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एक दिन में तीन वॉरशिप कमीशन: GRSE ने रचा इतिहास, भारतीय नौसेना में 80% स्वदेशीकरण

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एक दिन में तीन वॉरशिप कमीशन: GRSE ने रचा इतिहास, भारतीय नौसेना में 80% स्वदेशीकरण

सारांश

21 जून को भारत ने रक्षा क्षेत्र में एक नया इतिहास रचा — GRSE ने एक ही दिन में तीन अलग श्रेणियों के युद्धपोत नौसेना को सौंपे। 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री और 100% घरेलू निर्माण के लक्ष्य के साथ, भारत अब वॉरशिप आयात से लगभग मुक्त हो चुका है।

मुख्य बातें

21 जून 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ही दिन में तीन युद्धपोत — आईएनएस दुनागिरी, आईएनएस अग्रय और आईएनएस संशोधक — भारतीय नौसेना में शामिल किए।
तीनों जहाज कोलकाता स्थित GRSE द्वारा निर्मित; एक शिपयार्ड से एक दिन में तीन भिन्न श्रेणियों की कमीशनिंग — भारतीय इतिहास में पहली बार।
भारतीय युद्धपोतों में स्वदेशीकरण का स्तर 80% से अधिक , कुछ जहाजों में 90% से भी ज्यादा।
वित्त वर्ष 2025-26 में GRSE ने 8 युद्धपोत डिलीवर किए — औसतन हर डेढ़ महीने में एक।
GRSE की निर्माण क्षमता मौजूदा 28 से बढ़कर इस वर्ष के अंत तक 32 जहाज एक साथ होगी; पश्चिम बंगाल और गुजरात में विस्तार परियोजनाएँ जारी।
GRSE परियोजनाओं से प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष मिलाकर लगभग 50,000 लोगों को रोज़गार।

21 जून 2025 को भारतीय वॉरशिप निर्माण के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ा, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ही दिन में तीन अलग-अलग श्रेणियों के युद्धपोत भारतीय नौसेना को सौंपे। तीनों जहाज — आईएनएस दुनागिरी, आईएनएस अग्रय और आईएनएस संशोधककोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) द्वारा निर्मित हैं। भारतीय नौसैनिक इतिहास में यह पहला अवसर है जब एक ही शिपयार्ड से निर्मित तीन भिन्न श्रेणियों के युद्धपोतों की डिलीवरी और कमीशनिंग एक साथ एक ही दिन में हुई हो।

तीनों युद्धपोत: क्या है खास

कमीशन किए गए तीन युद्धपोतों में पी-17ए एडवांस्ड स्टेल्थ फ्रिगेट आईएनएस दुनागिरी, एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट आईएनएस अग्रय और सर्वे वेसल (लार्ज) आईएनएस संशोधक शामिल हैं। तीनों जहाज अलग-अलग परिचालन भूमिकाएँ निभाते हैं — सतह युद्ध, पनडुब्बी-रोधी अभियान और समुद्री सर्वेक्षण। GRSE के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक कोमोडोर पी.आर. हरी (सेवानिवृत्त) ने कहा, 'यह एक ऐतिहासिक क्षण है। पिछले 65 वर्षों में हमने भारतीय नौसेना को 80 युद्धपोत सौंपे हैं, लेकिन यह उपलब्धि बेहद खास है।'

स्वदेशीकरण की मजबूत नींव

कोमोडोर हरी ने बताया कि भारतीय युद्धपोतों में स्वदेशी सामग्री का औसत स्तर 80 प्रतिशत से अधिक है, जबकि कुछ जहाजों में यह 90 प्रतिशत तक पहुँच गया है। जहाजों का डिज़ाइन और निर्माण में इस्तेमाल होने वाला इस्पात दोनों स्वदेशी हैं। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता की यह यात्रा लगभग 10 से 15 वर्ष पहले डिज़ाइन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने से शुरू हुई थी। अब वॉरशिप का आयात लगभग पूरी तरह बंद हो चुका है और 100 प्रतिशत निर्माण भारत में ही किया जाएगा।

GRSE की उत्पादन क्षमता और विस्तार योजना

वित्त वर्ष 2025-26 में GRSE ने आठ युद्धपोतों की डिलीवरी की — यानी औसतन हर डेढ़ महीने में एक जहाज। फिलहाल कंपनी की एक साथ 28 जहाज निर्मित करने की क्षमता है, जो इस कैलेंडर वर्ष के अंत तक बढ़कर 32 जहाज हो जाएगी। इसके अलावा, कंपनी दो विस्तार परियोजनाओं पर काम कर रही है — एक ब्राउनफील्ड परियोजना पश्चिम बंगाल में और एक ग्रीनफील्ड परियोजना गुजरात में। दोनों के पूरा होने में लगभग तीन वर्ष का समय लगेगा।

