एक दिन में तीन वॉरशिप कमीशन: GRSE ने रचा इतिहास, भारतीय नौसेना में 80% स्वदेशीकरण
सारांश
मुख्य बातें
21 जून 2025 को भारतीय वॉरशिप निर्माण के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ा, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ही दिन में तीन अलग-अलग श्रेणियों के युद्धपोत भारतीय नौसेना को सौंपे। तीनों जहाज — आईएनएस दुनागिरी, आईएनएस अग्रय और आईएनएस संशोधक — कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) द्वारा निर्मित हैं। भारतीय नौसैनिक इतिहास में यह पहला अवसर है जब एक ही शिपयार्ड से निर्मित तीन भिन्न श्रेणियों के युद्धपोतों की डिलीवरी और कमीशनिंग एक साथ एक ही दिन में हुई हो।
तीनों युद्धपोत: क्या है खास
कमीशन किए गए तीन युद्धपोतों में पी-17ए एडवांस्ड स्टेल्थ फ्रिगेट आईएनएस दुनागिरी, एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट आईएनएस अग्रय और सर्वे वेसल (लार्ज) आईएनएस संशोधक शामिल हैं। तीनों जहाज अलग-अलग परिचालन भूमिकाएँ निभाते हैं — सतह युद्ध, पनडुब्बी-रोधी अभियान और समुद्री सर्वेक्षण। GRSE के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक कोमोडोर पी.आर. हरी (सेवानिवृत्त) ने कहा, 'यह एक ऐतिहासिक क्षण है। पिछले 65 वर्षों में हमने भारतीय नौसेना को 80 युद्धपोत सौंपे हैं, लेकिन यह उपलब्धि बेहद खास है।'
स्वदेशीकरण की मजबूत नींव
कोमोडोर हरी ने बताया कि भारतीय युद्धपोतों में स्वदेशी सामग्री का औसत स्तर 80 प्रतिशत से अधिक है, जबकि कुछ जहाजों में यह 90 प्रतिशत तक पहुँच गया है। जहाजों का डिज़ाइन और निर्माण में इस्तेमाल होने वाला इस्पात दोनों स्वदेशी हैं। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता की यह यात्रा लगभग 10 से 15 वर्ष पहले डिज़ाइन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने से शुरू हुई थी। अब वॉरशिप का आयात लगभग पूरी तरह बंद हो चुका है और 100 प्रतिशत निर्माण भारत में ही किया जाएगा।
GRSE की उत्पादन क्षमता और विस्तार योजना
वित्त वर्ष 2025-26 में GRSE ने आठ युद्धपोतों की डिलीवरी की — यानी औसतन हर डेढ़ महीने में एक जहाज। फिलहाल कंपनी की एक साथ 28 जहाज निर्मित करने की क्षमता है, जो इस कैलेंडर वर्ष के अंत तक बढ़कर 32 जहाज हो जाएगी। इसके अलावा, कंपनी दो विस्तार परियोजनाओं पर काम कर रही है — एक ब्राउनफील्ड परियोजना पश्चिम बंगाल में और एक ग्रीनफील्ड परियोजना गुजरात में। दोनों के पूरा होने में लगभग तीन वर्ष का समय लगेगा।
गौरतलब है कि GRSE के पास वर्तमान में तीन प्रमुख नौसैनिक परियोजनाएँ चल रही हैं — एक पी-17ए वॉरशिप, चार नेक्स्ट जेनरेशन ऑफशोर पेट्रोल वेसल (NGOPV) और चार एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट। चारों एंटी-सबमरीन क्राफ्ट इसी वित्तीय वर्ष में, पी-17ए इस कैलेंडर वर्ष में और NGOPV परियोजना 2029 तक पूरी होने का लक्ष्य है।
रोज़गार और इकोसिस्टम का विस्तार
GRSE में प्रत्यक्ष रूप से लगभग 1,600 स्थायी और करीब 6,500 अनुबंध कर्मचारी कार्यरत हैं, यानी कुल मिलाकर लगभग 8,000 लोग सीधे जुड़े हैं। एमएसएमई, स्थानीय उद्योगों और सहयोगी संस्थाओं को मिलाकर GRSE की परियोजनाओं से अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 50,000 लोगों को रोज़गार मिलता है। कोमोडोर हरी ने कहा कि इस इकोसिस्टम में भारतीय नौसेना, तटरक्षक बल, एमएसएमई और स्वदेशी निर्माता सभी शामिल हैं।
वैश्विक पहुँच: मिशन सागर और निर्यात
GRSE में निर्मित युद्धपोत और नौसैनिक पोत मालदीव, मॉरीशस, सेशेल्स और वियतनाम में सेवारत हैं। भारत के मिशन सागर के तहत हिंद महासागर क्षेत्र के मित्र देशों को सहयोग दिया जा रहा है, और आने वाले वर्षों में यह संख्या और बढ़ने की संभावना है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत रक्षा निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज कर रहा है।