा, और भारत इसी दिशा में स्वयं को तैयार कर रहा है।

कमीशनिंग समारोह: मुख्य घटनाक्रम

मोदी ने अपने संबोधन में इस बात पर विशेष ज़ोर दिया कि 21 जून को विश्व जल सर्वेक्षण दिवस (World Hydrography Day) के रूप में भी मनाया जाता है। उन्होंने इसे एक 'अद्भुत संयोग' बताया कि इसी दिन भारत का सबसे उन्नत जल-सर्वेक्षण जहाज आईएनएस संशोधक नौसेना को सौंपा जा रहा है। तीनों युद्धपोत भारतीय इंजीनियरों, उद्योगों और श्रमिकों के सामूहिक परिश्रम का प्रतिफल बताए गए।

आत्मनिर्भरता की यात्रा: आईएनएस विक्रांत से आगे

मोदी ने आईएनएस विक्रांत के कमीशनिंग को इस यात्रा का आरंभिक पड़ाव बताते हुए कहा कि आज के तीनों युद्धपोत उसी आत्मनिर्भरता की राह को नई गति दे रहे हैं। उन्होंने कहा, 'आईएनएस विक्रांत से लेकर आज तक की यात्रा सिर्फ नए युद्धपोतों की यात्रा नहीं है — यह भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता की यात्रा है।' गौरतलब है कि बीते वर्षों में 40 से अधिक 'मेड इन इंडिया' युद्धपोत और पनडुब्बियाँ नौसेना में शामिल हो चुकी हैं और वर्तमान में 45 बड़े नौसैनिक प्लेटफॉर्म निर्माणाधीन हैं।

समुद्री शक्ति और रोज़गार: व्यापक दृष्टिकोण

प्रधानमंत्री ने समुद्री क्षेत्र को केवल सुरक्षा का नहीं, बल्कि रोज़गार और आर्थिक विकास का इंजन भी बताया। उनके अनुसार एक आधुनिक युद्धपोत के निर्माण में सैकड़ों टन स्टील, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और हज़ारों पुर्जे लगते हैं — जिसके पीछे हज़ारों कंपनियाँ और युवा कार्यरत होते हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत का समुद्री क्षेत्र लाखों रोज़गार पैदा करने की क्षमता रखता है।

रक्षा में 'निर्माता' बनने का संकल्प

मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत रक्षा क्षेत्र में केवल खरीददार बनकर नहीं रहना चाहता। उन्होंने कहा, 'मेरी शक्ति की पहचान वैश्विक बाज़ार बनने से नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता पर है। भारत निर्माता बनना चाहता है और जिस दिन निर्माता बनेंगे, उस दिन निर्णायक भी होंगे।' यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा को लेकर तनाव बढ़ रहा है और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है।

आगे की राह

तीनों युद्धपोतों की कमीशनिंग के साथ भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। 45 नौसैनिक प्लेटफॉर्म के निर्माणाधीन होने के साथ, भारत के रक्षा औद्योगिक आधार का विस्तार अगले कुछ वर्षों में और तेज़ होने के संकेत हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि '45 निर्माणाधीन प्लेटफॉर्म' की समयसीमा और गुणवत्ता पर सार्वजनिक जवाबदेही कितनी है। रक्षा निर्यात के आँकड़े बढ़ रहे हैं, फिर भी कुछ प्रमुख प्रणालियों में आयात-निर्भरता बनी हुई है — यह विरोधाभास मुख्यधारा की कवरेज में अक्सर अनदेखा रह जाता है। 'निर्माता से निर्णायक' का नारा तब सार्थक होगा जब महत्वपूर्ण तकनीक — जैसे उन्नत सोनार, प्रणोदन प्रणाली — पूरी तरह स्वदेशी हों।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईएनएस दूनागिरी, आईएनएस अग्रय और आईएनएस संशोधक क्या हैं?
ये तीन स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित युद्धपोत हैं जिन्हें 21 जून 2026 को भारतीय नौसेना में शामिल किया गया। आईएनएस संशोधक भारत का सबसे उन्नत जल-सर्वेक्षण जहाज है, जबकि आईएनएस दूनागिरी और आईएनएस अग्रय नौसेना की परिचालन क्षमता को मजबूत करते हैं।
यह कमीशनिंग समारोह कहाँ और कब हुआ?
यह समारोह 21 जून 2026 को कोलकाता के श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह पर आयोजित हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं उपस्थित रहकर तीनों युद्धपोतों को नौसेना को सौंपा।
भारत में अभी कितने नौसैनिक प्लेटफॉर्म निर्माणाधीन हैं?
वर्तमान में 45 बड़े नौसैनिक प्लेटफॉर्म निर्माणाधीन हैं। इसके अलावा बीते वर्षों में 40 से अधिक 'मेड इन इंडिया' युद्धपोत और पनडुब्बियाँ नौसेना में पहले ही शामिल हो चुकी हैं।
मोदी ने समुद्री क्षेत्र को रोज़गार से कैसे जोड़ा?
प्रधानमंत्री ने कहा कि एक आधुनिक युद्धपोत में सैकड़ों टन स्टील, इलेक्ट्रॉनिक्स और हज़ारों पुर्जे लगते हैं, जिससे हज़ारों कंपनियाँ और युवा जुड़ते हैं। उनके अनुसार आने वाले वर्षों में भारत का समुद्री क्षेत्र लाखों रोज़गार पैदा करने की क्षमता रखता है।
आईएनएस संशोधक की विशेषता क्या है?
आईएनएस संशोधक भारत का सबसे उन्नत जल-सर्वेक्षण जहाज (Hydrographic Survey Vessel) है। इसे विश्व जल सर्वेक्षण दिवस (21 जून) पर कमीशन किया गया, जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने एक 'अद्भुत संयोग' बताया।
राष्ट्र प्रेस
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