आईएनएस दूनागिरी, आईएनएस संशोधक और आईएनएस अग्रय नौसेना में शामिल, PM मोदी ने कोलकाता में किया शुभारंभ
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 जून 2026 को कोलकाता स्थित श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह पर स्वदेशी रूप से डिज़ाइन और निर्मित तीन नौसैनिक जहाज़ों — उन्नत स्टील्थ फ्रिगेट आईएनएस दूनागिरी, सर्वेक्षण पोत आईएनएस संशोधक और पनडुब्बी-रोधी उथले जल पोत आईएनएस अग्रय — को भारतीय नौसेना में औपचारिक रूप से शामिल किया। इस अवसर पर मोदी ने कहा कि यह आयोजन आत्मनिर्भर भारत, सुरक्षित भारत और विकसित भारत की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।
तीनों जहाज़ों की विशेषताएँ
तीनों युद्धपोत भारतीय नौसेना के युद्धपोत डिज़ाइन ब्यूरो द्वारा डिज़ाइन किए गए और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE), कोलकाता द्वारा निर्मित किए गए हैं। इनमें 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जो भारत की रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। निर्माण प्रक्रिया में 200 से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) सहित भारतीय उद्योग की व्यापक भागीदारी रही।
आईएनएस दूनागिरी एक उन्नत स्टील्थ फ्रिगेट है, आईएनएस संशोधक भारत का सबसे उन्नत जलविज्ञानीय सर्वेक्षण पोत है, जबकि आईएनएस अग्रय पनडुब्बी-रोधी उथले जल अभियानों के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है।
PM मोदी का संबोधन और एक्स पर पोस्ट
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि ये जहाज़ भारत की बढ़ती समुद्री क्षमताओं, समुद्रों में राष्ट्रीय हितों की रक्षा के प्रति प्रतिबद्धता और आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना के मार्गदर्शन में रक्षा विनिर्माण में हो रही उल्लेखनीय प्रगति को दर्शाते हैं।
उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए मोदी ने पश्चिम बंगाल की ऐतिहासिक भूमि की सराहना की, जिसने भारत के बौद्धिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय पुनर्जागरण को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि 21 जून को विश्व स्तर पर अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस और विश्व जलविज्ञान दिवस के रूप में भी मनाया जाता है — और इसी दिन भारत के सबसे उन्नत जलविज्ञानीय सर्वेक्षण पोत का शामिल होना एक उल्लेखनीय संयोग है।
समुद्री शक्ति पर ज़ोर
मोदी ने आधुनिक विश्व में समुद्री सामर्थ्य के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि मज़बूत समुद्री क्षमताओं के बिना कोई भी राष्ट्र एक प्रमुख शक्ति के रूप में उभर नहीं सकता। उन्होंने कहा कि विश्व का अधिकांश व्यापार समुद्री मार्गों से होता है और विशाल वैश्विक डेटा नेटवर्क महासागरों के नीचे संचालित होते हैं।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि महत्वपूर्ण खनिज, गहरे समुद्र के संसाधन और ऊर्जा के भविष्य के स्रोत तेज़ी से समुद्री क्षेत्र से जुड़ते जाएंगे। किसी राष्ट्र का आर्थिक और रणनीतिक प्रभाव सीधे उसके समुद्री क्षेत्र की मज़बूती से जुड़ा हुआ है।
परिचालन क्षमता पर असर
इन तीनों जहाज़ों के शामिल होने से भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। समुद्री क्षेत्र की जागरूकता बढ़ेगी और भू-राजनीतिक खतरों के विरुद्ध तटीय जलक्षेत्र की सुरक्षा और सुदृढ़ होगी। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज़ हो रही है और भारत अपनी नौसैनिक उपस्थिति को व्यापक बनाने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय नौसेना, वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, श्रमिकों और देश के सभी नागरिकों को इस उपलब्धि पर बधाई दी। यह आयोजन भारत की बढ़ती प्रौद्योगिकीय और समुद्री क्षमताओं का प्रमाण है और आने वाले वर्षों में स्वदेशी रक्षा उत्पादन के और विस्तार की आधारशिला रखता है।