गौरतलब है कि GRSE के पास वर्तमान में तीन प्रमुख नौसैनिक परियोजनाएँ चल रही हैं — एक पी-17ए वॉरशिप, चार नेक्स्ट जेनरेशन ऑफशोर पेट्रोल वेसल (NGOPV) और चार एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट। चारों एंटी-सबमरीन क्राफ्ट इसी वित्तीय वर्ष में, पी-17ए इस कैलेंडर वर्ष में और NGOPV परियोजना 2029 तक पूरी होने का लक्ष्य है।

रोज़गार और इकोसिस्टम का विस्तार

GRSE में प्रत्यक्ष रूप से लगभग 1,600 स्थायी और करीब 6,500 अनुबंध कर्मचारी कार्यरत हैं, यानी कुल मिलाकर लगभग 8,000 लोग सीधे जुड़े हैं। एमएसएमई, स्थानीय उद्योगों और सहयोगी संस्थाओं को मिलाकर GRSE की परियोजनाओं से अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 50,000 लोगों को रोज़गार मिलता है। कोमोडोर हरी ने कहा कि इस इकोसिस्टम में भारतीय नौसेना, तटरक्षक बल, एमएसएमई और स्वदेशी निर्माता सभी शामिल हैं।

वैश्विक पहुँच: मिशन सागर और निर्यात

GRSE में निर्मित युद्धपोत और नौसैनिक पोत मालदीव, मॉरीशस, सेशेल्स और वियतनाम में सेवारत हैं। भारत के मिशन सागर के तहत हिंद महासागर क्षेत्र के मित्र देशों को सहयोग दिया जा रहा है, और आने वाले वर्षों में यह संख्या और बढ़ने की संभावना है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत रक्षा निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज कर रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि क्या यह रफ्तार टिकाऊ है। GRSE की 28 जहाज एक साथ बनाने की मौजूदा क्षमता को खुद कंपनी के शीर्ष अधिकारी 'पर्याप्त नहीं' मानते हैं — यह स्वीकारोक्ति महत्वपूर्ण है। 80% स्वदेशीकरण प्रभावशाली है, लेकिन शेष 20% में अक्सर सबसे जटिल और संवेदनशील तकनीक होती है जैसे प्रोपल्शन सिस्टम, सेंसर और हथियार। जब तक उस 20% का भी स्वदेशीकरण नहीं होता, 'पूर्ण आत्मनिर्भरता' का दावा अधूरा रहेगा। ब्राउनफील्ड और ग्रीनफील्ड विस्तार की तीन साल की समयसीमा और NGOPV परियोजना का 2029 तक का लक्ष्य — इन्हें पूरा करना ही वास्तविक परीक्षा होगी।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

21 जून को कौन-से तीन युद्धपोत भारतीय नौसेना में शामिल किए गए?
21 जून 2025 को पी-17ए एडवांस्ड फ्रिगेट आईएनएस दुनागिरी, एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट आईएनएस अग्रय और सर्वे वेसल (लार्ज) आईएनएस संशोधक — तीनों को एक ही दिन में कमीशन किया गया। तीनों जहाज कोलकाता स्थित GRSE द्वारा निर्मित हैं।
GRSE क्या है और इसकी क्या भूमिका है?
गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) कोलकाता स्थित एक सरकारी रक्षा शिपयार्ड है। पिछले 65 वर्षों में GRSE ने भारतीय नौसेना को 80 से अधिक युद्धपोत सौंपे हैं और वर्तमान में यह एक साथ 28 जहाज निर्मित करने में सक्षम है।
भारतीय युद्धपोतों में स्वदेशीकरण का स्तर कितना है?
भारतीय युद्धपोतों में स्वदेशी सामग्री का औसत स्तर 80 प्रतिशत से अधिक है, और कुछ जहाजों में यह 90 प्रतिशत तक पहुँच गया है। जहाजों का डिज़ाइन और निर्माण में उपयोग होने वाला इस्पात दोनों स्वदेशी हैं।
GRSE की भविष्य की विस्तार योजनाएँ क्या हैं?
GRSE की निर्माण क्षमता इस कैलेंडर वर्ष के अंत तक 28 से बढ़कर 32 जहाज हो जाएगी। इसके अलावा पश्चिम बंगाल में एक ब्राउनफील्ड और गुजरात में एक ग्रीनफील्ड विस्तार परियोजना पर काम चल रहा है, जिन्हें पूरा होने में लगभग तीन वर्ष लगेंगे।
GRSE की परियोजनाओं से कितने लोगों को रोज़गार मिलता है?
GRSE में प्रत्यक्ष रूप से लगभग 8,000 कर्मचारी (1,600 स्थायी और 6,500 अनुबंध) कार्यरत हैं। एमएसएमई और सहयोगी उद्योगों को मिलाकर GRSE की परियोजनाओं से अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 50,000 लोगों को रोज़गार मिलता है।
राष्ट्र प्रेस
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