भारतीय नौसेना को एक ही दिन मिले तीन स्वदेशी युद्धपोत: गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट, एंटी-सबमरीन क्राफ्ट और सर्वे वेसल
सारांश
Key Takeaways
- भारतीय नौसेना ने 30 मार्च को तीन स्वदेशी युद्धपोत प्राप्त किए।
- इनमें एक गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट, एंटी-सबमरीन क्राफ्ट और सर्वे वेसल शामिल हैं।
- ये युद्धपोत भारतीय समुद्री सुरक्षा को और मजबूत करेंगे।
- तारागिरी को 3 अप्रैल को कमीशन किया जाएगा।
- दूनागिरी प्रोजेक्ट 17ए के तहत निर्मित है।
नई दिल्ली, 30 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय नौसेना अपने समंदर की शक्ति को और बढ़ाने के लिए निरंतर स्वदेशी युद्धपोतों को शामिल कर रही है। एक के बाद एक वॉरशिप की प्राप्ति के साथ, 30 मार्च का दिन विशेष रूप से महत्वपूर्ण बन गया। इस दिन, नौसेना को एक ही दिन में तीन स्वदेशी जहाज सौंपे गए। यह उपलब्धि गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) द्वारा हासिल की गई। इनमें एक गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट, दूसरा एंटी-सबमरीन वॉरफेयर क्राफ्ट और तीसरा सर्वे वेसल शामिल है।
नीलगिरी क्लास का एडवांस्ड गाइडेड स्टेल्थ फ्रिगेट ‘तारागिरी’ जल्द ही नौसेना में शामिल होने वाला है। इसे 3 अप्रैल को विशाखापत्तनम में औपचारिक रूप से कमीशन किया जाएगा, जहाँ इसे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा नौसेना को समर्पित किया जाएगा।
इससे ठीक तीन दिन पहले, 30 मार्च को जीआरएसई ने प्रोजेक्ट 17ए के तहत पांचवां गाइडेड स्टेल्थ फ्रिगेट ‘दूनागिरी’ भी नौसेना को सौंपा। यह नया वॉरशिप पूर्ववर्ती आईएनएस दुनागिरी का आधुनिक रूप है, जो लींडर श्रेणी का फ्रिगेट था।
यह पिछले 16 महीनों में भारतीय नौसेना को सौंपा गया पी17ए श्रेणी का पांचवां युद्धपोत है। पहले चार जहाजों के अनुभव के आधार पर निर्माण का समय 93 महीनों से घटाकर 80 महीने कर दिया गया है। प्रोजेक्ट 17ए के तहत सात नीलगिरी क्लास फ्रिगेट बनाए जा रहे हैं। पहले आईएनएस नीलगिरी के बाद, हिमगिरी और उदयगिरी भी शामिल किए जा चुके हैं। अब तारागिरी की बारी है।
इन सभी फ्रिगेट्स में ब्रह्मोस मिसाइल लगी है, जो एंटी-शिप और एंटी-सर्फेस युद्ध में अत्यधिक प्रभावी है। इसके अतिरिक्त, इसमें ‘बराक-8’ लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल, एयर डिफेंस गन, स्वदेशी टॉरपीडो ‘वरुणास्त्र’, एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर और आधुनिक सोनार जैसी क्षमताएँ भी शामिल हैं। इसमें दो हेलिकॉप्टर के लिए हैंगर भी मौजूद हैं। इन फ्रिगेट्स में लगभग 75%25 उपकरण स्वदेशी हैं और डिजाइन भी नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो द्वारा तैयार किया गया है।
भारतीय नौसेना ने एएसडब्ल्यू (एंटी-सबमरीन वॉरफेयर) शैलो वॉटर क्राफ्ट परियोजना भी शुरू की है। 2019 में 16 जहाजों के निर्माण का कॉन्ट्रैक्ट दिया गया था, जिनमें से 8 कोचिन शिपयार्ड और 8 जीआरएसई में बनाए जा रहे हैं। इसी परियोजना के तहत जीआरएसई ने ‘अग्रे’ को नौसेना को सौंपा है।
समुद्र के भीतर की स्थितियों का आकलन करना और हाइड्रोग्राफिक सर्वे करना आज अत्यंत आवश्यक है। भारतीय नौसेना ने 30 अक्टूबर 2018 को चार बड़े सर्वे जहाजों के निर्माण का कॉन्ट्रैक्ट किया था। इनमें चौथा और अंतिम सर्वे वेसल ‘संशोधक’ भी नौसेना को सौंपा गया है। यह जहाज समुद्र में सुरक्षित नेविगेशन के लिए आवश्यक मानचित्र तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।