आईएनएस दूनागिरी: कोलकाता शिपयार्ड में तैयार स्वदेशी युद्धपोत, 80% से अधिक उपकरण भारतीय
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता स्थित शिपयार्ड में भारतीय नौसेना के स्वदेशी युद्धपोत निर्माण कार्यक्रम ने एक और निर्णायक उपलब्धि दर्ज की है — पी-17ए श्रेणी के अत्याधुनिक युद्धपोत आईएनएस दूनागिरी को नौसेना में शामिल किया जा रहा है। यह जहाज पूरी तरह भारत में कल्पित, डिजाइन और निर्मित किया गया है, जो 'आत्मनिर्भर भारत' रक्षा अभियान की एक ठोस अभिव्यक्ति है।
स्वदेशी डिजाइन और निर्माण की उपलब्धि
नेवल डिजाइन ब्यूरो के कैप्टन मनीष प्रकाश ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में युद्धपोत डिजाइन और निर्माण के क्षेत्र में देश की स्वदेशी क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि पिछले 15 महीनों के दौरान इसी श्रेणी के कई जहाज नौसेना को सौंपे जा चुके हैं। गौरतलब है कि पी-17ए श्रेणी के जहाजों के नाम पर्वतों के नाम पर रखे गए हैं, जो भारत की सांस्कृतिक और पौराणिक विरासत से जुड़े हैं।
एग्जीक्यूटिव ऑफिसर लेफ्टिनेंट कमांडर ऋषभ ने कहा कि कुछ ही वर्षों में डिजाइन चरण से पूर्ण युद्धपोत तक पहुँचना भारत की जहाज निर्माण क्षमता का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत रक्षा निर्यात के क्षेत्र में भी वैश्विक स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है।
आधुनिक प्रोपल्शन और युद्धक क्षमता
इंजीनियर ऑफिसर लेफ्टिनेंट कमांडर पीयूष ने बताया कि आईएनएस दूनागिरी में आधुनिक प्रोपल्शन तकनीक का उपयोग किया गया है, जिससे इसकी गतिशीलता और संचालन क्षमता बेहतर होती है। यह तकनीक जहाज की गति और नियंत्रण को अधिक प्रभावी बनाती है।
जहाज के कमांडर सुनील मल्होत्रा ने बताया कि छोटे आकार के बावजूद इसमें अत्याधुनिक हथियार और सेंसर सिस्टम लगे हैं — जिनमें स्वदेशी सोनार, कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम, रॉकेट लॉन्चर, टॉरपीडो ट्यूब और डिकॉय सिस्टम शामिल हैं। यह जहाज मुख्य रूप से पनडुब्बी रोधी युद्ध (एंटी-सबमरीन वॉरफेयर) के लिए तैयार किया गया है और समुद्री क्षेत्रों में पनडुब्बियों की पहचान तथा निगरानी में सक्षम है।
80% से अधिक स्वदेशी उपकरण
इलेक्ट्रिकल ऑफिसर कमांडर दीक्षित मन्नन ने बताया कि आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत इन जहाजों में 80 प्रतिशत से अधिक उपकरण और प्रणालियाँ स्वदेशी हैं। पावर जनरेशन सिस्टम, नेविगेशन सिस्टम और प्लेटफॉर्म मैनेजमेंट सिस्टम सहित अधिकांश महत्वपूर्ण तकनीक भारतीय उद्योगों द्वारा विकसित की गई है। उन्होंने यह भी बताया कि जहाज में लगे हाइड्रोग्राफिक्स सेंसर अत्यंत आधुनिक हैं और इसे अन्य जहाजों से अलग श्रेणी में रखते हैं।
ऑपरेशन्स रूम: योजना से क्रियान्वयन तक
सीनियर हाइड्रोग्राफिक सर्वेयर लेफ्टिनेंट कमांडर मनरीप सिंह ओबेरॉय ने बताया कि ऑपरेशन्स रूम से किसी भी अभियान की योजना, समन्वय, निगरानी और क्रियान्वयन की तैयारी की जाती है। कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन दिव्या आलोक ने कहा कि पी-17ए श्रेणी के जहाजों के नाम पर्वतों पर रखे गए हैं और इस दृष्टि से दूनागिरी भारत की सांस्कृतिक और पौराणिक विरासत से जुड़ा हुआ है।
आगे की राह
आईएनएस दूनागिरी का नौसेना में शामिल होना भारत के समुद्री रक्षा ढाँचे को और सुदृढ़ करेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, पी-17ए श्रेणी के जहाजों की श्रृंखला हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की निगरानी और प्रतिक्रिया क्षमता को नई ऊँचाई देगी।