9 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

आईएनएस दूनागिरी: कोलकाता शिपयार्ड में तैयार स्वदेशी युद्धपोत, 80% से अधिक उपकरण भारतीय

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
आईएनएस दूनागिरी: कोलकाता शिपयार्ड में तैयार स्वदेशी युद्धपोत, 80% से अधिक उपकरण भारतीय

सारांश

कोलकाता शिपयार्ड से निकला आईएनएस दूनागिरी सिर्फ एक युद्धपोत नहीं — यह भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमता का प्रमाण है। 80% से अधिक भारतीय उपकरणों से लैस यह पी-17ए फ्रिगेट पनडुब्बी रोधी युद्ध में माहिर है और हिंद महासागर में भारत की समुद्री ताकत को नई धार देगा।

मुख्य बातें

आईएनएस दूनागिरी पी-17ए श्रेणी का स्वदेशी युद्धपोत है, जिसे कोलकाता के शिपयार्ड में तैयार किया गया है।
जहाज में 80% से अधिक उपकरण और प्रणालियाँ स्वदेशी हैं — जिनमें सोनार, कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम और नेविगेशन सिस्टम शामिल हैं।
यह जहाज मुख्यतः पनडुब्बी रोधी युद्ध (एंटी-सबमरीन वॉरफेयर) के लिए डिज़ाइन किया गया है।
पिछले 15 महीनों में इसी श्रेणी के कई जहाज भारतीय नौसेना को सौंपे जा चुके हैं।
आधुनिक हाइड्रोग्राफिक्स सेंसर , रॉकेट लॉन्चर , टॉरपीडो ट्यूब और डिकॉय सिस्टम इसे समकालीन समुद्री खतरों से निपटने में सक्षम बनाते हैं।
पी-17ए श्रेणी के जहाजों के नाम पर्वतों पर रखे गए हैं; दूनागिरी भारत की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा नाम है।

कोलकाता स्थित शिपयार्ड में भारतीय नौसेना के स्वदेशी युद्धपोत निर्माण कार्यक्रम ने एक और निर्णायक उपलब्धि दर्ज की है — पी-17ए श्रेणी के अत्याधुनिक युद्धपोत आईएनएस दूनागिरी को नौसेना में शामिल किया जा रहा है। यह जहाज पूरी तरह भारत में कल्पित, डिजाइन और निर्मित किया गया है, जो 'आत्मनिर्भर भारत' रक्षा अभियान की एक ठोस अभिव्यक्ति है।

स्वदेशी डिजाइन और निर्माण की उपलब्धि

नेवल डिजाइन ब्यूरो के कैप्टन मनीष प्रकाश ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में युद्धपोत डिजाइन और निर्माण के क्षेत्र में देश की स्वदेशी क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि पिछले 15 महीनों के दौरान इसी श्रेणी के कई जहाज नौसेना को सौंपे जा चुके हैं। गौरतलब है कि पी-17ए श्रेणी के जहाजों के नाम पर्वतों के नाम पर रखे गए हैं, जो भारत की सांस्कृतिक और पौराणिक विरासत से जुड़े हैं।

एग्जीक्यूटिव ऑफिसर लेफ्टिनेंट कमांडर ऋषभ ने कहा कि कुछ ही वर्षों में डिजाइन चरण से पूर्ण युद्धपोत तक पहुँचना भारत की जहाज निर्माण क्षमता का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत रक्षा निर्यात के क्षेत्र में भी वैश्विक स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है।

आधुनिक प्रोपल्शन और युद्धक क्षमता

इंजीनियर ऑफिसर लेफ्टिनेंट कमांडर पीयूष ने बताया कि आईएनएस दूनागिरी में आधुनिक प्रोपल्शन तकनीक का उपयोग किया गया है, जिससे इसकी गतिशीलता और संचालन क्षमता बेहतर होती है। यह तकनीक जहाज की गति और नियंत्रण को अधिक प्रभावी बनाती है।

जहाज के कमांडर सुनील मल्होत्रा ने बताया कि छोटे आकार के बावजूद इसमें अत्याधुनिक हथियार और सेंसर सिस्टम लगे हैं — जिनमें स्वदेशी सोनार, कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम, रॉकेट लॉन्चर, टॉरपीडो ट्यूब और डिकॉय सिस्टम शामिल हैं। यह जहाज मुख्य रूप से पनडुब्बी रोधी युद्ध (एंटी-सबमरीन वॉरफेयर) के लिए तैयार किया गया है और समुद्री क्षेत्रों में पनडुब्बियों की पहचान तथा निगरानी में सक्षम है।

80% से अधिक स्वदेशी उपकरण

इलेक्ट्रिकल ऑफिसर कमांडर दीक्षित मन्नन ने बताया कि आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत इन जहाजों में 80 प्रतिशत से अधिक उपकरण और प्रणालियाँ स्वदेशी हैं। पावर जनरेशन सिस्टम, नेविगेशन सिस्टम और प्लेटफॉर्म मैनेजमेंट सिस्टम सहित अधिकांश महत्वपूर्ण तकनीक भारतीय उद्योगों द्वारा विकसित की गई है। उन्होंने यह भी बताया कि जहाज में लगे हाइड्रोग्राफिक्स सेंसर अत्यंत आधुनिक हैं और इसे अन्य जहाजों से अलग श्रेणी में रखते हैं।

ऑपरेशन्स रूम: योजना से क्रियान्वयन तक

सीनियर हाइड्रोग्राफिक सर्वेयर लेफ्टिनेंट कमांडर मनरीप सिंह ओबेरॉय ने बताया कि ऑपरेशन्स रूम से किसी भी अभियान की योजना, समन्वय, निगरानी और क्रियान्वयन की तैयारी की जाती है। कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन दिव्या आलोक ने कहा कि पी-17ए श्रेणी के जहाजों के नाम पर्वतों पर रखे गए हैं और इस दृष्टि से दूनागिरी भारत की सांस्कृतिक और पौराणिक विरासत से जुड़ा हुआ है।

आगे की राह

आईएनएस दूनागिरी का नौसेना में शामिल होना भारत के समुद्री रक्षा ढाँचे को और सुदृढ़ करेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, पी-17ए श्रेणी के जहाजों की श्रृंखला हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की निगरानी और प्रतिक्रिया क्षमता को नई ऊँचाई देगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

असली कसौटी यह है कि क्या यह तकनीकी आत्मनिर्भरता परिचालन विश्वसनीयता में भी बराबरी करती है, क्योंकि अतीत में कुछ स्वदेशी प्रणालियों को समुद्री परिनियोजन में चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। हिंद महासागर में चीन की बढ़ती पनडुब्बी गतिविधि के संदर्भ में पनडुब्बी रोधी क्षमता पर यह ध्यान रणनीतिक दृष्टि से सटीक है। पी-17ए श्रृंखला की सफलता भारत के रक्षा निर्यात महत्वाकांक्षाओं की भी परीक्षा होगी।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईएनएस दूनागिरी क्या है और यह किस श्रेणी का युद्धपोत है?
आईएनएस दूनागिरी भारतीय नौसेना का पी-17ए श्रेणी का स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट है, जिसे कोलकाता के शिपयार्ड में डिजाइन और निर्मित किया गया है। यह जहाज मुख्यतः पनडुब्बी रोधी युद्ध के लिए तैयार किया गया है और इसमें 80% से अधिक स्वदेशी उपकरण लगे हैं।
आईएनएस दूनागिरी में कौन-कौन सी प्रमुख तकनीकें और हथियार प्रणालियाँ हैं?
इस जहाज में स्वदेशी सोनार, कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम, रॉकेट लॉन्चर, टॉरपीडो ट्यूब, डिकॉय सिस्टम और अत्याधुनिक हाइड्रोग्राफिक्स सेंसर शामिल हैं। पावर जनरेशन, नेविगेशन और प्लेटफॉर्म मैनेजमेंट सिस्टम भी भारतीय उद्योगों द्वारा विकसित किए गए हैं।
पी-17ए श्रेणी के जहाजों के नाम पर्वतों पर क्यों रखे गए हैं?
कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन दिव्या आलोक के अनुसार, पी-17ए श्रेणी के सभी जहाजों के नाम पर्वतों के नाम पर रखे गए हैं, जो भारत की सांस्कृतिक और पौराणिक विरासत से जुड़े हैं। 'दूनागिरी' भी इसी परंपरा का हिस्सा है।
भारत की स्वदेशी युद्धपोत निर्माण क्षमता कितनी तेज़ी से बढ़ी है?
नेवल डिजाइन ब्यूरो के कैप्टन मनीष प्रकाश के अनुसार, पिछले 15 महीनों में पी-17ए श्रेणी के कई जहाज नौसेना को सौंपे जा चुके हैं। डिजाइन चरण से पूर्ण युद्धपोत तक कुछ ही वर्षों में पहुँचना भारत की जहाज निर्माण क्षमता में आई तेज़ी को दर्शाता है।
आईएनएस दूनागिरी भारत की समुद्री सुरक्षा के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
यह जहाज पनडुब्बी रोधी युद्ध में विशेष रूप से सक्षम है, जो हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती पनडुब्बी गतिविधियों के मद्देनज़र रणनीतिक रूप से अहम है। 80% से अधिक स्वदेशी उपकरणों के साथ यह आत्मनिर्भर भारत रक्षा नीति की व्यावहारिक सफलता का प्रतीक है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 6 दिन पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 1 साल पहले